औरतों और मर्दों की 'गुड गर्ल'!

'गुड गर्ल' शब्द सुनते ही मुझे अपनी टीचर की याद आ जाती है.

उनके मुताबिक़ 'गुड गर्ल' वो होती है जो मां-बाप का कहना माने, बड़ों की इज़्ज़त करे और घर को संभाले रखे.

(क्या है गुड गर्ल: देखिए बीबीसी गूगल हैंगआउट)

इस बात को लगभग दो दशकों से भी ज़्यादा हो गए हैं. बीबीसी पर चल रही '#100Women' सीरीज़ ने मुझे एक मौक़ा दिया कि मैं इस परिभाषा में आई तब्दीली को जाकर देखूं.

मैं निकल पड़ा सड़कों पर, अपना माइक निकाला और जो सुना और समझा, उससे वाक़ई 'गुड गर्ल' की परिभाषा बदल गई.

अमरजीत कौर पुरानी दिल्ली कि एक दुकान के सामने बैठीं थीं और लड़कियों के बारे में उनकी काफ़ी सटीक राय थी.

जीके तिवारी दुकान संभालते हैं और संस्कारी लड़की के बारे में बढ़ चढ़ कर बोले.

हितेक्षा दिल्ली युनिवर्सिटी में पढ़ती हैं और अपने दोस्तों के साथ कमला नगर में मिली.

इनसे मिलकर बहुत अच्छा लगा. मनोज ने कहा कि लड़कियां कुछ भी पहन सकती हैं पर मन साफ़ होना चाहिए.

जसलीन कौर के मुताबिक़ ‘गुड गर्ल’ के लिए घरेलू होना एक बहुत ही अहम गुण है.

मौहम्मद आसिफ़ की पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान इलाक़े में परचून की दुकान है.

पूजा भट्ट एक कवियित्री हैं और दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाक़े में घूम रही थी.

दिल्ली के चांदनी चौक इलाक़े में राजीव कपूर की कपड़ों की दुकान है.

सुनिता वहाल शाम को दफ़्तर से घर जाते हुए कनॉट प्लेस में मिली.

आजकल के युवा भी लड़कियों के बारे में काफ़ी अलग राय रखते हैं. यशबीर दिल्ली युनिवर्सिटी में छात्र हैं.

दो दशकों में 'गुड गर्ल' की परिभाषा बदली भी और कुछ हद तक मुझे मेरी टीचर की याद दिलाती रही.

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