चेन्नई में कबाड़ वालों को 'करोड़ों' की चपत

करीब 300 ऐसी दुकानें हैं जिनके अंदर और बाहर सिर्फ़ कबाड़ दिखाई दे रहा है जो पूरे पांच दिन तक बाढ़ के पानी में डूबा रहा. ये इलाका है चेन्नई का पुडापेट जहां महँगी कारों से लेकर टीवी-फ्रिज तक कबाड़ में मिलता है.

लेकिन बाढ़ के बाद अब यहाँ के दुकानदारों के लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा है क्योंकि बगल में बहती कूयूम नदी ने उनके कबाड़ को किसी लायक नहीं छोड़ा.

Image caption मोहम्मद इब्राहिम

बारिश बंद होने के बाद नदी का पानी अपने पुराने स्तर पर पहुँच चुका है लेकिन अभी इनकी दुकानों और सामान से कीचड़ हटाने की जंग जारी है.

मोहम्मद इब्राहिम ने बुधवार को एक हफ़्ते बाद दुकान खोली तो भविष्य की चिंता में डूब गए.

वे कहते हैं, "जब 15 फ़ुट पानी पीछे से आया तो हमारी दुकानों का पूरा सामान बर्बाद हो गया. यहाँ हमारे पास कारों के पुराने इंजन आते हैं जिनकी कीमत 60,000 से लेकर 70,000 रुपए तक मिल जाती है. लेकिन अब तो इन्हें लोहे के भाव ही बेचना पड़ेगा. कार कंपनियां भी हमारे बाज़ार में अपना पुराना सामान बेचती रहीं है. लेकिन सब बर्बाद हो गया."

यहां जितने भी दुकानदारों से बात हुई, लगभग सभी का मानना है कि "औसतन 10 से 20 लाख रुपए का निजी नुकसान हुआ है."

कबाड़ वालों की ये मार्केट चेन्नई में सबसे पुरानी और 'भरोसेमंद' बताई जाती है और यहाँ कारों से जुड़ा लगभग हर पुराना सामान मिल ही जाता है.

स्थानीय दुकानदार मोहम्मद सलीम के मुताबिक़, "बीएमडब्लू और मर्सिडीज़ तक के पुराने पुर्ज़े, इंजन, बंपर और बोनेट यहाँ मिलते हैं. लेकिन अब तो हम सभी को कर्ज़दार होना पड़ेगा."

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