'हिंदू शासक' वाले बयान पर लोकसभा में बवाल

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Image caption गृहमंत्री राजनाथ सिंह (फ़ाइल फ़ोटो)

लोकसभा में सोमवार को 'बढ़ती असहिष्णुता' के मुद्दे पर बहस '800 साल बाद हिंदू शासक वाली' टिप्पणी की भेंट चढ़ गई.

विवाद उस वक़्त शुरू हुआ जब सीपीएम सांसद मोहम्मद सलीम ने एक पत्रिका में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नाम से छपी टिप्पणी पढ़ी.

पत्रिका के मुताबिक़ ये बयान राजनाथ सिंह ने पिछले साल आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद दिया था.

इस पर भाजपा सांसदों ने आपत्ति जताई और फिर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा है.

उन्होंने कहा, "अपने संसदीय जीवन में कभी मैंने इतना आहत महसूस नहीं किया है जितना आज कर रहा हूं. ऐसा बयान देने वाले व्यक्ति को गृह मंत्री होने का नैतिक अधिकार ही नहीं है."

भाजपा नेता राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि मोहम्मद सलीम को अपनी टिप्पणी वापस लेनी चाहिए.

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राजनाथ सिंह ने कहा, "मैंने ये कब कहा? उन्हें या तो इस बात को साबित करना चाहिए या फिर माफी मांगनी चाहिए."

इस मुद्दे पर हंगामे के बीच लोकसभा स्पीकर ने कहा कि ये चर्चा सदन के रिकॉर्ड में शामिल नहीं होगी.

उधर, सलीम ने कहा कि वो तो सिर्फ़ एक पत्रिका में लिखी बात को पढ़ रहे थे और अगर गृह मंत्री के बयान को ग़लत तरीके से छापा गया है तो वो पत्रिका को कानूनी नोटिस भेजें.

सोशल मीडिया पर भी ये मुद्दा छाया रहा. बहुत से ट्वीट्स में कहा गया कि ये बात राजनाथ सिंह ने नहीं, बल्कि विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल ने कही थी.

ग़ौरतलब है कि आउटलुक पत्रिका, जिसके लेख से मोहम्मद सलीम पढ़ रहे थे, उसने अपनी ग़लती मानते हुए कहा है कि वीएचपी के अशोक सिंघल की टिप्पणी ग़लती से राजनाथ सिंह के हवाले से छप गई थी. इस पर माफ़ी मांगते हुए पत्रिका ने कहा है कि उसका इरादा गृह मंत्री या संसद की छवि को नुकसान पहुँचाने का नहीं था.

दूसरी तरफ, लोकसभा में 'बढ़ती असहिष्णुता' के मुद्दे पर भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने सरकार का बचाव किया.

उन्होंने कहा कि विपक्षी दल मोदी सरकार की छवि को ख़राब करने के लिए एक माहौल तैयार कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक घटनाएं उन राज्यों में भी हो रही हैं जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकारें नहीं हैं.

उन्होंने पुरस्कार लौटाने वालों को 'बौद्धिक लड़ाके' बताया.

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