मंत्री और नौकरशाह में पटरी क्यों नहीं बैठती?

  • 5 दिसंबर 2015
हरियाणा के मंत्री अनिल विज और फतेहाबाद की पूर्व एसपी संगीता कालिया इमेज कॉपीरइट
Image caption हरियाणा के मंत्री अनिल विज और फतेहाबाद की पूर्व एसपी संगीता कालिया.

हरियाणा के मंत्री अनिल विज और फतेहाबाद की पूर्व एसपी संगीता कालिया के बीच हाल ही में सामने आया कहासुनी का मामला नया नहीं है.

इससे पहले भी मंत्रियों और और नौकरशाहों के बीच अंतरविरोध कई बार सामने आ चुका है.

कुछ समय पहले हरियाणा के ही एक आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने रॉबर्ट वाड्रा के कथित अवैध भूमि सौदे उजागर किए थे जिसके बाद उनका कई बार ट्रांसफर किया गया.

इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका का 22 साल में 46 बार ट्रांसफ़र हुआ था.

आख़िर इस तरह के अंतरविरोधों की वजह क्या है?

अनिल विज और संगीता कालिया वाले मामले पर पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम कहते हैं, "वो दिखाना चाहते थे कि वो हीरो हैं और अवैध शराब की सप्लाई एसपी की लापरवाही के कारण हो रही है."

वो कहते हैं, "उन्होंने अफसर पर दोष लगाया कि यह सब उनकी वजह से हो रहा है. जिसके जवाब में महिला अफसर ने उनको जवाब दिया और कहा कि ये सरकार की नीति है मेरी नहीं."

इमेज कॉपीरइट AFP

सुब्रमण्यम ने कहा, "वो उम्मीद कर रहे थे कि एसपी चुपचाप रहेंगी और उनके आरोपों को सुनती रहेंगी. लेकिन उन्होंने पलटकर जवाब देते हुए कहा कि नहीं हम पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं."

लेकिन क्या शिष्टाचार और निरादर के बीच फर्क नहीं होना चाहिए?

इसके जवाब में सुब्रमण्यम कहते हैं, "होता है बिल्कुल होता है. मंत्री का जो लहज़ा था वो बहुत ही आक्रामक था. आप किसी भी अधिकारी को इस तरह से 'गेट आउट' नहीं कह सकते."

इमेज कॉपीरइट anil vij facebook

संगीता कालिया के समर्थन में वो कहते हैं, "वो कानूनी तौर पर वहां थीं और अपना काम कर रही थीं. अगर कोई अपना पक्ष रखे तो उसे 'गेट आउट' कहना कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता."

सुब्रमण्यम अधिकारी के ट्रांसफर को भी ग़लत मानते हैं.

वो कहते हैं, "2013 के सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार एक न्यूनतम कार्यकाल के बाद ही किसी अधिकारी का ट्रांसफर किया जा सकता है. लेकिन इस मामले में इसका पालन नहीं हुआ."

दूसरी तरफ पूर्व आईपीएस अधिकारी वाईपी सिंह का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों में भी भ्रष्टाचार की कमी नहीं है.

वो कहते हैं, "फतेहाबाद एसपी के साथ जो भी हुआ वो एकदम सही था. अगर कोई प्रशासनिक अधिकारी सार्वजनिक तौर पर कह रहा है कि वो अवैध शराब के धंधे नहीं रोक सकता तो मंत्री ने जो किया वो सही किया."

इमेज कॉपीरइट CG KHABAR
Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगवानी करते समय काला चश्मा लगाने वाले बस्तर के कलेक्टर अमित कटारिया को नोटिस जारी किया गया था.

वो कहते हैं, "मंत्री ने जब उनसे पूछा कि ग़लत धंधे क्यों नहीं बंद हो रहे तो उन्हें अपनी ग़लती माननी चाहिए थी. बजाय इसके वो खुद को सही ठहराने में लगी हुई थीं."

वाईपी सिंह का यह भी मानना है कि मंत्रियों को नौकरशाहों पर सख़्त रहने की ज़रूरत है.

वो कहते हैं, "अगर नौकरशाहों पर सख़्ती न की जाए तो वो भ्रष्टाचार में मंत्रियों से भी आगे निकल जाएं. उनका नाम मीडिया में इतना नहीं आता इसलिए वो बेखौफ़ भ्रष्टाचार करते हैं."

नौकरशाहों के बारे में वो कहते हैं, "हमारे संविधान के तहत उन्हें बहुत शक्तियां और सुरक्षा दी गई है. ऐसे में वो पूरी तरह से बेखौफ़ हो गए हैं."

(पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम और पूर्व आइपीएस अधिकारी वाईपी सिंह के साथ बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार