पुश्तैनी घर को बना डाला 'ग्रीन'

दक्षिणी दिल्ली के चितरंजन पार्क में कुछ घर बेहद खूबसूरत हैं और कुछ थोड़े पुराने हो चले हैं. ऐसा ही एक घर 'ग्रीन होम' भी है जो कई दूसरों की तरह ही आलीशान और नया-नवेला दिखाई पड़ता है.

लेकिन दरअसल इस चार मंजिला इमारत को टेरी (द एनर्जी एंड रिसॉर्सेज इंस्टीटय़ूट) की ओर से हरित इमारतों की पांच सितारा 'गृहा' रेटिंग दी गई है.

टेरी किसी भी इमारत को 20 बिंदुओं पर ग्रीन बिल्डिंग का प्रमाण पत्र जारी करती है और इससे पहले कई दफ्तरों और बिल्डिंगों को ये प्रमाणपत्र मिल चुके हैं. घर के मालिक प्रशांतो कुमार रॉय ने अपने पुश्तैनी मकान को गिराकर इस ग्रीन होम को बनाने का फ़ैसला लिया था.

प्रशांतो बताते हैं, "लेकिन पुराने घर को भी मैंने सहेज कर रखा है. क्योंकि मैंने पेड़-पौधे, दरवाज़ों की चौखटें और यहाँ तक कि तमाम ईंटों तक को इस नए घर में इस्तेमाल किया है". इस घर को डिज़ाइन करने वाले नीलांजन भोवाल के अनुसार इसे ऐसा बनाया गया है जिससे बिजली की खपत 30 प्रतिशत कम हो. इमारत को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसकी हर मंजिल के हर कमरे में सूरज की रोशनी पहुंचती है.

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इस वजह से कमरों और यहाँ तक कि इमारत के बेसमेंट में भी दिन में लाइट जलाने की जरूरत नहीं पड़ती.

उनके बाथरूमों में पानी की सप्लाई पर भी पूरा नियंत्रण रखा जा सकता है जिससे पानी की बर्बादी न हो.

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छत पर तो सोलर पैनलों से पानी गर्म होता ही है, बेसमेंट में रेन वॉटर हारवेस्टिंग यानी बरसाती पानी को जमाकर दोबारा इस्तेमाल करने का भी प्रावधान है.

प्रशांतो रॉय ने कहा कि इस बात में कोई शक नहीं कि जब उन्होंने ऐसे एक ग्रीन होम का सुझाव रखा तब कई लोगों को लगा था कि ये सफल भी होगा कि नहीं. प्रशांतो ने कहा, "चौथी मंज़िल के ऊपर सोलर पैनलों के बीच वाले बगीचे में अधिकतर पौधे वो हैं जो मेरे पिता के लगाए हुए थे. हमारी कोशिश ये थी कि मकान में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल हो जो पर्यावरण से मेल खाती हो."

इस ग्रीन होम के हवादार कमरों, बेसमेंट, घास और पेड़-पौधों से लदी हुई छत देखने के बाद मेरा कौतूहल इस पर खर्च होने वाले पैसों पर बढ़ता जा रहा था.

प्रशांतो ने जिज्ञासा शांत की और बताया, "मैं दावे के साथ अब ये कह सकता हूँ कि जितनी लागत एक साधारण और आरामदायक घर के बनने में लगती है, उससे सिर्फ़ 10 प्रतिशत प्रति वर्ग फ़ुट की ही लागत मेरे घर में ज़्यादा आई है. आगे आने वाले समय में बिजली और पानी की होने वाली बचत से भी हम फ़ायदे में ही रहेंगे".

मुद्दे की बात ये भी है कि अगर आप अपने मौजूदा घर को बिना गिराए, बिना ढहाए ग्रीन या पर्यावरण के करीब ले जाना चाहते हैं तो ये चीज़ें अब संभव है.

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