छात्रों का साथ देने पर लेक्चरर को निकाला

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केरल के मल्लापुरम में एक कॉलेज ने निलंबित किए गए छात्र के समर्थन में फ़ेसबुक पोस्ट लिखने के कारण एक गेस्ट लेक्चरर को निकाल दिया है.

मोहम्मद शफ़ीक़ सीपी ने लड़कियों के साथ बेंच पर बैठने पर निलंबित किए गए कॉलेज छात्र के. दीनू के समर्थन में फ़ेसबुक पोस्ट लिखी थी.

शफ़ीक़ सुल्लामुसल्लम साइंस कॉलेज में गेस्ट लेक्चरर हैं. उन्हें कॉलेज प्रशासन ने जानकारी दी है कि अब उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं.

अधिकारियों का कहना है कि उनके शिक्षण में गुणवत्ता की कमी थी.

शफ़ीक़ ने बीबीसी से कहा, 'मौक़ा मिलने की कमी को ही चरित्र कहते हैं'.

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स्वायत्त संस्थान फ़ारूक कॉलेज में छात्र दीनू वी को चार छात्रों और चार छात्राओं के साथ मलयालम भाषा की कक्षा से बाहर निकलने को कहा गया था.

दीनू ने कक्षा में एक-दूसरे के साथ बैठने वाले छात्र-छात्राओं को सज़ा देने के प्रबंधन के निर्णय का विरोध किया था.

29 अक्तूबर को उन्हें कॉलेज से निलंबित कर दिया गया.

दीनू लैंगिक विभेद के ख़िलाफ़ 'दिशा' नाम का एक संगठन भी चलाते हैं.

उन्होंन बताया, "मलयालम शिक्षक ने कहा कि लड़कों और लड़कियों का साथ बैठना कॉलेज नियमों के विरुद्ध है. जब एक छात्रा ने इसे पूरी तरह लैंगिक भेदभाव बताया तो उसे डांट दिया गया और कहा गया कि जो भी इस नियम का पालन नहीं करेगा उसे कक्षा से बाहर जाना पड़ेगा."

केरल के शिक्षामंत्री पीके अब्दुरब ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, "शिक्षामंत्री के रूप में मैं क्लास में लड़कों और लड़कियों के एक बेंच पर बैठने का समर्थन नहीं करता. अगर वो अलग-अलग कुर्सियों पर बैठते हैं तो मुझे कोई दिक़्क़त नहीं है."

अब्दुरब का कहना है कि वो न ही मंत्री और न ही व्यक्तिगत तौर पर लड़के-लड़कियों के एक बेंच पर बैठने का समर्थन करते हैं.

बीए समाजशास्त्र के प्रथम वर्ष के विद्यार्थी दीनू कहते हैं कि कॉलेज के अधिकारियों ने उनसे माफ़ी मांगने को कहा था लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया.

कॉलेज अधिकारियों का कहना है कि वह लड़के और लड़कियों के एक बेंच पर बैठने की अनुमति अनुशासन टूटने की आशंका और कॉलेज की संस्कृति को बनाए रखने की वजह से नहीं दे सकते.

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प्रधानाचार्य ईपी इंबिचिकोया कहते हैं, "कॉलेज के 67 साल के इतिहास में कभी भी लड़के और लड़कियां एक साथ एक ही बेंच पर नहीं बैठे. यहां लैंगिक विभेद नहीं है. बहुत सारे अभिभावक हमारे मानदंडों का समर्थन करते हैं."

उधर सामाजिक कार्यकर्ता और मलयालम लेखक दीनू के समर्थन में उतर आए हैं.

मलयालम लेखिका और पटकथा लेखिका दीदी दामोदरन कहती हैं, "नागरिक समाज को ऐसे उल्टे कदम के विरोध में प्रतिक्रिया देनी चाहिए, उठ खड़े होना चाहिए."

विद्यार्थियों ने पहले भी शिकायत की थी कि कॉलेज प्रबंधन कैंपस में सार्वजनिक स्थानों पर साथ बैठने वाले लड़कों और लड़कियों पर दबाव बना रहा है. इनमें कैंटीन भी शामिल है जहां लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग पंक्तियां हैं.

कॉलेज कैंटीन में तीर के निशान लगाए हुए हैं जो लड़के और लड़कियों के बैठने के अलग-अलग स्थानों की ओर इशारा करते हैं.

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