सालभर में कैसे लौटी अश्विन की लय?

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दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ हाल में हुई टेस्ट सिरीज़ में आर अश्विन ने चार टेस्ट की सात पारियों में महज़ 11 की औसत से कुल 31 विकेट लिए.

अश्विन ने इस दौरान 164.4 ओवरों की गेंदबाज़ी की और उनकी इकॉनमी 2.09 रही. इस शानदार गेंदबाज़ी के चलते वे टूर्नामेंट में 'मैन ऑफ़ द सिरीज़' आंके गए.

इस प्रदर्शन के चलते वे आईसीसी की टेस्ट गेंदबाज़ी रैंकिंग में दूसरे पायदान पर पहुंच गए.

नंबर वन गेंदबाज़ डेल स्टेन से अश्विन अब मामूली चार प्वाइंट्स के अंतर से पीछे हैं. जबकि ऑलराउंडरों की सूची में वे शीर्ष पर हैं.

इससे पहले अगस्त, 2015 में श्रीलंकाई मैदानों पर खेली गई सिरीज़ में उन्होंने तीन टेस्ट में 21 विकेट चटकाए थे. बांग्लादेश के ख़िलाफ़ जून, 2015 में इकलौते टेस्ट की पहली पारी में भी अश्विन ने पांच विकेट झटके थे.

अब थोड़ा पीछे चलते हैं. दिसंबर 2013 में यही अश्विन जोहानेसबर्ग में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ गेंदबाज़ी कर रहे थे.

दूसरी पारी में 36 ओवरों की गेंदबाज़ी में उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिली. वे पहली पारी में सिर्फ़ छह ओवर की गेंदबाज़ी कर पाए थे. यानी 42 ओवरों की गेंदबाज़ी के बाद उन्हें कोई विकेट नहीं मिला.

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फिर अगस्त 2014 में इंगलैंड दौरे पर अश्विन दो टेस्टों में क़रीब 36 ओवरों की गेंदबाज़ी के बाद सिर्फ़ तीन विकेट चटका पाए थे.

दिसंबर 2014 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भी वे संघर्ष करते दिखे. तीन टेस्ट में क़रीब 172 ओवरों की गेंदबाज़ी के बाद भी उन्हें बस 12 विकेट मिल पाए.

यह वह दौर था जब अश्विन की गेंदबाज़ी को लेकर कई आशंकाएं जताई जाने लगी थीं. टीम में उनका स्थान संकट में था. टीम में उनके रहने को चेन्नई कनेक्शन से जोड़कर देखा जाने लगा था.

यही वह समय भी था जब वे अपनी गेंदबाज़ी में काफ़ी प्रयोग कर रहे थे. ज़्यादा कामयाबी के लिए वे कैरम बॉल और ड्रिफ़्टर का सहारा लेने लगे थे और यह प्रयोग अश्विन को रास नहीं आ रहा था.

हालांकि उन्हें भरोसा था कि उनकी गेंदबाज़ी पटरी पर लौट सकती थी और श्रीलंका के ख़िलाफ़ जुलाई-अगस्त 2014 की सिरीज़ से उन्होंने ख़ूब अभ्यास किया.

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एक ऑफ़ स्पिनर के बतौर वे बेसिक्स की तरफ़ लौटे. उन्हें अहसास हो गया था कि अगर ऑफ़ स्पिनर को अपनी ऑफ़ स्पिन पर विकेट नहीं मिलता तो किसी और गेंदबाज़ी से नहीं मिलेगा. उन्होंने ऑफ़ स्पिन पर ध्यान दिया.

इसके अलावा परंपरागत ऑफ़ स्पिनर की तरह उन्होंने फ़्लाइट के साथ स्पिन कराना शुरू किया. लंबाई का फ़ायदा उठाते हुए उन्होंने फ़्लाइट पर कंट्रोल भी रखा.

इन दो बुनियादी पहलुओं का उनकी गेंदबाज़ी पर साफ़ असर दिखा और इसके बाद वे सिर्फ़ सात टेस्ट में 57 विकेट चटका चुके हैं.

इतना ही नहीं इस साल वे सात बार पारी में पांच विकेट भी ले चुके हैं. एक साल में यह किसी भी भारतीय गेंदबाज़ का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है.

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