बिटकॉइन, डार्क वेब: चरमपंथ का छुपा हुआ बटुआ

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विश्वभर में फैल रहे हथियारों, ड्रग्स और चरमपंथ के जाल में 'बिटकॉइन' और 'डार्क वेब' ने बड़ी भूमिका निभाई है क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां इस जाल को पूरी तरह भेदने में नाकाम रही हैं.

दुनियाभर की सुरक्षा एजेंसियों के सामने 'बिटकॉइन' और 'डार्क वेब' के ज़रिए हो रही गतिविधियां सभी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.

यही कारण है कि 33 से ज़्यादा देशों के सुरक्षा अधिकारी इस जाल को भेदने के लिए दिल्ली में जमा हुए हैं.

दिल्ली में इंटरपोल और यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनडीओसी) ने इसका आयोजन किया है जिसे केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई संचालित कर रही है.

बुधवार को इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चरमपंथ को रोकने के लिए सबसे पहले इन गुटों की फंडिंग को रोकना होगा.

उनका कहना था, "पेरिस में हुए हमले में साफ़ हो चुका है कि चरमपंथियों के पास हमले के लिए काफ़ी फंडिंग थी."

इंटरपोल के महासचिव जर्गेन स्टॉक का भी कहना था कि सभी देशों को साथ मिलकर अपराध और चरमपंथ के जाल को पूरी तरह भेदने के लिए काम करना होगा.

सीबीआई की मुख्य सूचना अधिकारी देवप्रीत सिंह ने बीबीसी को बताया, "बिटकॉइन, एक तरह से हवाला की तरह का लेनदेन है जिसमें ड्रग्स और हथियार पैसों से नहीं बल्कि बिटकॉइन के ज़रिए खरीदे-बेचे जाते हैं. इसी तरह डार्क वेब के सहारे इंटरनेट की गतिविधि पर किसी की नज़र नहीं रह सकती."

सीबीआई अधिकारी कहती हैं, "बिटकॉइन के ज़रिए अवैध धंधा करने वाले उसे कैश भी करा लेते हैं. हाल तक एक बिटकॉइन की कीमत तक़रीबन 650 अमरीकी डॉलर है."

"इसी तरह डार्क वेब के ज़रिए अवैध धंधे एक पासवर्ड के सहारे चलते हैं. इस डार्क वेब को भेदने के लिए क्या करना होगा इस पर इंटरपोल और विश्वभर की सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी विचार कर रहे हैं."

इस सम्मेलन में भ्रष्टाचार और काले धन पर भी चर्चा हो रही है. सीबीआई के निदेशक अनिल सिन्हा का कहना था कि भ्रष्टाचार से हासिल किए गए काले धन को 'सफ़ेद करने' को रोकने में भारत प्रमुख भूमिका निभा रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रीय संसाधनों पर भ्रष्टाचार को रोकने की ज़रूरत पर कहा कि काले धन पर सरकार सारी जानकारियां जुटा रही है.

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