बैठक अफ़ग़ानिस्तान पर, नज़रें भारत-पाक पर

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भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान पर हो रही बैठक में हिस्सा लेने इस्लामाबाद जा रही हैं, लेकिन इस दौरान भारत-पाक रिश्ते ही ज़्यादा चर्चा रहेगी.

अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों ने राष्ट्रपति अशरफ गनी के इस सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि की है. वो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के साथ सम्मेलन की संयुक्त रूप से अध्यक्षता करेंगे.

लेकिन मीडिया का आकर्षण होंगी भारतीय विदेश मंत्री, क्योंकि उनकी इस यात्रा से दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध को तोड़ने की उम्मीद लगाई जा रही है.

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सुषमा स्वराज की प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और उनके विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज़ से होने वाली मुलाक़ात का एजेंडा तय करने के लिए भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रविवार को बैंकॉक में बैठक कर चुके हैं.

हालांकि पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर होने वाले 'हर्ट ऑफ एशिया' सम्मलेन में शामिल होने का न्यौता सुषमा स्वराज को कुछ हफ़्ते पहले दिया था. लेकिन उनके भाग लेने की पुष्टि सम्मेलन से एक दिन पहले सोमवार को हुई.

सितंबर 2012 में तत्कालीन विदेश मंत्री एसएम कृष्णा की यात्रा के बाद यह किसी भारतीय विदेश मंत्री की पहली पाकिस्तान यात्रा है.

दोनों देशों के विदेश सचिवों ने बैंकॉक में मुलाक़ात की थी. उनका इस्लामाबाद में भी मिलने का कार्यक्रम है.

बैंकॉक में दोनों देशों के एनएसए की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान के मुताबिक़ वार्ता के दौरान सुरक्षा, आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई.

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भारतीय मीडिया में आई ख़बरों में 'आतंकवाद' को बैंकॉक में हुई बैठक का मुख्य विषय बताया गया. वहीं पाकिस्तानी मीडिया ने संयुक्त बयान में कश्मीर मुद्दे को शामिल करने को महत्वपूर्ण बताया.

पाकिस्तानी अंग्रेजी अख़बार 'डॉन' के सात दिसंबर के अंक की सुर्खी थी, ' एनएसए की बैठक में भारत को कश्मीर मुद्दे पर वार्ता के लिए राज़ी कर लिया गया.'

भारत और पाकिस्तान के एनएसए की बैठक, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा को नवाज शरीफ और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेरिस में हुई मुलाक़ात का नतीजा बताया जा रहा है.

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माना जाता है कि ब्रिटेन और अमरीका ने मोदी और नवाज़ शरीफ़ पर दबाव डाला है कि वो सभी लंबित मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाएं.

पिछले साल भारतीय आम चुनावों में भाजपा को मिली प्रचंड सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में गतिरोध आ गया था.

नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए नवाज़ शरीफ़ ने भारत का दौरा किया था. लेकिन उनकी इस यात्रा के बाद भी दोनों देशों के बीच शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई.

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