बलराज, संजीव, शबाना और वो बूढ़े एके हंगल

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भारतीय जननाट्य संघ यानी इंडियन पीपल्स थिएटरएसोसिएशन (इप्टा) का जन्म वैसे तो अंग्रेजों के शासन और फासिस्ट ताकतों के विरोध में हुआ था.

लेकिन देखते-देखते इसने एक आंदोलन का रूप ले लिया. सही मायनों में कहा जाए तो रंग संस्कार को इप्टा के नाटकों ने लोकधर्मिता के उत्सव में तब्दील कर दिया.

एक दौर में बॉलीवुड की फ़िल्मों में प्रवेश का रास्ता भारतीय जन नाट्य संघ यानी नाट्य मंडली से होकर ही गुजरता था.

इप्टा ने बॉलीवुड को कई चर्चित कलाकर भी दिए. एक से बढ़कर एक उम्दा कलाकार, लेखक, गीतकार, निर्देशक का ठिकाना था इप्टा.

एक नजर कुछ ऐसे कलाकारों पर, जो इप्टा से जुड़े रहे हैं.

बलराज साहनी

इप्टा के मशहूर कलाकारों में से एक बलराज साहनी बीबीसी हिंदुस्तानी सेवा के प्रसारक भी रह चुके थे. बलराज साहनी के अभिनय करियर को शुरुआती दिशा इप्टा के नाटकों में ही मिली. इप्टा की बनाई फिल्म धरती के लाल के जरिए ही बलराज साहनी ने 1946 में फ़िल्मों की दुनिया में क़दम रखा.

हालांकि वे कुछ समय के लिए इप्टा से अलग भी हो गए थे, लेकिन 1969 में फिर से इप्टा में शामिल हुए. बलराज साहनी को आज भी हमलोग, दो बीघा ज़मीन और काबुलीवाला जैसी फ़िल्मों के लिए याद किया जाता है.

दीना पाठक

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दीना पाठक इप्टा की संस्थापक सदस्यों में शामिल रहीं. हिंदी और गुजराती नाट्य जगत में उनका अहम योगदान रहा है.

मुंबई में कॉलेज के दिनों में ही वे इप्टा से जुड़ गई थीं. इतना ही नहीं दीना पाठक ने क़रीब छह दशक लंबे अपने फिल्मी करियर में 120 फ़िल्मों भी काम किया, जिनमें गोलमाल, उमराव जान, तमस, सत्यकाम और मोहन जोशी हाज़िर हो जैसी फ़िल्में शामिल हैं.

संजीव कुमार

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अपने संजीदा अभिनय के बूते बॉलीवुड में ख़ास मुकाम बनाने वाले संजीव कुमार को अभिनय का पहला ब्रेक इप्टा के नाटक में ही मिला था. मशहूर एक्टर एके हंगल ने उन्हें सबसे पहले 25 साल की उम्र में इप्टा के नाटक में 70 साल के बूढ़े के किरदार की भूमिका दी थी. डमरू नाटक में संजीव कुमार एके हंगल के साथ नज़र आए.

अली सरदार जाफ़री

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प्रगतिशील लेखक संघ के आंदोलन से जुड़े अली सरदार जाफ़री ने इप्टा की पहली फ़िल्म धरती के लाल के गीत लिखे थे. इसके अलावा उन्होंने इप्टा के दो नाटक भी लिखे.

इस तस्वीर में अली सरदार जाफ़री मशहूर लेखिका इस्मत चुगतई के साथ इप्टा के कार्यक्रम में नजर आ रहे हैं.

शबाना आज़मी

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100 से ज़्यादा फ़िल्मों में अपने अभिनय से ख़ास मुकाम बनाने वाली शबाना आज़मी अपने बचपन से ही इप्टा से जुड़ी रहीं, आखिर कैफ़ी और शौकत की बेटी होने की वजह से इप्टा के नाटकों इर्द गिर्द ही उनका बचपन बीता. फिलहाल शबाना इप्टा मुंबई की संरक्षिका भी हैं.

एके हंगल

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बलराज साहनी और कैफ़ी आजमी के साथ ही एके हंगल अपनी मार्क्सवादी रुझान के चलते इप्टा से जुड़ गए. जीवन के अंतिम समय तक वे इप्टा के नाटकों में काम करते रहे.

कैफ़ी आज़मी

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मशहूर गीतकार कैफ़ी आज़मी इप्टा के अध्यक्ष रहे हैं. उनके लिखे नाटक भी इप्टा में चर्चित रहे हैं. 1969 में उनका नाटक आख़िरी शमा काफ़ी मशहूर रहा था. उन्होंने गर्म हवा, कागज के फूल, शोला और शबनम, अनुपमा, हक़ीकत और हंसते जख़्म जैसी फिल्मों के गीत लिखे.

के ए अब्बास

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इप्टा के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे मशहूर निर्देशक के अब्बास. उन्होंने ही इप्टा की पहली फ़िल्म का निर्देशन किया था. 1946 में बनी इस फ़िल्म का नाम था धरती के लाल.

अब्बास ने ही सात हिंदुस्तानी में अमिताभ बच्चन को पहले पहल मौका दिया था. राजकपूर की आवारा और मेरा नाम जोकर जैसी फिल्में भी केए अब्बास ने ही लिखीं.

इस तस्वीर में वे इप्टा के एक कार्यक्रम में शरीक होने पहुंचे दिलीप कुमार और दीना पाठक के साथ सबसे दाईं ओर दिखाई दे रहे हैं.

पृथ्वीराज कपूर

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पृथ्वीराज कपूर ने पृथ्वी थिएटरकी शुरुआत की थी. लेकिन वे इप्टा के भी अध्यक्ष रहे. थिएटरमें उनके योगदान को देखते हुए इप्टा ने उनके नाम पर 1972 से इंटर कॉलेजिएट ड्रॉमा की शुरुआत की. बेस्ट प्रॉडक्शन के लिए पृथ्वी राज कपूर के नाम पर ट्रॉफी देने का चलन शुरू किया.

पृथ्वी राज कपूर के बाद पृथ्वी थिएटरकी विरासत संभालने वाले शशि कपूर इस तस्वीर में विजेता को ट्रॉफी प्रदान करते हुए दिख रहे हैं.

नसीरूद्दीन शाह

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नसीरुद्दीन शाह को समानांतर सिनेमा का उम्दा अभिनेता माना जाता रहा है. उनकी पत्नी रत्ना पाठक शाह, इप्टा के संस्थापकों में एक दीना पाठक की बेटी हैं. फिल्मों में संघर्ष के शुरुआती दिनों में नसीर इप्टा से जुड़ गए थे. इप्टा के 1975 में आए नाटक संभोग से संन्यास तक में नसीर और रत्ना पाठक ने एक साथ अभिनय किया था.

शौकत आज़मी

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कैफ़ी आज़मी की पत्नी शौकत आज़मी भी इप्टा के आयोजनों में काफी सक्रिय रहीं. उन्होंने इप्टा के कई नाटकों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं और इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.

शैलेंद्र

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इस तस्वीर में शंकर, वासु भट्टाचार्य, सलिल चौधरी के साथ सबसे दाईं ओर शैलेंद्र दिखाई दे रहे हैं. ये सब के सब अपने फन के माहिर फनकार रहे हैं और इनमें हर किसी का रिश्ता इप्टा से भी रहा है.

इप्टा के लिए गीत लिखने वाले शैलेंद्र ने तो राजकपूर को पहली बार गीत लिखने के लिए मना कर दिया था.

इप्टा से जुड़े कलाकारों की सूची लंबी है, लेकिन तस्वीरों की उपलब्धता के चलते ही हम यहां कुछ ही नाम शामिल कर पाए हैं.

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