'मेरा डिप्टी सीएम बनने का चांस गया, ग्रेजुएट हूँ'

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बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और मंत्री तेज प्रताप यादव की शैक्षणिक योग्यता और क़ाबिलियत पर सोशल मीडिया पर तमाम सवाल उठाए गए.

इससे पहले केंद्रीय मानवसंसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्री पर भी सवाल उठे थे और उनको केंद्रीय मंत्री बनाए जाने की आलोचना हुई थी

तो क्या डिग्री ही योग्यता और क़ाबिलियत का असल पैमाना है?

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बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक और ट्विटर पन्ने पर भी इस संबंध में बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

कई लोगों ने इन दोनों को मंत्री बनाने के लिए नीतीश कुमार के फ़ैसले की भी आलोचना की है.

साथ ही, कुछ लोगों ने इनका बचाव भी किया और लिखा कि बिना मौका दिए सिर्फ़ किसी की शैक्षिक डिग्री के आधार पर उसकी आलोचना ग़लत है.

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ख़ुद तेजस्वी यादव ने अपने आलोचकों को अपने ट्विटर हैंडल @yadavtejashwi पर जवाब दिया, "किसी किताब को उसके कवर के आधार पर जज मत कीजिए."

जिसके जवाब में @RoflGandhi_ने लिखा, "लेकिन छोटे सरकार, आप भी तो किताब को उसके कवर के आधार पर ही जज करके वापस बस्ते में रख देते थे. कभी उसको खोला ही नहीं."

अरविंद कुमार लिखते हैं, "चपरासी के पद तक के लिए जब शैक्षिक योग्यता की ज़रूरत होती है तो राजनीति में क्यों नहीं?"

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इंतिख़ाब आलम ने लिखा, "तेजस्वी, लोगों की सेवा का अनुभव लिए बिना मंत्री बन गए. शैक्षिक योग्यता ना सही, कम से कम एक-दो साल रुक कर सेवा भाव का अनुभव तो ले लेते."

हेमराज गुर्जर ने लिखा, "राजनीति में डिग्री नहीं परिवारवाद ही असल योग्यता है."

भूपेंद्र ने लिखा, "उप मुख्यमंत्री जैसे ज़िम्मेदार पद पर बैठने के लिए कम से कम ग्रेजुएशन तो ज़रूरी ही है. तभी तो आपके अंदर सेवाभाव का जज़्बा आएगा. बिना पढ़े आपके ज्ञान का विस्तार ही नहीं होगा."

मनोज कुमार लिखते हैं, "अगर ऐसे लोग इतने बड़े पदों पर बैठने लगे तो लोगों का तो पढ़ाई से विश्वास ही उठ जाएगा. मेरा तो बिहार का उप मुख्यमंत्री बनने का चांस गया. क्योंकि मैं आठवीं फ़ेल नहीं हूं, ग्रेजुएट हूं."

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लेकिन तेजस्वी के लिए समर्थन की भी आवाज़ें उठ रही हैं.

सोनी खड़गा ने लिखा, "अगर कोई व्यक्ति राजनीति करने में समर्थ है. उसके अंदर राष्ट्र सेवा करने का जज़्बा है तो उसे डिग्री की ज़रूरत नहीं. पढ़े-लिखे नेताओं ने ही देश का कौन सा भला कर दिया है."

राहुल पांडे लिखते हैं, "बिना मौक़ा दिए सिर्फ़ डिग्री के आधार पर हो हल्ला करना बेकार है. मैं तेजस्वी को शुभतकामनाएं देता हूं. उम्मीद है कि वो हमारी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे."

पूजा लिखती हैं, "स्मृति ईरानी को केंद्रीय मंत्री बनाने वाली भाजपा को कोई हक़ नहीं है कि तेजस्वी और तेजप्रताप पर उंगली उठाए."

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