सोशल मीडिया पर 'सैटेनिक वर्सेज़'

  • 29 नवंबर 2015
ट्विटर पर सलमान रुश्दी

सलमान रुश्दी की विवादित और भारत में प्रतिबंधित किताब 'सैटेनिक वर्सेज़' एक बार फिर ख़बरों में है.

इसकी चर्चा सोशल मीडिया पर ज़बर्दस्त ढंग से हो रही है, ख़ासकर ट्विटर पर यह छाया हुआ है.

इस बार विवाद की शुरुआत कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के एक बयान से हुई. शनिवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 'सैटेनिक वर्सेज़' पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला ग़लत था.

उन्होंने कहा, "यदि आपने मुझसे यही सवाल आज से 20 साल पहले किया होता, तो भी मेरा यही उत्तर होता."

ख़ुद सलमान रुश्दी (@SalmanRushdie ) ने ट्वीट किया, "यह स्वीकार करने में 27 साल लग गए. इस ग़लती को ठीक करने से में कितना वक़्त लगेगा?"

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इस किताब पर प्रतिबंध 1988 में लगाया गया था. तब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री और चिदंबरम गृह राज्यमंत्री थे.

उनके इस बयान को लेकर ट्विटर पर प्रतिक्रियाओं की मानो बाढ़ आ गई है.

@SriharshaTweets लिखते हैं, "'सैटेनिक वर्सेज़' पर बहस को एक बार फिर छेड़कर क्या कांग्रेस अपनी हिंदू-विरोधी और मुसलमान समर्थक छवि बदलना चाहती है?"

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विजय रंजन (@niharkhan) ने ट्वीट किया, "1988 और उसके बाद किसी ने 'सैटेनिक वर्सेज़' पर लगी रोक के ख़िलाफ़ साहित्य अकादमी पुरस्कार वापस नहीं किया. क्या वे इसे सही मानते थे? क्या इस पर कोई जवाब है?

@देश प्रेमी (Deshpremi12) का कहना है, "कृपया 'सैटेनिक वर्सेज़' को रोकिए. इसने हमारा काफ़ी ख़ून पी लिया है."

देश इनटोलेरेंट ने लिखा है, "देश में सहिष्णुता की परख के लिए सरकार को 'सैटेनिक वर्सेज़' पर लगी रोक हटा लेनी चाहिए."

शाहिद सिद्दीक़ी सवाल करते हैं, "चिदंबरम ने तब विरोध क्यों नहीं किया जब 'सैटेनिक वर्सेज़' पर रोक लगी थी. आज इसका विरोध कर वे अपनी मौक़ापरस्ती ही साबित कर रहे हैं."

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