बैंक जिसमें 18 साल से बड़े नहीं होते ग्राहक

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"जब मैं छोटी थी तो कभी मेरे माता-पिता और कभी मेहमान मेरे हाथों में पैसे रखते थे. मैं उससे कभी आइसक्रीम या कभी कुछ और चीज़ ले आती थी. जब मैं आठवीं कक्षा में थी तब किसी ने मुझे बाल गोपाल बैंक के बारे में बताया और मैंने पिताजी को. कुछ दिन बाद बैंक अधिकारी मेरे घर आए और मुझे नियमित रूप से बचत करने के फ़ायदे समझाए. उन्होंने मेरा बैंक में खाता भी खोला. मुझे पता नहीं था कि एक छोटी सी शुरूआत मुझे यहां तक ले आएगी."

गुजरात के साबरकांठा में रहने वाली जीनल पटेल आज इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष की छात्रा हैं.

वह बताती हैं कि जब उन्हें इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेना था, तब उनके पिताजी के पास पैसे नहीं थे. उस समय बाल गोपाल बैंक में उनकी बचत के कारण उन्हें पांच लाख रुपये का लोन मिला.

देश का यह पहला बैंक है, जिसके खातेदारों की आयु शून्य से लेकर 18 साल के बीच है. सात हज़ार खातेदारों वाले इस बैंक की जमा राशि आज साढ़े तीन करोड़ रुपये है.

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गुजरात के साबरकांठा और अरवल्ली ज़िले में काम कर रहे बालगोपाल कोऑपरेटिव बैंक के फ़ाउन्डर और चेयरमैन अश्विन पटेल ने बीबीसी को बताया कि बैंक की शुरुआत कैसे हुई.

वह कहते हैं, "कुछ साल पहले एक परिचित के घर जाना हुआ. वहां देखा कि छोटे से बच्चे के हाथ में किसी ने पैसे रखे और वह तुरंत कुछ खाने की चीज लेकर आ गया. तभी मेरे मन में विचार आया कि बच्चों में बचत की भावना होनी चाहिए, जो नियमित रूप से बढ़े और भविष्य में ज़रूरत पड़ने पर बच्चे या उनके माता-पिता के काम आए."

पांच बच्चों से शुरू हुआ बाल गोपाल कोऑपरेटिव बैंक आज इन ज़िलों के घर-घर तक पहुंच गया है. बैंक बच्चों को एक ख़ास क़िस्म की बचत पेटी देता है.

हर महीने बैंक का कलेक्शन एजेन्ट घर आता है, जो बच्चे और माता-पिता की उपस्थिति में पेटी खोलता है और उसमें से निकलने वाले पैसे की पास बुक में एन्ट्री करता है. इस जमा पर बैंक सालाना आठ प्रतिशत ब्याज भी देता है. ज़रूरत पड़ने पर जमा राशि के 80 प्रतिशत तक ओवरड्राफ़्ट भी दिया जाता है.

बैंक से लोन लेने वाले दीपक दवे ने बीबीसी को बताया कि उनके बेटे ध्रुव का बैंक में खाता था. जब उसे इंजीनियरिंग कॉलेज की फ़ीस भरनी थी तो बैंक ने पचास हज़ार का लोन दिया था.

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बैंक की अस्सी से ज्यादा कलेक्शन एजेंट हाउस वाइफ़ हैं, जिन्हें कलेक्शन पर चार प्रतिशत कमीशन भी दिया जाता है. इस बैंक का खातेदार जब 18 साल का होता तो उसे जमा राशि ब्याज सहित लौटा दी जाती है.

अश्विन पटेल ने बताया कि बैंक के पास जो जमा राशि है, उसमें से आधे को सरकारी बॉन्ड में लगाया जाता है और बाकी की रकम लोन के तौर पर बैंक के पास रहती है. वह अब इस बैंक का विस्तार पूरे गुजरात में करने का प्रयास कर रहे हैं.

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