सोशल मीडिया पर वायरल 'हैप्पी टू ब्लीड'

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पटियाला की निकिता आज़ाद ने सोशल मीडिया पर एक मुहिम शुरू की है- 'हैप्पी टू ब्लीड'.

पिछले कुछ सालों में महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर हमारे समाज में जितनी भ्रांतियां या अंधविश्वास फैले हैं उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर महिलाएं मुखर होती रही हैं.

लेकिन अब तक पुरुषों ने इस पर कोई सीधी टीका टिप्पणी नहीं की थी.

इस बार त्रावणकोर देवाश्वम बोर्ड के अध्यक्ष प्रयार गोपालकृष्णन ने कहा कि महिलाओं को प्रसिद्ध साबरीमला मंदिर में प्रवेश की अनुमति तभी दी जाएगी जब उनकी शुद्धता की जांच करने वाली मशीन का आविष्कार हो जाएगा.

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गोपालकृष्णन के इस कथन के बाद निकिता ने फ़ेसबुक पर 'हैप्पी टू ब्लीड' पेज बनाया जिसमें उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया है कि "वो ये चार्ट या सेनिटरी नैपकिन लेकर अपनी तस्वीर पोस्ट करें ताकि सदियों पुराने इस पितृसत्तात्मक समाज के शर्मिंदा करने वाले इस खेल का विरोध किया जा सके."

फ़ेसबुक पेज पर लिखा है, "केरल के देवाश्वम बोर्ड के प्रमुख ने सेक्सिस्ट वक्तव्य दिया है कि महिलाओं को तभी मंदिर में दाख़िल होने दिया जाएगा जब ऐसी मशीनें आ जाएंगी जो ये चेक करें कि महिलाओं को मासिक धर्म चल रहा है या नहीं. इस बयान से उन्होंने महिला द्वेष की पुष्टि की हैै और उन मिथकों को मज़बूत किया है जो महिलाओं के चारों ओर गढ़ दिए गए हैं. "

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सोशल मीडिया में इस पेज पर महिलाओं की प्रतिक्रिया की बाढ़ आ गई. इस पेज पर बहुत से पुरुषों ने भी महिलाओं का समर्थन किया है.

उधर बोर्ड के अध्यक्ष गोपालाकृष्णन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था. "ये तो ऐतिहासिक परंपरा है कि दस वर्ष से बड़ी और पचास वर्ष से कम उम्र की महिला साबरीमला मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती."

कोल्लम प्रेस क्लब में उनसे किसी ने ऐसा पूछा था कि अगर ऐसी कोई मशीन इजाद हो जाए तो क्या उसे मंदिर में लगाया जाएगा, तो उन्होंने कहा था कि इस बारे में सोचा जाएगा.

हालांकि समाचारपत्र 'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' ने उनके हवाले से लिखा है, "आजकल ऐसी मशीनें हैं जो हथियारों के लिए शरीर का स्कैन कर जांच कर लेती हैं. ऐसा दिन भी आएगा जब ऐसी मशीन का आविष्कार होगा जो पता लगा सके कि मंदिर में दाख़िल होने का महिलाओं के लिए कौन सा "सही"समय है, तब हम महिलाओं के मंदिर में दाख़िल होने के बारे में सोचेंगे."

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