इप्टा के 11 दिलचस्प नाटकों की झलक

  • 20 नवंबर 2015
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Image caption यह तस्वीर इप्टा के नाटक 'देखा अनदेखा' की है.

भारतीय जननाट्य संघ यानी इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) परफॉरर्मिंग आर्ट कलाकारों का देश में सबसे पुराना समूह है.

एक समय था, जब देश के 22 राज्यों में क़रीब 12 हज़ार कलाकार इप्टा से सक्रिय तौर पर जुड़े थे. इस सफ़र के दौरान इप्टा के कई नाटक काफ़ी मशहूर रहे हैं.

इसमें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और पंजाब जैसे राज्यों की अपने अपने सामाजिक सरोकार वाले ज्वलंतशील मुद्दों पर आधारित नाटक शामिल थे.

चाहे वह चरणदास चोर (हबीब तनवीर) का नाटक रहा हो, या फिर कबिरा खड़ा बाज़ार में (भीष्म साहनी) या फिर जादू की कुर्सी (बलराज साहनी) या फिर ये किसका ख़ून है (अली सरदार जाफ़री) और दूर देश की कथा (जावेद अख़्तर खाँ) हो, इन सबने मिलकर हिंदी की जनवादी-यर्थाथवादी नाटकों की दुनिया में संभावनाओं के नए दरवाज़े खोल दिए.

इप्टा का मुख्य केंद्र मुंबई ही रहा तो उसके तैयार किए गए नाटक देश भर में ज़्यादा मंचित होते रहे. इन नाटकों को लिखने वाले से लेकर इसमें अभिनय करने वाले तक नामचीन कलाकार शामिल रहे हैं.

इप्टा के कुछ मशहूर नाटकों की एक झलक-

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1. धरती के लाल: धरती के लाल इप्टा द्वारा बनाई गई फ़िल्म थी, जो बलराज साहनी की पहली फ़िल्म भी थी. यह मूल रूप से बंगाली नाटक नबान और जबानबंदी पर आधारित फ़िल्म थी. इसका निर्देशन केए अब्बास ने किया था. इसके गीत अली सरदार जाफ़री और प्रेम धवन ने लिखे थे और पंडित रविशंकर ने इसका संगीत तैयार किया था. भूख और अकाल को प्रदर्शित करने वाली फ़िल्म की एक तस्वीर.

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2. ताजमहल का टेंडर: इप्टा के जिन नाटकों का सबसे ज़्यादा मंचन हुआ है उनमें एक है ताजमहल का टेंडर. मौजूदा समय में व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को मारक शैली में उकेरने वाला नाटक जितना गुदगुदाता है, उतना ही सोचने पर मजबूर भी करता है. 2002 में अजय शुक्ला के लिखे और सलीम आरिफ़ के निर्देशन में इसका पहली बार मंचन हुआ. तस्वीर में राजन कपूर शाहजहां की भूमिका में हैं जबकि राकेश बेदी गुप्ता जी की भूमिका में.

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3. होरी: मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास गोदान पर आधारित इस नाटक को विष्णु प्रभाकर ने लिखा था. इसे पहली बार 1979 में मंचित किया गया. इस नाटक में लुबना सिद्दीक़ी, सुरेंद्र गुप्ता, एके हंगल, और रोहिणी हटंगडी जैसे कलाकार मंच पर नज़र आए थे.

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4. मोटेराम का सत्याग्रह: इप्टा के बेहद चर्चित नाटकों में एक है मोटेराम सत्याग्रह. यह नाटक मुंशी प्रेमचंद की कहानी सत्याग्रह पर आधारित नाटक है. इसे सफ़दर हाशमी और हबीब तनवीर ने मिलकर लिखा था. इसका निर्देशन एमएस सथ्यू ने किया. तस्वीर में आपको रीता रानी पांडे (चमेली जान की भूमिका), सुधीर पांडे (लाट साहब की भूमिका) और अखिलेंद्र मिश्रा (जासूस 303 की भूमिका) में नज़र आ रहे हैं.

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5. शतरंज के मोहरे: 1971 में पहली बार मंचित यह नाटक भी इप्टा के मशहूर नाटकों में एक रहा है. पीएल देशपांडे के लिखे इस नाटक का निर्देशन रमेश तलवार ने किया था. तस्वीर में रश्मि शर्मा और भरत कपूर अभिनय करते नज़र आ रहे हैं. यह नाटक व्यंग्य है जिसमें एक ताक़तवर शख़्स का मातहत किस तरह और किन परिस्थितियों में विद्रोह करता है, इसे दर्शाया गया है.

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6. हम दीवाने, हम परवाने: हम दीवाने, हम परवाने सागर सरहदी के दो लघु नाटकों का मंचन है. हम दीवाने में राष्ट्रीयता और उसकी पहचान और भारत की धर्मनिरपेक्षता की बात शामिल है. दूसरा हिस्सा हम परवाने सोशलिस्ट आंदोलन के एक नायक अशफ़ाक़ुुल्ला ख़ान वारसी के बारे में है. दरअसल इस नाटक में स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष को दिखाया गया है.

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7. कशमकश: इप्टा के मशहूर नाटकों में एक है कशमकश. इप्टा के अहम कलाकारों में से एक अंजन श्रीवास्तव, अवतार गिल और सुलभ आर्या की मुख्य भूमिका वाला यह नाटक दरअसल आम लोगों की मजबूरी का चित्रण है, जिसमें दिखाया जाता है कि सत्ता वर्ग किस तरह से आम जनता का शोषण करती है.

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8. एक बार फिर: पंजाब की पृष्ठभूमि में इस नाटक के ज़रिए निर्देशक अमृत पाल ने महिलाओं की दोयम दर्जे की तस्वीर पेश की है. एक बार फिर...एक औरत बिकी...एक बार फिर एक सौदा हुआ है...एक बार फिर...वही कहानी दोहराई गई, जो पहले कई बार दोहराई जा चुकी है, यही नाटक का थीम है. आधुनिकता के तमाम दावों के बावजूद भारत में महिलाओं की मुश्किलों को उकेरने वाले इस नाटक में मुख्य भूमिका इप्टा के नामचीन कलाकार राकेश बेदी ने निभाई है. तस्वीर में एकता और आसिफ़ शेख़ नजर आ रहे हैं.

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9. सैंया भये कोतवाल: वामन केंद्रे निर्देशित यह नाटक काफ़ी मशहूर रहा है. वसंत साबनिस के लिखे इस नाटक का पहली बार 1987 में मंचन हुआ था. तस्वीर में राजा की भूमिका में एके हंगल दिखाई दे रहे हैं जबिक जावेद ख़ान हवलदार की भूमिका में हैं.

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10. अगर मगर: इप्टा द्वारा मंचित यह नाटक बच्चों की थीम पर कहीं ज़्यादा था. गुलज़ार के लिखे इस नाटक को सलीम आरिफ़ ने निर्देशित किया था. 2006 में पहली बार मंचित इस नाटक का संगीत कुलदीप सिंह ने तैयार किया था.

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11. ख़ालिद की ख़ाला: यह नाटक ब्रैंडन थॉमस के चार्ली आंट पर आधारित नाटक है. जिसे हिंदुस्तानी शैली में क़ुदसिया ज़ैदी ने रूपांतरित किया था. 1974 में पहली बार मंचित एमएस सथ्यू के निर्देशन में इस नाटक में ईशान आर्य और मैकमोहन अभिनय करते नज़र आ रहे हैं.

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