शीत सत्र में उम्मीदों पर भारी अंदेशे!

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संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सरकार और विपक्ष ने मोर्चेबंदी कर ली है. पहले दो दिन मोर्चे पर शांति रहेगी, पर उसके बाद क्या होगा कहना मुश्किल है. फिलहाल सत्र को लेकर उम्मीदों से ज़्यादा अंदेशे नज़र आते हैं.

सरकार इस सत्र में ज़रूरी विधेयकों को पास कराना चाहती है. उसने विपक्ष की तरफ सहयोग का हाथ भी बढ़ाया है. प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय सभा में जीएसटी जैसे विधेयक को देश के लिए महत्वपूर्ण बताया है.

इधर, लोकसभा अध्यक्ष ने गरिमा बनाए रखने की आशा के साथ सांसदों को पत्र लिखा है. पर क्या इतने भर से विपक्ष पिघलेगा?

मॉनसून सत्र पूरी तरह हंगामे का शिकार हो गया. लोकसभा में कांग्रेस के 44 में से 25 सदस्यों का निलंबन हुआ. इस बार तो बिहार विधानसभा चुनाव में जीत से विपक्ष वैसे भी घोड़े पर सवार है.

सत्र के पहले दिन 'संविधान दिवस' मनाया जाएगा. सन 1949 की 26 नवंबर को हमारे संविधान को स्वीकार किया गया था. देश में इस साल से 'संविधान दिवस' मनाने की परंपरा शुरू की जा रही है.

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Image caption फिल्म अभिनेता आमिर ख़ान के बयान के बाद असहनशीलता पर फिर बहस तेज़ हो गई है

इस साल डॉ. भीमराव आंबेडकर की 125वीं जयंती भी है. सत्र के पहले दो दिन संविधान-चर्चा को समर्पित हैं. यानी शेष संसदीय कर्म सोमवार 30 नवंबर से शुरू होगा.

असहिष्णुता को लेकर जो बहस सड़क पर है, वह अब संसद में प्रवेश करेगी. यहाँ बहस किस रूप में होगी और उसका प्रतिफल क्या होगा यह देखना ज़्यादा महत्वपूर्ण है. ख़ासतौर से राज्यसभा में जहाँ सरकार निर्बल है.

सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने राज्यसभा और कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में असहिष्णुता पर चर्चा का नोटिस दिया है. येचुरी चाहते हैं कि नियमावली 168 के तहत इस पर चर्चा हो और सदन 'देश में व्याप्त असहिष्णुता के माहौल की निंदा का प्रस्ताव' पास करे.

देखना होगा कि पीठासीन अधिकारी किस नियम के तहत इस विषय पर चर्चा को स्वीकार करते हैं. फिलहाल सरकार घिरी हुई है. सम्मान वापसी ने उसकी छवि को पहले से बिगाड़ रखा है.

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संभव है कि प्रधानमंत्री संसद में वक्तव्य दें, पर क्या इतने भर से विपक्ष संतुष्ट हो जाएगा?

बहस होने की स्थिति में भाजपा के वक्ता भी आक्रामकता का जवाब आक्रामकता से देंगे. मॉनसून सत्र ख़त्म होने के एक दिन पहले सुषमा स्वराज ने कांग्रेस को धो दिया था. यह जोखिम अब भी है.

यह सत्र देश के आर्थिक, प्रशासनिक और राजनीतिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है. इसमें जीएसटी और भूमि अधिग्रहण जैसे कानूनों पर निर्णायक फ़ैसला हो सकता है. श्रम सुधार, भ्रष्टाचार और सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े क़ानूनों पर भी संसद विचार करेगी.

तीन अध्यादेशों को क़ानून बनवाना है. इनके अलावा पिछले सत्र से आठ बिल लोकसभा में और 11 राज्यसभा में अटके हैं. नए-पुराने मिलाकर कुल 35 विधेयक अब सामने हैं. छुट्टियों को अलग कर दें तो काम के 19-20 दिन मिलेंगे. कैसे पास होंगे इतने विधेयक?

सबसे बड़ी चुनौती जीएसटी विधेयक को राज्यसभा से पास कराने की है. भूमि अधिग्रहण विधेयक संयुक्त समिति के पास है.

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Image caption मोदी सरकार को शीत सत्र में कई मुद्दों पर तीखा विरोध झेलना पड़ सकता है

ह्विसिल ब्लोअर संरक्षण, भ्रष्टाचार रोकथाम, बैंकरप्सी कोड, रियल एस्टेट रेग्युलेशन, फैक्ट्री संशोधन और आरबीआई एक्ट जैसे कई महत्वपूर्ण विधेयक अटके पड़े हैं, जिनका अर्थव्यवस्था से सीधा रिश्ता है.

आर्थिक उदारीकरण पर कांग्रेस और भाजपा के नज़रिए में बुनियादी फर्क नहीं है, पर पिछले दो दशक से दोनों के बीच असहयोग की स्पर्धा चल रही है.

भाजपा ने भी विदेशी पूँजी निवेश, बैंकिग और इंश्योरेंस-सुधार और जीएसटी के रास्ते में अड़ंगे लगाए थे. सरकार अब विपक्ष से बात करके जीएसटी पास करा ले तो इसे उसकी बड़ी सफलता माना जाएगा.

भाजपा की असहिष्णु और कट्टरपंथी छवि के अलावा अरहर, प्याज और सरसों के तेल जैसी खाद्य वस्तुओं की बढ़ती क़ीमतों को लेकर सरकार पर वार होंगे. बाढ़, सूखा, कानून-व्यवस्था, पाकिस्तान और नेपाल के साथ रिश्ते भी निशाने पर होंगे.

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Image caption बिहार में महागठबंधन की जीत संसद सत्र के दौरान विपक्ष को ज़्यादा धार दे सकती है

मानसून सत्र संसदीय कामकाज के लिहाज से सूखा रहा, पर बिहार के चुनाव के पहले विपक्षी एकता की भूमिका और रणनीति उसी सत्र में विकसित हुई थी. उस एकता की परीक्षा भी अब होगी.

सरकार के अर्दब में आने मतलब यह नहीं कि कांग्रेस की पौ-बारह होगी. भाजपा विरोधी मोर्चा खड़ा करने के बाद क्या सारे विपक्षी दल कांग्रेस की छतरी के नीचे आ जाएंगे? क्या भाजपा विरोध के माने कांग्रेस का समर्थन है? क्या इस बीच तीसरी ताक़त भी उभरेगी?

इन सवालों के जवाब संसद के इसी सत्र में छिपे हैं. कुछ महीने बाद केरल, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं. उनका प्रस्थान बिन्दु भी यह सत्र बनेगा.

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