संघ चाहता है मुसलमानों के बड़े परिवार का हल

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अजमेर में हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच में मुस्लिम औरतों की तालीम, तलाक़ और परिवार छोटा कैसे हो, ये सभी मुद्दे छाए रहे.

मुस्लिम मंच के यासिर अली जिलानी मुसलमानों में जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर मुफ़्ती और उलेमा से बैठक कर बड़े परिवार का हल निकालना चाहते हैं.

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जिलानी का कहना है, "तलाक़ और छोटे परिवार के बारे में क़ुरान में इंसानी तौर पर कोई बदलाव नहीं किया जा सकता पर 21वीं सदी के संदर्भ में हम कोशिश कर रहे हैं कि जो हमारे मौलाना हैं, मुफ़्ती हैं, उलेमा हैं, उनके साथ बैठकर बीच का कोई हल निकाला जाना चाहिए.''

उन्होंने बताया, "परिवार नियोजन जैसी चीज़ हमारे यहां नहीं है पर चूँकि यह मामला सेहत से जुड़ा है, तो मुस्लिम बहनों को शिक्षित ज़रूर कर रहे हैं."

उनका मानना है कि "डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया के दौर में मुस्लिम औरतों को 'खुदमुख़्तार' बनाने और जागरूक करने" की ज़रूरत है.

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संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने सम्मेलन के अंत में देश में जनसंख्या असंतुलन से पैदा हो रहे ख़तरे की बात की.

सम्मेलन में आईं बिहार की नाजमा और अमीना खातून, राजस्थान की रानी खान या शबाना और श्रीनगर की समाजसेवी तसनीम सभी को लड़कियों की तालीम की बात पसंद आई.

पर तलाक़ और परिवार कैसे छोटा हो, बात इसपर बार-बार घूमती रही.

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जम्मू-कश्मीर से आईं महिला आयोग की पूर्व सदस्य सचिव हाफ़िज़ा ने कहा, ''क़ुरान में लिखा है कि जब तलाक़ की बात आती है तो अर्श भी हिल जाता है, पर मुस्लिम महिलाओं को तलाक़, क़ानून, राज्य महिला आयोग के बारे में पूरी जानकारी ही नहीं है.''

छत्तीसगढ़ की सीमा मेमन का कहना था कि क़ुरान से हटकर तो कुछ नहीं हो सकता, पर लड़कियों की तालीम से ज़रूर हालात बदले जा सकते हैं.

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