गोवा फ़िल्म महोत्सव के समानांतर दूसरा महोत्सव!

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पुणे फ़िल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया के छात्र गोवा के पणजी में 46वें अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म फ़ेस्टिवल के समानांतर एक अन्य फ़ेस्टिवल आयोजित कर रहे हैं.

जानकारी के अनुसार गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने मध्यस्थता का प्रस्ताव किया है.

ये फ़िल्म उत्सव 24 और 25 नवंबर को आयोजित हो रहा है.

पुणे फ़िल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया यानी एफ़टीआईआई के छात्र पिछले कई हफ़्तों से प्रदर्शन कर रहे हैं.

छात्र गजेंद्र चौहान को एफ़टीआईआई गवर्निंग काउंसिल का प्रमुख बनाए जाने के सरकारी निर्णय का विरोध कर रहे हैं.

एफ़टीआईआई छात्रों की ओर से जारी प्रदर्शन को 140 दिन पूरे होने वाले हैं.

इस कारण अधिकारियों ने गोवा में हो रहे फ़िल्म उत्सव में छात्रों की फ़िल्मों को नहीं दिखाने का निर्णय किया था.

छात्रों के लिए आम लोगों तक पहुंचने के लिए ये मौक़े बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. इसलिए उन्होंने गोवा में ही एक समानांतर फ़िल्म फ़ेस्टिवल आयोजित करने का फ़ैसला किया.

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एफ़टीआईआई छात्रों के ओर से अभी इस बारे में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

लेकिन बीबीसी से बातचीत में एक छात्र ने प्रस्ताव का स्वागत तो किया लेकिन कहा कि सबसे पहले जिस तरह पुलिस छात्रों को कथित तौर पर तंग कर रही है वो बंद होना चाहिए.

एफ़टीआईआई छात्र अजयन अदत बताते हैं कि 2010 में जब एफ़टीआईआई का गोल्डन जुबली समारोह हुआ तब से अंतरराष्ट्रीय उत्सव में छात्रों के लिए एक अलग स्लॉट होता है, साथ ही दूरदर्शन के लोकसभा चैनल पर इन फ़िल्मों को दिखाया जाता है.

वो कहते हैं, “ऐसी फ़िल्मों को कोई देखता नहीं है और ऐसी फ़िल्मों के लिए कोई प्लेटफॉर्म नहीं है. भारतीय टैक्सपेयर्स को भी पता होना चाहिए कि एफ़टीआईआई छात्र आखिर क्या कर रहे हैं. यशराज फिल्म हमारी फ़िल्मों को खरीदकर नहीं दिखाएगा.”

छात्रों का ये भी आरोप है कि पुणे पुलिस से उनकी सुरक्षा को खतरा है.

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अजयन अदत आरोप लगाते हैं कि एफ़टीआईआई के दो पूर्व छात्रों को बिना ठोस कारणों के हिरासत में ले लिया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया.

वो कहते हैं, “पुणे में हमारे खिलाफ़ मामला चल रहा है. हम शहर छोड़कर नहीं जा सकते.”

प्रतीक वत्स एफ़टीआईआई के पूर्व छात्र हैं और छात्रों के समर्थन में बेस्ट शॉर्ट फिल्म के लिए मिले राष्ट्रीय पुरस्कार को लौटा चुके हैं. वो गोवा में मौजूदा समानांतर फिल्म फेस्टिवल के आयोजन में लगे हैं.

उनके मुताबिक उन्हें छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता है और सालों में उन्होंने ऐसा माहौल कभी नहीं देखा.

वो बताते हैं, “फ़िल्म उत्सव में छात्रों और पूर्व छात्रों की फ़िल्मों को दिखाया जाएगा. हम जैसे छात्रों ने जिन्होंने अवार्ड वापस किए थे, उन फ़िल्मों को दिखाया जा रहा है. एफ़टीआईआई स्ट्राइक के दौरान जो फ़िल्में बनीं, उन फ़िल्मों को भी दिखाया जा रहा है.”

प्रतीक वत्स के अऩुसार वो बताना चाहते हैं कि फ़िल्में बनाना उनके लिए बेहद पवित्र काम है और वो फ़िल्म उत्सव की पवित्रता को समझते हैं.

प्रतीक वत्स का कहना है कि हालांकि उन्हें गोवा में स्थानीय संगठनों का समर्थन मिल रहा है, एक ऐसे आयोजन के लिए उस तरह का धन एकत्रित करना आसान नहीं रहा है.

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