वो क्या चीज़ है जो आपको बॉस बनाती है?

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हममें से कई लोग अपने जीवन में बड़ी भूमिका निभाना चाहते हैं. हम बॉस बनना चाहते हैं.

लेकिन जब हम बॉस बन जाते हैं तो क्या यही स्थिति बनी रहती है. शायद नहीं. बॉस बनना इतना ग्लैमरस भी नहीं होता. लेकिन हम कल्पना करते हैं कि यह ग्लैमरस होता होगा.

लेकिन उद्यमियों के लिए यह काफी सही होता है.

तो बॉस बनकर बेहतर करने का राज क्या होना चाहिए. लिंक्डइन इनफ्लूयेंशर में इसी टॉपिक पर बात हुई.

बीबीसी कैपिटल आपको दो लोगों की राय को बता रहा है.

रिचर्ड ब्रेनसन, संस्थापक, वर्जिन ग्रुप

ब्रेनसन ने अपनी पोस्ट व्हाट डज इट टेक टू बी द बॉस? में लिखा है, "मुझसे प्राय पूछा जाता है कि वह चीज क्या है जो आपको बॉस बनाती है. मेरे ख़्याल से दो तरह के बॉस होते हैं- एक तो मैनेजर और दूसरे लीडर."

लीडर की भूमिका के बारे में ब्रेनसन ने लिखा है लोगों के साथ काम करना और दूसरों के जीवन में बेहतर के लिए बदलाव लाना ही लीडर की भूमिका है.

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वहीं प्रबंधन के बारे में ब्रेनसन ने कहा, "प्रबंधन में प्रक्रिया, अनुशासन और व्यवस्था को कायम रखने की भूमिका होती है. मैनेजर नियमों को लागू रखते हैं. जबकि लीडर नियमों को तोड़ने का काम करता है और रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं."

कारोबार की दुनिया में दोनों पहलू अहम हैं. अगर आप अपना कारोबार करना चाहते हैं तो बॉस की भूमिका के साथ साथ नेतृत्व का गुण अहम होता है. ब्रेनसन ये भी मानते हैं कि अगर आपको कंपनी को कामयाब बनना है तो दोनों तरह के लोगों को रखना चाहिए.

ब्रेनसन ने कहा, "कारोबारी दुनिया में बॉस की भूमिका के लिए मैनेजर और लीडर दोनों तरह के लोग चाहिए."

अगर आप किसी चीज़ में यकीन करते हैं तो आपकी प्रतिबद्धता को बल मिलता है. इसकी वजह से ऐसे लोगों को नियुक्त करते हैं जो आपके नजरिये के मुताबिक काम करते हैं और आपको कामयाब होने में मदद करते हैं.

ब्रेनसन ने लिखा है, "पैशन से ना केवल नौकरी मिलने में मदद मिलती है बल्कि इससे आपको दूसरे उद्यमियों के साथ सहज रिश्ता और साझेदारी बनाने का मौका मिलता है. हममें से अधिकांश लोग अच्छे प्रबंधक चाहते हैं, ताकि कारोबार बढ़े."

रॉन सैक, संस्थापक, चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी पेनेरा ब्रेड

सैक ने अपने पोस्ट वांट टू बी द बॉस? बेटर नो एक्सेटली व्हाट इट मींस में सैक ने लिखा है कि बॉस शब्द से ज्यादातर लोग अच्छे कार्यकारी अधिकारी की कल्पना करते हैं जो हमेशा बैठकों में रहता है और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की मदद करता है. लेकिन ठीक ऐसा ही नहीं होता है.

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सैक लिखते हैं, "मेरे लिए बॉस होने का मतलब लगातार चुनौतियों का सामना करना है. इसमें कड़े फ़ैसले लेने से पहले अनिद्रा भरी रातों की चुनौती का सामना करना भी शामिल है क्योंकि कई भी कड़े फैसले नहीं लेना चाहता. उसे यह भी मालूम होता है कि उस फैसले की कामयाबी और नाकामी की जिम्मेदारी भी उसकी ही बनेगी."

सैक के मुताबिक बॉस होने की अपनी चुनौतियां है. इनमें शामिल हैं, "प्राय आप जिस कारोबार को संभालते हैं वह आपका नहीं होता. किसी भी कारोबार को खड़ा करना हमेशा काफी चुनौतीपूर्ण होता है. आपको लगतार काम करना होता है. आप कहीं भी हों, कार में, बाथरूम या फिर छुट्टियों में. आप काम पर होते हैं. जो लोग कारोबार खड़ा करते हैं, वो कभी प्रतिबद्धताओं में पीछे नहीं हटते."

सैक के मुताबिक इस दौरान आपके सामने कई फैसले लेने की चुनौती आती है क्योंकि एक बॉस की चुनौती कभी खत्म नहीं होती.

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वह कहते हैं, "जब तक कारोबार आपकी जिम्मेदारी है, आपको लंबे समय के बारे में सोचने की जरूरत है. आपको नया कुछ करने, सुधार करने और बेहतर करने की जरूरत है. अगर आप कामयाब होंगे तो आपकी जिम्मेदारियों का दायरा भी बढ़ेगा."

सैक कहते हैं, "बॉस होने पर आपको कई बार लंबी और अकेलेपन भरी यात्रा का बोध होता है. इसकी कीमत भी मिलती है. यह पैसा और ताक़त ही नहीं होता है. मेरे लिए यह लोगों की समस्याएं दूर करने का आनंद जैसा है. मेरे लिए यह वह मौका है जो दूसरों को नहीं मिला है और ऐसी रणनीति विकसित करनी है, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की है."

सैक के मुताबिक बॉस होना अपने आप में असीमित पुरस्कार हासिल करने जैसा है अगर आप ये समझते हों कि आप किस लिए काम कर रहे हैं.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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