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क्यों नाकाम हुई भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग?

बिहार विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने राम विलास पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को जोड़ कर जिस सोशल इंजीनियरिंग की कोशिश की, वह बुरी तरह नाकाम रही.

पार्टी के पास बिहार में जातीय पहचान वाले किसी बड़े नेता की कमी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का आरक्षण से जुड़ा बयान इसकी राह में रोड़ा बने.

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार ने इसके कारणों की पड़ताल की है.

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