मोदी और नवाज़ की 'गुप्त बैठक' का रहस्य

इमेज कॉपीरइट MEA India

फ्रांस की राजधानी पेरिस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ से मुलाक़ात की. ये मुलाक़ात ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच रिश्तों में गतिरोध जारी है.

इसके बाद से भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों की ऐसी ही एक और मुलाक़ात का जिक्र छिड़ गया है.

भारतीय पत्रकार बरखा दत्त ने इस सप्ताह सामने आने वाली अपनी किताब में दावा किया है कि नेपाल की राजधानी काठमांडू में सार्क प्रमुखों की बैठक के मौके पर मोदी और शरीफ के बीच गुप्त बैठक हुई थी.

लेकिन पाकिस्तान और भारत दोनों ने इस गुप्त बैठक से इनकार किया है.

पाकिस्तान सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और नरेंद्र मोदी के बीच काठमांडू में एक घंटे लंबी गुप्त बैठक के बारे में भारतीय मीडिया में छपी रिपोर्टें बिलकुल निराधार हैं.

इमेज कॉपीरइट Reuters

किताब में दावा किया गया है "एक साल पहले टीवी कैमरों की नज़र में दोनों नेताओं ने सिर्फ हाथ मिलाया, लेकिन कैमरे से छिपकर उन्होंने मुलाक़ात की. इस कथित मुलाक़ात करवाने में शरीफ परिवार से करीबी रिश्ता रखने वाले इस्पात उद्यमी सज्जन जिंदल ने अहम भूमिका निभाई."

भारतीय उद्यमी सज्जन जिंदल के बारे में किताब में बताया गया है, "जिंदल स्टील के बड़े निर्माता हैं और कांग्रेस के पूर्व सदस्य नवीन जिंदल के भाई हैं."

इमेज कॉपीरइट AFP

भारतीय पत्रकार ने अपनी किताब में लिखा है कि "कठिन परिस्थितियों में दोनों नेताओं की मुलाक़ात में सज्जन जिंदल ने पुल का काम किया."

अंग्रेज़ी दैनिक 'द हिंदू' में छपी इस खबर का भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी खंडन किया है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, "ये सूचनाएं बिल्कुल बेबुनियाद हैं और सार्क बैठक के दौरान कोई मुलाक़ात नहीं हुई."

मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में नवाज शरीफ ने शिरकत की थी और कहा था कि बातचीत दोनों देशों के हित में है.

इमेज कॉपीरइट AFP

बरखा दत्त ने लिखा है, "यह कोई ढकी-छिपी बात नहीं है कि भारत के इस्पात उद्यमी दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध चाहते हैं. अगर संबंध सुधरते हैं तो वे अफ़ग़ानिस्तान से कच्चा लोहा पाकिस्तान के रास्ते भारत ला सकते हैं."

काठमांडू में इस 'गुप्त बैठक' का हालाँकि भारत और पाकिस्तान दोनों ने खंडन किया है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि हाल ही में पेरिस में जलवायु परिवर्तन पर हुए सम्मेलन में मोदी और नवाज़ शरीफ की मुलाक़ात से दोनों देशों के ठंडे रिश्तों में गर्मी आई है. और संभवतः इस बैठक में भी 'जानकारों' ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार