आर्किटेक्ट बनते-बनते बन गईं चित्रकार

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पूजा इरन्ना को कंटेम्पररी आर्टिस्ट के तौर पर जाना जाता है. पूजा का जन्म दिल्ली में हुआ. इनके माता-पिता रामेश्वर और शोभा ब्रूटा दोनों जाने-माने चित्रकार हैं.

बचपन से ही रंगों और चित्रों के बीच बड़ी हो रही पूजा ने उन दिनों दिल्ली में तेज़ी से हो रहे बदलाव को महसूस किया.

अपने आसपास बन रही इमारतों ने पूजा को बहुत आकर्षित किया और आगे चलकर उन्होंने इसी विषय को अपने कलाकर्म के लिए चुना.

दस साल तक भरतनाट्यम का प्रशिक्षण लेने वाली पूजा कभी आर्किटेक्ट बनना चाहती थीं पर आगे चलकर उन्होंने चित्रकला का चुनाव किया.

माता-पिता के सुझाव पर उन्होंने पहले फाइन आर्ट में पढ़ाई करना तय किया और दिल्ली कॉलेज ऑफ़ आर्ट से चित्रकला में स्नातक किया.

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Image caption उन्होंने अपनी कला अभिव्यक्ति के लिए अलग माध्यम चुना और उस पर अडिग रहीं. उनके पति आर इरन्ना भी कलाकार हैं. पूजा ने कई माध्यमों में काम किया जिनमें वॉटर कलर, मिक्स मीडिया, विज़ुअल ग्राफ़िक्स, फोटोग्राफ़ी, वीडियो प्रेज़ेंटेशन, डिजिटल वर्क और स्कल्पचर शामिल हैं.
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Image caption पूजा कहती हैं प्रसिद्ध कलाकारों के बच्चों को अपनी अलग पहचान बनाने के लिए सामान्य से अधिक संघर्ष करना पड़ता है. इनकी कृतियां भारत व अन्य देशों में कई संग्रहालयों व आर्ट गैलरी के निजी संग्रह का हिस्सा हैं.
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Image caption उन्हें नए प्रयोग पसंद है. इसके चलते वो आजकल स्टेपल पिन से इमारतों का इंस्टालेशन बना रही हैं. पूजा अब तक कई एकल व समूह प्रदर्शनियों में भाग ले चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार हैं.
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Image caption पूजा ने अपनी कलायात्रा में कई संघर्षों का सामना किया और अपनी अभिव्यक्ति के लिए नई भाषा गढ़ी. पूजा दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहती हैं.
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Image caption एक कलाकार के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वो किस तरह अपने आसपास के वातावरण को और उसमें होने वाले बदलावों को देखता है.
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Image caption बतौर कलाकार उन्होंने वर्षों से चले आ रहे ट्रेंड को अपनाने के बजाए अपने लिए चुनौती भरा रास्ता चुना और उसमें कामयाब भी हुईं.
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Image caption पूजा को शुरू में अपना विज़न माता-पिता व शिक्षकों को समझाने में वक़्त लगा क्योंकि उस दौर में इस तरह के काम की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था.
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Image caption पूजा कलाकार होने के साथ गृहणी भी हैं और मानती हैं कि अगर स्त्री चाहे तो पारिवारिक ज़िम्मेदारी निभाते हुए अपनी कला के साथ तालमेल बिठा सकती है.
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Image caption पूजा का मानना है कि आस पास लगातार बदलाव हो रहे हैं और यही बदलाव वो अपनी कला के ज़रिए दिखाने की कोशिश करती हैं. उनको 2002 में 'चार्ल्स वालस इंडिया ट्रस्ट अवॉर्ड', 2009 में 'आउटस्टैंडिंग वुमन अचीवर्स अवॉर्ड' से सम्मानित किया जा चुका है.

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