डिस्लेक्सिया के साथ 45 पेटेंट का सपना

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"उन्हें एक सपना दिखाएं और उसके लायक बनाएं. आरक्षण की श्रेणी क्यों?"

यह कहते हैं 26 साल के एक नौजवान उद्यमी अजित बाबू. वह यह सलाह मस्तिष्क पक्षाघात या डिस्लेक्सिया से ग्रस्त लोगों के लिए देते हैं.

'मस्तिष्क पक्षाघात या डिस्लेक्सिया' से पीड़ित अजित खुद कहते हैं कि उन्हें किसी भी 'सामान्य' आदमी की तरह चुनौतियों का सामना करना पड़ा क्योंकि उनके पास 'कोई विकल्प नहीं' था.

उन्होंने पांच साल तक कई कंपनियों में काम करने के बाद लाइफ़हैक इनोवेशन नाम की कंपनी शुरू की.

यह कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल से चलने वाला पॉवर बैंक बनाती है.

बीबीसी हिंदी से बातचीत में अजित ने बताया, "विकल्पों की कमी ने मुझे आत्मविश्वास दिया. ऐसा कोई सवाल कभी नहीं उठा कि यह काम अजित नहीं कर सकता इसलिए उसे करने दो. अगर मेरा भाई कोई काम कर सकता था तो मैं भी कर सकता था. मेरे माता-पिता ने यह रवैया अपनाया और इसने मुझे आत्मविश्वास से भर दिया."

वह खुले तौर पर मानते हैं कि उनके लिए "संख्याएं और नाम याद रखना मुश्किल काम है. जो कुछ भी उन्होंने सीखा है वो अनुभव और ज़रूरतों से सीखा है. मुझे जो चाहिए होता है, वह अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लोगों से कह देता हूँ."

अजित पत्रकारिता के छात्र हैं. उन्होंने कोर्स के बीच में ही रुचि ख़त्म होने की वजह से पढ़ाई पूरी नहीं की.

उनकी पहली नौकरी एक बड़ी बीपीओ कंपनी में की और फिर दो साल के अंतराल में नौ कंपनियों में काम किया.

उनका कहना है, "मैं बहुत जल्दी उकता जाता हूं. मैं कुछ बड़ा करने के लिए पैदा हुआ था. मैं कुछ नया और चुनौतीपूर्ण काम करना चाहता था."

उन्होंने पहले एक विज्ञापन और ब्रैंडिंग कंपनी ड्रीम क्लिक कंसेप्ट की शुरुआत की लेकिन जल्दी ही इसे बंद कर दिया. जब उन्हें लगा कि जिस इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं, वहां समय पर भुगतान के मामले में पेशेवर रवैये की कमी है.

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उन्होंने फिर इस साल जून में दोस्तों से चंदा (क्राउडफ़ंडिंग) लेकर लाइफ़हैक इनोवेशन की शुरुआत की.

अजित बताते हैं, "इसकी शुरुआत नवीकरणीय ऊर्जा को रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाने के साथ हुई. हम एक गैजेट से घिरी दुनिया में रह रहे हैं. हम कैसे इन्हें नवीकरणीय ऊर्जा के अनुकूल बना पाते हैं? हम वायु ऊर्जा के भी इस्तेमाल के बारे में सोच रहे हैं. ऐसा हो सकता है कि आप अपने मोबाइल को रात में पंखे के नीचे रखें और सुबह उठें तो आपका मोबाइल चार्ज हो जाए."

वे कहते हैं, "मेरे पांव बंधे हैं. इसलिए लॉन्चिंग में 20 या अधिकतम एक महीने की देर हो चुकी है. एक बार जब ये तैयार हो जाएगा, तो हम इसे भारत और अफ़्रीका में लॉन्च करेंगे."

वह किसी निवेशक या पूंजीपति के पास नहीं जाना चाहते थे क्योंकि "बहुत दबाव रहता है और आप रिसर्च एंड डेवेलपमेंट पर बहुत कुछ नहीं कर सकते. जब तक मेरा उत्पाद तैयार नहीं हो जाता, मैं आज़ादी के साथ काम करना चाहता हूँ."

"क्राउडफ़ंडिंग के अलावा मैंने कई छोटे उद्यमों को रणनीतिक सलाह देकर भी पैसे कमाए हैं. कई कंपनियों के पास पैसे होते हैं, लेकिन पता नहीं होता कि कैसे खर्च करना है. मैं उन्हें इस बारे में सलाह देता हूँ. मैं प्रेरणादायक भाषण भी देता हूँ."

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अजित की योजना है कि उनकी कंपनी के पास एक साल के अंदर 45 पेटेंट होने चाहिए.

यह आत्मविश्वास उनके अंदर कहां से आता है? उनका कहना है, "हर किसी का कहना है कि मैंने सारी अड़चनें पार करते हुए यह मुकाम पाया है. पर मैं कहता हूँ कि मैंने कुछ नहीं किया. मैंने सिर्फ़ एक सामान्य ज़िंदगी जी है. जो कुछ किया, मेरे माता-पिता ने किया है क्योंकि उन्होंने मेरे मन में यह नहीं बैठाया कि मैं कुछ अलग था."

फिर कुछ सोचकर वह कहते हैं, "आज जब मैं सोचता हूं कि मेरे माता-पिता ने मुझे सामान्य महसूस कराने के लिए कितना कुछ किया है. कल्पना करें, समय से पहले पैदा हुए एक छोटे, नीले पड़ चुके बच्चे की, जिसे ज़िंदा रखा जाना है. मैं उनका अहसानमंद हूं."

और वह किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के अधिकारी से नए आइडिया के बारे में बात करने के लिए चले जाते हैं.

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