जब घर में सात फ़ुट तक पानी भर गया...

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कोई भी बदतर हालात को एक या दो बार तो झेल सकता है लेकिन अगर एक महीने में चार बार हालात ख़राब हो जाएं तो सब्र टूटना लाज़िम है.

चेन्नई के लोगों के साथ ऐसा ही हुआ. नवंबर के पहले सप्ताह से लेकर, पिछले दो दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश के कारण यह शहर चार बार बाढ़ जैसे हालात का शिकार हुआ है.

बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए सेना और नौसेना की भी मदद ली जा रही है. सड़कें पानी में डूबी हुई हैं, बाढ़ का पानी एयरपोर्ट के रनवे पर आ गया है और रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं.

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लेकिन ऐसी बार-बार आने वाली बारिश ने शहर के बाशिंदों को सोचने पर मजबूर ज़रूर कर दिया है.

एक मल्टीनेशनल कंपनी में अधिकारी राहुल गोपीनाथन वेलाचेरी के ग्राउंड फ़्लोर वाले अपने फ़्लैट में रहते थे.

उन्होंने नवंबर से अब तक चार बार हुई बारिश में एक फ़ुट से लेकर छह फ़ुट तक पानी भरता हुआ देखा. इस बारिश में उनके घर का अधिकांश सामान नष्ट हो गया.

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गोपीनाथन ने बीबीसी हिंदी को बताया, “नवंबर के पहले सप्ताह में हुई पहली बारिश में अपने पूरे परिवार के साथ मैंने घर छोड़ दिया क्योंकि पूरे घर में पानी भर गया था और जल स्तर एक फ़ुट के ऊपर बढ़ रहा था.”

वो बताते हैं, “दूसरी बारिश में घर में जल स्तर तीन फ़ुट तक पहुंच गया, इसलिए मैंने कुछ और सामान फ़्लैट से बाहर निकाल लिया.”

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इसके बाद हर बारिश का साथ उन्होंने कुछ न कुछ सामान घर से बाहर शिफ़्ट किया. लेकिन वो इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फ़र्नीचर घर से बाहर नहीं ले जा पाए क्योंकि पानी का स्तर कम नहीं हो रहा था.

वो कहते हैं, “अब ये सब बीत चुका है. दोनों काउचों को फेंकना है, फ़्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बेकार हो गए हैं. और अब तो एयर कंडीशनर भी बेकार हो गया क्योंकि मंगलवार की बारिश में पानी सात फ़ुट तक पहुंच गया.”

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वेलाचेरी के अपने फ़्लैट से आठ किलोमीटर दूर चूरलैमेडू में उन्होंने अपनी बहन के घर पर पनाह ली है, जहां पिछली बारिश में भी बहुत पानी नहीं जमा हुआ और सुबह दूध लाने के लिए उन्हें एक या दो फ़ुट पानी में ही जाना पड़ा.

गोपीनाथन ने कहा, “घर के दूसरी तरफ़, पानी का स्तर लगभग पांच फ़ुट था. मुझे वाक़ई नहीं पता कि इस पर क्या कहा जाए.”

मंगलवार की रात एयरपोर्ट पर फंस जाने के बावजूद अर्णव मुखर्जी का अनुभव कुछ अलग ही था.

वो एक मीटिंग के सिलसिले में कोलकाता जा रहे थे और जब वो एयरपोर्ट पहुंचे, उन्हें लगा कि कुछ समस्या आने वाली है.

मुखर्जी ने बताया, “हमने देखा कि एयरपोर्ट पर पानी का स्तर बढ़ रहा है. उस समय रनवे पर दो से तीन फ़ुट तक पानी रहा होगा. इसके बावजूद हमें बताया गया कि उड़ान की अभी भी संभावना है. अंततः यह रद्द हो गई. लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और घर लौटने का कोई रास्ता नहीं था.”

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इसलिए, मुखर्जी एयरपोर्ट पर ही रुक गए और क़रीब सुबह सात बजे घर वापस आने के बारे में विचार किया.

वो बताते हैं, “यह जोख़िम उठाने जैसा था. आख़िरकार मैं अपने घर की ओर चल पड़ा और सुरक्षित पहुंच गया. लेकिन रास्ते में जो कुछ दिखा वो बहुत निराशाजनक था. हालांकि मेरा घर समंदर के पास है, लेकिन ताज्जुब की बात है कि वहां बहुत पानी नहीं जमा था.”

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