बांके बिहारी मंदिर के अधिग्रहण की तैयारी!

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Image caption मथुरा जिले में स्थित वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के लिए जुटे भक्त

उत्तर प्रदेश सरकार वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के अधिग्रहण की तैयारी कर रही है.

सरकार के धर्मार्थ कार्य विभाग का कहना है कि मंदिर की व्यवस्था के बारे में शिकायतें मिलने के बाद इस दिशा में पहल हुई है.

उधर, मंदिर को सरकारी नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया के विरोध में आंदोलन शुरू हो गया है. मंदिर के सेवायतों ने अनशन शुरू कर दिया है.

कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता और स्थानीय विधायक प्रदीप माथुर ने अधिग्रहण की कोशिश को 'महापाप' बताते हुए कहा है कि सरकार को इसका अधिकार नहीं है.

उत्तर प्रदेश सरकार फिलहाल वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की व्यवस्था देखती है. वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के साथ विंध्याचल के विंध्यवासिनी मंदिर के अधिग्रहण का भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है.

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Image caption ठाकुर बांके बिहारी मंदिर का मुख्य द्वार

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के अधिग्रहण के सवाल पर उत्तर प्रदेश धर्मार्थ कार्य विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने बीबीसी से कहा कि वहां यात्रियों के लिए समुचित सुविधाएं नहीं हैं.

उन्होंने कहा, "जब भी श्रद्धालु जाते हैं, उन्हें बहुत असुविधा होती है. बहुत शिकायतें सरकार के पास हैं. अधिग्रहण के जरिए मंदिर की आय को मंदिर के सुधार पर खर्च करने का प्रस्ताव है."

सहगल ने कहा, "अधिग्रहण के प्रस्ताव पर विचार हो रहा है. उन लोगों ने (मंदिर के सेवायतों ) हमसे संपर्क किया था. वो आकर अपनी बात रखना चाहते हैं. हमने उन्हें बुलाया भी है."

सहगल ने बताया कि अधिग्रहण का प्रस्ताव पहले कैबिनेट के सामने जाएगा और फिर क़ानून बनेगा, ये समय लेने वाली प्रक्रिया है.

क़रीब 151 साल पहले बने ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्था फिलहाल एक प्रबंध समिति देखती है.

समित में कुल सात सदस्य हैं. इनमें से चार सदस्यों का चयन मंदिर की सेवा में लगी राजभोग और शयन भोग शाखाओं से होता है.

हर शाखा से दो-दो सदस्य चुने जाते हैं. दोनों शाखाओं के चुने हुए सदस्य एक-एक बाहरी सदस्य चुनते हैं और चारों सदस्य मिलकर एक सदस्य चुनते हैं.

इन चुने हुए सात लोगों में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष चुना जाता है.

समिति का कार्यकाल तीन साल का होता है. समिति के मुताबिक़ मंदिर की कुल संपत्ति 90 से 95 करोड़ के बीच है.

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Image caption उत्तर प्रदेश सरकार के मंदिर अधिग्रहण प्रस्ताव के विरोध में प्रदर्शन करते सेवायत

मौजूदा समिति के अध्यक्ष नंद किशोर उपमन्यु मंदिर पर सरकार के नियंत्रण की कोशिश को ठीक नहीं मानते हैं.

वो कहते हैं, "सरकार के अधीन जितने विभाग हैं, उनमें से किसी से भी मंदिर की व्यवस्था की तुलना करा ली जाए, और अगर उससे सौ फीसदी बेहतर हो व्यवस्था, तो मंदिर प्रबंध समिति के पास रहना चाहिए और अगर उससे कम हो तो दे दिया जाए."

कथित अव्यवस्थाओं के सवाल पर उपमन्यु कहते हैं, "मंदिर में विश्व स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है. क्लोज सर्किट टीवी और कंट्रोल रूम है. ऐसी व्यवस्था बहुत कम मंदिरों में देखने को मिलेगी."

मंदिर के सेवायत भी अधिग्रहण की कोशिशों का विरोध कर रहे हैं. सेवायतों ने विरोध में मंदिर के बाहर क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है.

सेवायतों में से एक रजत गोस्वामी ने बीबीसी से कहा, "यदि सरकार को कोई समस्या है तो वो मैनेजमेंट कमेटी को बता सकती है कि वो किस तरह की व्यवस्था चाहती है. मंदिर निजी संपत्ति है, यहां के गोस्वामियों की. करीब 150 साल पहले उन्होंने इसे अपने पैसों से बनवाया है."

वो कहते हैं, "ये सरकारी क्षेत्र में चला जाएगा तो इसकी भी वही स्थिति हो जाएगी जो यहां के अस्पतालों और सड़कों की है. एक तरफ सरकार कोशिश कर रही है कि प्राइवेट सेक्टर को बढ़ाया जाए. ऐसे में मंदिर का अधिग्रहण उचित नहीं लगता है."

रजत गोस्वामी दावा करते हैं कि उन्हें श्रद्धालुओं का पूरा समर्थन मिल रहा है.

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Image caption सेवायतों के साथ धरने पर बैठे उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर

मथुरा-वृंदावन क्षेत्र के विधायक प्रदीप माथुर भी सेवायतों के समर्थन में हैं.

प्रदीप माथुर का कहना है, "मैंने मुख्य सचिव से वार्ता कर उनकी (गोस्वामियों की) भावनाओं से अवगत कराया. सरकार को अधिग्रहण का अधिकार नहीं है. वो यहां की व्यवस्थाओं को सुचारू रुप से चलाने में सहयोग करे. यहां जो गलियां बनी हुई हैं आसपास उनका जीर्णोद्धार कराए. प्रकाश व्यवस्था कराए.सफाई कराए."

माथुर कहते हैं कि वो इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात करेंगे.

उन्होंने कहा, "मथुरा-वृंदावन में संत समाज की बैठक हो गई है. जन सैलाब अधिग्रहण के विरोध में है. मैं भी अपने आपको संबद्ध करता हूं. हम मुख्यमंत्री से भी इस संदर्भ में मुलाकात की कोशिश करेंगे और बांके बिहारी के भक्तों और यहां के गोस्वामियों के विचार से उन्हें अवगत कराएंगे कि बांके बिहारी का अधिग्रहण करना महापाप होगा."

विरोध-प्रदर्शन को लेकर नवनीत सहगल ने कहा कि सरकार को व्यापक हित देखना है और लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखना है.

उन्होंने कहा कि मंदिर में जो भी पुजारी हैं, उन्हें समायोजित किया जाएगा.

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