70 साल गाने के बाद भी जो हैं 30 की

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उन्होंने सात दशक तक सैकड़ों नई-पुरानी हीरोइनों को अपनी आवाज़ दी. उन्होंने भजन गाए और कैबरे भी.

साल 1943 में संगीत का सफ़र शुरू करने के बाद से अब तक वह 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड करवा चुकी हैं, जिसके लिए उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है.

वह हैं, 82 साल की उम्र में भी 30 का महसूस करने वाली आशा भोंसले.

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बीबीसी की #100Women सीरीज़ के लिए बीबीसी के एशियन नेटवर्क संवाददाता शबनम महमूद ने आशा से बात की.

वह कहती हैं, "अंदर से मैं अब भी 30 की ही हूं. आप मुझे बताएं कि यह करना है तो मैं वह कर दूंगी, बस यूं ही."

"वैसे गाने का मूड होता है. अगर कोई दर्द भरा गाना गाना है, तो मैं सोचूंगी (महसूस करूंगी) दर्द को और फिर गाऊंगी. इसी तरह अगर मस्ती भरा गाना हो तो उसका मूड बनाऊंगी. आप अपना मूड फ़टाफ़ट बदल सकते हैं."

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इसी बहुमुखी प्रतिभा के कारण वह बॉलीवुड के संगीत जगत के शीर्ष पर पहुंचीं. सात दशक की संगीत यात्रा के दौरान उन्हें अपने गाने के अंदाज़ में बदलाव भी करने पड़े.

वह कहती हैं, "मुझे करना ही पड़ा, वरना मैं वहीं की वहीं रह जाती. अगर आप युवाओं के साथ गाएंगे तो आपको 'कमबख़्त इश्क़', 'ले गई, ले गई' गाना ही पड़ेगा."

लेकिन क्या ऐसे गाने गाना उन्हें कभी असहज नहीं लगा?

आशा के अनुसार- नहीं, "ये अच्छे गाने हैं, 'कमबख़्त इश्क़', 'ले गई, ले गई'. धुन अच्छी है. शरारा-शरारा भी अच्छा है. मुझे नहीं लगता कि ये ख़राब संगीत है या ख़राब बोल हैं."

लेकिन जिस बॉलीवुड ने उन्हें शोहरत और समृद्धि दी, अब उससे आशा बहुत ख़ुश भी नहीं हैं.

"अब न अच्छे डॉयलॉग हैं, न अच्छी एक्टिंग. बस डांसिंग है, अच्छा संगीत भी नहीं है, बस रिदम-रिदम-रिदम. और मुझे यह अच्छा नहीं लगता."

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हालांकि ख़ुद आशा के गाने के अंदाज़ के कारण उन्हें 'सेक्सी गानों की क्वीन' माना जाता था. लेकिन उन्हें लगता है कि आजकल के गाने अश्लील हो गए हैं.

वह मानती हैं कि जब वह हेलेन जैसी अभिनेत्रियों के लिए आइटम गाने गाती थीं तो तब उन्हें ख़राब बोल करार दिया जाता था, "लेकिन अब मुझे लगता है कि वह तो भजन थे. आज के गाने बहुत बुरे हैं."

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लेकिन यह सिर्फ़ ख़राब बोलों का मुद्दा नहीं है. महिला अधिकार समर्थक बॉलीवुड की महिलाओं के अत्यधिक कामुक चित्रण के लिए भी इसकी आलोचना करते हैं. उनका कहना है कि यह यौन हिंसा के लिए प्रेरित कर सकता है.

आशा इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं. वह कहती हैं, "बुरे लोग, बुरे ही होते हैं. ऐसा नहीं कि वह फ़िल्म देखेंगे और फिर बुरा काम करेंगे."

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"लेकिन कुछ लोग जब देखते हैं कि ख़ूबसूरत लड़की ने बहुत छोटे कपड़े पहने हुए हैं, जैसे कि बिकिनी और वह डांस कर रही है, वह भी अश्लील...तो वह सोचते हैं...फिर आदमी, आदमी ही होता है."

लेकिन इस प्रवृत्ति से आशा और उनकी दीदी लता पर कभी असर नहीं पड़ा. दशकों तक वह बॉलीवुड के दो ध्रुव बनी रहीं, जिनकी नक़ल तो बहुतों ने की, लेकिन बराबरी कोई नहीं कर पाया.

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आशा कहती हैं, "बहुत सालों एक तरफ़ लता मंगेशकर थीं, एक तरफ़ आशा भोसले. कोई तीसरी कलाकार नहीं थी. हमने रानियों की तरह राज किया."

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