राहतकार्यों के लिए क्रेडिट लेने की होड़

  • 7 दिसंबर 2015
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बाढ़ से ग्रसित चेन्नई में हालात धीरे-धीरे बेहतर हो रहे हैं. पानी कम हो रहा है और कुछ सेवाएं भी शुरू हो गईं हैं. लेकिन अब राहत और बचाव कार्यों में लगी कई संस्थाओं के बीच क्रेडिट लेने की होड़ लग गई है.

सत्तारूढ़ एआईएडीएमके ने उन लोगों को चुनौती दी है जो उन पर राहत कार्यों में ढीलाई बरतने का आरोप लगा रहे हैं.

पार्टी ने इस बात के भी सुबूत मांगे हैं कि किसने मुख्यमंत्री के नाम पर क्रेडिट लेने की कोशिश की है ताकि उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा सके.

लोकसत्ता पार्टी के प्रवक्ता मगेश कुमार ने बीबीसी को बताया कि कई राहत शिविरों से इस तरह की ख़बरें आ रही हैं कि राहतसामग्री लिए उनके कार्यकर्ताओं को मंत्री के आने तक इंतज़ार करने के लिए कहा गया.

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मगेश का कहना था, ''पड्डीकुप्पम में हमारे कार्यकर्ताओं को कहा गया कि मंत्री जी के आने का इंतज़ार करें. लेकिन तीन-चार घंटे तक इंतज़ार करने के बाद भी मंत्री नहीं आए.''

इसी तरह की एक और घटना में राहत कार्यों में जुटी एक संस्था के एक कार्यकर्ता निकेश ने बीबीसी को बताया कि ''वाडापलानी के एक स्थानीय नेता ने कुछ ग़ैर-सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं को कहा कि लोग कोई भी खाद्य सामग्री और दूध का पैकेट स्वीकार नहीं करेंगे जब तक उन पर मुख्यमंत्री की तस्वीर ना हो.''

निकेश के अनुसार जब वे लोग वहां से जाने लगे तो बाढ़ पीड़ितों ने उस स्थानीय नेता के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्श किया जिसके बाद उस नेता को वहां से भागना पड़ा.

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लेकिन कोट्टरपुरम के मोहम्मद जान जैसे भी कुछ लोग हैं जो राहत कार्यों के लिए सारा क्रेडिट स्थानी काउंसलर को देते हैं.

काउंसलर के काम से ख़ुश होकर मोहम्मद जान ने नारा लगाते हुए कहा 'काउंसलर की जय'.

लेकिन एआईएडीएमके ने एक बयान जारी कर कहा कि पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं के लिए ऐसा कोई निर्देश नहीं जारी किया है कि राहत पैकेटों पर मुख्यमंत्री की तस्वीर लगाई जाए.

पार्टी ने कहा कि अगर इस तरह के प्रमाण मिलते हैं कि पार्टी उन लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करेगी जो मुख्यमंत्री का नाम बदनाम कर रहे हैं.

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