'अत्याचार की कोई भी घटना समाज, देश पर कलंक है'

  • 1 दिसंबर 2015
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 'अत्याचार की कोई भी घटना समाज और देश पर कलंक है.'

राज्यसभा में असहिष्णुता पर बहस का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि '125 करोड़ भारतीयों में से किसी की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता और किसी से देशभक्ति का सर्टिफ़िकेट मांगने की ज़रूरत नहीं है.'

उन्होंने कहा, ''सरकार हर साल संविधान पर चर्चा नहीं कराना चाहती है. इस साल बाबा साहब अंबेडकर की 125वी जयंती के मौके पर हम सभी संविधान निर्माताओं को नमन कर रहे हैं."

मोदी ने कहा,"संविधान ही हमें जोड़ सकता है. कभी ऐसा लग सकता है कि चुनकर ये कैसे लोग आ गए, ये तो गड़बड़ हो गई है, लेकिन ऐसे समय में संविधान ही हमारा मार्गदर्शक है.

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ग़ौरतलब है कि असहिष्णुता के मुद्दे पर जहाँ प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में बहस के समापन के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष में सहयोग की बात कही, वहीं गृह मंत्री राजनाथ सिंह इसी मुद्दे पर लोकसभा में बहस के ओर ख़ूब आक्रामक नज़र आए.

मोदी सरकार को राज्यसभा में बहुमत हासिल नहीं है और सरकार के कई बिल लंबित पड़े हैं. जानकार मोदी के राज्यसभा में नरम रवैये को इसी संदर्भ में देख रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा, ''संविधान बनाने में योगदान देने वाले सभी दलों के लोगों के योगदान को याद करना चाहिए."

महत्वपूर्ण है कि लोकसभा में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बहस के दौरान कहा था कि संविधान बनाने में जिनकी कोई भूमिका नहीं थी वो आज संविधान पर बहस करवा रहे हैं.

किसी का नाम लिए बिना, मोदी ने कहा, "करत-करत अभ्यास, जड़मति होत सुजान.' संविधान ही हम और तुम की भावना से बाहर निकाल सकता है. हम पक्ष-विपक्ष, पक्ष-विपक्ष करते रहते हैं, कभी निष्पक्ष भी तो होना चाहिए."

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राज्यसभा के महत्व पर बात करते हुए मोदी ने पंडित नेहरू के एक भाषण को याद किया और कहा कि 'हमारे संविधान का सफल क्रियान्वयन लोकतांत्रिक व्यवस्था की भांति, दोनों सदनों के सहयोग पर निर्भर है."

मोदी ने बाबा साहब अंबेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा,''समाज को बुराइयों से छुटकारा दिलाने की कोशिश करनी होगी. संविधान हमें समता की ताकत देता है, समाज को समझना होगा कि समता के साथ ममता भी ज़रूरी है.''

उन्होंने कहा, ''अभी भी देर नहीं हुई है. करोड़ों युवाओं के देश को निराश होने की ज़रूरत नहीं है.''

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