अपनी किताब में कौन सा धमाका करेंगे वंजारा

  • 9 दिसंबर 2015
डीजी वंजारा इमेज कॉपीरइट BHAREDRESH GUJJAR

फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामलों की वजह से चर्चित रहे गुजरात के सेवानिवृत्त आईपीएस अफसर डीजी वंजारा ने बीबीसी से कहा है कि वे अपनी किताब में कुछ धमाकेदार लिखने वाले हैं.

वंजारा बीते दस महीनों से मुंबई में रह रहे हैं. इसकी वजह ये है कि मुंबई और अहमदाबाद कोर्ट ने मुंबई से बाहर ना जाने की शर्त पर ही उन्हें ज़मानत पर छोड़ा है.

जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और अमित शाह राज्य के गृहमंत्री थे, तब डीजी वंजारा का दबदबा कुछ और ही था.

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उस वक्त वे अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और गुजरात चरमपंथ निरोधक दस्ते (एटीएस) के मुख्य अधिकारी थे.

उसी दौरान सोहराबुद्दीन शेख़ और इशरत जहां फ़र्ज़ी मुठभेड़ की वारदात हुई थी.

इन दोनों केस में पहले गुजरात पुलिस और बाद में सीबीआई ने अपनी जांच के दौरान गुजरात पुलिस को दोषी पाया था.

वंजारा एक मात्र ऐसे अफसर हैं जो इस मामले में सात साल से भी अधिक वक्त जेल में रहें. वे डीआईजी के पद से जेल में रहते हुए सेवानिवृत्त हो गए.

डीजी वंजारा ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने मुंबई में रहने वाली शर्त ख़त्म करने की लिए कोर्ट से गुहार लगाई है.

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Image caption इशरत जहां की मां

सोहराबुद्दीन केस में मुंबई कोर्ट ने और इशरत केस में अहमदाबाद कोर्ट ने वंजारा को ज़मानत दी है.

वंजारा ने अमित शाह का नाम लिए बिना बताया कि हमारे एक साथी पर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात जाने पर पाबंदी लगाई थी और वे दो साल दिल्ली में रहें, उन्होंने अपना रास्ता निकाल लिया. अब मुझे भी कुछ करना पड़ेगा.

हालांकि वंजारा और अमित शाह के संबंध पहले जैसे नहीं रहे क्योंकि वंजारा जब जेल में थे, तब उन्होंने नरेंद्र मोदी को एक खत लिखा था जिसमें उन्होंने गुजरात पुलिस की स्थिति को लेकर काफी नाराज़गी जताई थी और इसके लिए उन्होंने अमित शाह को जिम्मेदार माना था.

तब से लेकर आज तक वंजारा ऐसे पहले अधिकारी हैं जिन्होंने जेल में रहते हुए भी बगावत का झंडा उठा रखा था.

वंजारा अहमदाबाद की साबरमती जेल में थे, तब उन्होंने किताब लिखने की शुरुआत की थी.

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वंजारा के साथी रहे आईजीपी राजकुमार पांडियन और इंस्पेक्टर बालकृष्ण चौबे भी मुंबई में ही रहते हैं क्योंकि इन दोनों अफसरों को भी सुप्रीम कोर्ट से मिली ज़मानत में मुंबई में ही रहने का आदेश हैं.

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