'...जैसे देश में गृह युद्ध की स्थिति हो'

  • 11 नवंबर 2015
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पांचजन्य ने कहा है कि भारतीय मीडिया में देश में असहिष्णुता की बात को ऐसे बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा है जैसे भारत में गृह युद्ध की स्थिति हो.

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की विचारधारा को व्यक्त करने वाली पत्रिका में छपे एक लेख के अनुसार ये बिहार चुनाव के पहले देश में बनाए गए माहौल का हिस्सा था.

9 नवंबर के ऑनलाइन संस्करण में पत्रिका ने मीडिया पर कटाक्ष करते हुए लेख का शीर्षक दिया है- 'मीडिया की असहिष्णुता.’

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Image caption हाल के दिनों में साहित्यकारों, वैज्ञानिकों, कलाकारों ने पुरस्कार वापस किए हैै.

लेख में एनडीटीवी इंडिया पर निशाना साधा गया है. चैनल ने देश में कलाकारों के पुरस्कार वापसी पर बहस ऑर्गनाइज़ कराई थी.

लेख में ‘कुछ अति सेकुलरवादी पत्रकारों‘ के ज़रिये करवा चौथ के व्रत को दक़ियानूसी सोच वाला त्योहार बताने पर उन्हें आड़े हाथों लिया गया है.

मगर पांचजन्य ने सिर्फ़ मीडिया को ही नहीं बल्कि कलाकारों, कवियों, गीतकारों को भी पक्षपाती बताया है.

दिबाकर बनर्जी को जहां ‘नए-नवेले फ़िल्म निर्देशक’ बताया गया है, वहीं गीतकार और कवि गुलज़ार पर बिहार के ‘गठबंधन को वोट देने की अपील करने वाला‘ बताया गया है.

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Image caption कुछ हल्क़ों में छोटा राजन को देशभक्त डॉन के तौर पेश करने की कोशिश होती रही है.

फ़रीदाबाद में एक दलित परिवार के बच्चों को कथित तौर पर जलाए जाने के मामले को पत्रिका ने दुर्घटना बताने की कोशिश की है.

पांचजन्य लिखता है, ‘आग की फारेंसिक रिपोर्ट सामने आई है. इससे इशारा मिलता है कि शायद आग बाहर से नहीं, बल्कि घर के अंदर से ही लगी है.’

इसमें लिखा गया है कि कैसे कुछ अंग्रेज़ी अख़बार और एक न्यूज़ चैनल छोटा राजन को ‘हिंदू डॉन’ बता रहे हैं. अख़बार के मुताबिक़ ये वहीं लोग हैं जिन्होंने कभी ‘हिंदू आतंकवाद’ की कहानी गढ़ी थी.

इसमें पूछा गया है कि इस हिसाब से तो दाऊद इब्राहिम को ‘मुसलमान डॉन’ और ‘कश्मीर में दहशत फैला रहे लोगों को मुसलमान डॉन ही‘ कहा जाना चाहिए.

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