वाराणसी के बच्चे मोदी से क्यों मिलना चाहते हैं?

  • 11 दिसंबर 2015
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शिवराम पाठक एक 'अनचाहे' काम में लगे हैं. वह वाराणसी में नरेंद्र मोदी के जनसंपर्क कार्यालय में काम करते हैं, जहां मोदी के क्षेत्र की जनता अपनी समस्याएं लाती है.

अगर आप उम्मीद कर रहे हैं कि यहां बहुत भीड़भाड़ होगी तो ऐसा नहीं है.

कार्यालय के बाहर पुलिस ने प्रदर्शन रोकने के लिए बैरिकेड लगा रखा है.

ज़िला जज ने कार्यालय के बाहर प्रदर्शन पर रोक लगा रखी है क्योंकि इससे जाम की नौबत आ जाएगी.

पाठक के पीछे मोदी का एक आदमक़द पोस्टर है, जिस पर स्वच्छ भारत से लेकर माय गवर्नमेंट तक मोदी की 10 योजनाओं का लोगो लगा है.

जो लोग यहां आते हैं उनकी शिकायतें बहुत बुनियादी होती हैं, जैसे बिजली, सड़क और पानी.

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पाठक सभी की मांगें पूरी नहीं कर सकते. यहां संघ परिवार के कार्यकर्ता भी किसी न किसी मदद के लिए आते हैं. पड़ोसी क्षेत्रों के लोग भी अपनी फ़ाइलें आगे बढ़ाने की सिफ़ारिश के साथ आते हैं और 2017 के विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी बनाए जाने की अर्ज़ी लेकर भी आने वालों की कमी नहीं है.

माथे पर सफ़ेद तिलक लगाए पाठक के चेहरे पर ठेठ आरएसएस कार्यकर्ता वाली मुस्कान रहती है.

इस तरह का तनावपूर्ण काम संभालने के लिए शायद इससे बेहतर कोई दूसरा तरीक़ा नहीं है.

हालांकि, इन दिनों वो अजीबोग़रीब अर्ज़ियों पर हैरान होने से खुद को रोक नहीं पाते, जैसे लोग अपने बच्चों की तरफ़ से अर्ज़ी दे रहे हैं कि जब भी प्रधानमंत्री आएं तो बच्चों से मिलने दिया जाए.

वाराणसी से सांसद मोदी शनिवार को क़रीब साढ़े चार घंटे वाराणसी में बिताने वाले हैं और उनके साथ जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो अबे भी होंगे.

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इतने कम वक़्त में, वाराणसी के कुछ चुनिंदा लोगों से ही उनके मिलने की संभावना है, क्योंकि ऐसा वह अपने हर दौरे पर करते हैं.

लेकिन इस बार, सुनील पारिख अड़े हैं कि पाठक मोदी को बताएं कि उनका बेटा सारंग पारिख उनसे मिलने चाहता है.

17 साल के सारंग 12वीं के छात्र हैं और उन्होंने वॉइस आर्टिफ़िशियल न्यूरो इंटरफ़ेस (VANI) नाम का एक उपकरण बनाया है.

सारंग कहते हैं कि यह विचारों को टेक्स्ट में टाइप कर सकता है.

बस आपको सोचना भर होगा और यह उपकरण आपके दिमाग को पढ़ लेगा और उसे टाइप कर देगा.

बहरापन और गूंगापन की विकलांगता के शिकार लोगों के लिए यह वरदान जैसा लगता है. इसे पेटेंट के लिए भेजा गया है.

थोड़ा ग़ुस्से में सुनील पारिख, शिवसरन पाठक से कहते हैं, ''हर बार आपने मुझसे वादा किया, लेकिन आप मेरे बेटे को मोदी से मिला नहीं पाए.''

इसके बाद वह मौक़े गिनाने लगते हैं.

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पाठक उन्हें बीच में टोकते हुए कहते हैं कि मोदी के उस दौरे को शामिल न करें, जो रद्द हो गया था.

पाठक कहते हैं, ''मैं अपनी तरफ से हर चंद कोशिश कर रहा हूँ. क्या आप इस काग़ज पर मिलने की वजह को संक्षिप्त में एक लाइन में लिख सकते हैं?''

सारंग के पिता वह एक लाइन लिखने की कोशिश में जुटे ही हैं कि एक दूसरे आदमी ने अपने मोबाइल फ़ोन पर संगीत बजाना शुरू कर दिया.

डॉक्टर डीपी गुप्ता हमें वो पांच गाने सुनाने पर तुले हैं, जो उनकी बेटी प्रियंका सहवाल ने लड़कियों के अधिकारों के बारे में गाए हैं.

कुछ ज़्यादा ही भावुक इन गानों में माँ को लेकर बहुत ज़ोर दिया गया है. इन्हें ठीक-ठाक म्यूज़िक के साथ स्टूडियो में रिकॉर्ड किया गया है.

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डॉ गुप्ता बताते हैं, ''मेरी बेटी बीएचयू से म्यूज़िक ऑनर्स में पहले साल की पढ़ाई कर रही है. वह अपना जीवन मोदी के 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान को देना चाहती है और मोदी से बहुत प्रभावित है.''

अभी गाना बज ही रहा है कि कार्यालय में मोदी से मिलने की अर्ज़ी के साथ केंद्रीय विद्यालय की ड्रेस पहने 12 साल के क्षितिज पांडे प्रवेश करते हैं.

पाठक उनसे पूछते हैं, ''आपके पापा कहां हैं?''

लिखित अर्ज़ी पकड़ाते हुए पांडे बताते हैं, ''वह बाहर इंतज़ार कर रहे हैं.''

थके लग रहे पाठक ने याद दिलाया, ''ओह, लेकिन पिछली बार तो आप उनसे मिल चुके हैं न?''

पाठक कहते हैं, ''मन की बात में आपका ज़िक्र आया था, यह ठीक नहीं है. बाकियों को भी मौक़ा मिलना चाहिए.''

जब पिछली बार सितंबर में मोदी ने वाराणसी का दौरा किया था, उन्होंने क्षितिज के साथ 12 मिनट बिताए थे और तकनीक के बारे में उनके नए विचार सुने थे और 'मन की बात' कार्यक्रम में तकनीक को लेकर उनके उत्साह का ज़िक्र भी किया था.

इसके बाद रातों रात क्षितिज सेलिब्रिटी बन गए.

बीएचयू में टेक्निशियन अपने पिता की मदद से सातवीं का यह छात्र अब फ़्री एनर्जी, भावनाओं वाला रोबोट और यहां तक कि न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी विकसित करने में लगा है.

उनको प्रधानमंत्री कार्यालय से फ़ोन भी आया था, जिसमें रिसर्च के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा गया था.

क्षितिज के साथ सोनम पटेल भी थीं, जिन्होंने बेहिचक अर्थ सहित भगवतगीता के श्लोक सुनाए थे. 'मन की बात' में उनका भी ज़िक्र हुआ था.

दोनों सेलिब्रिटी बच्चों ने वाराणसी के हर बच्चे में ऐसी ही प्रसिद्धि हासिल करने की चाहत पैदा कर दी है.

कुछ ऐसे बच्चे भी भाग्य आज़माने लगे हैं जिनके पास दिखाने के लिए कोई अनोखी या नई चीज़ नहीं है.

जैसे 17 साल के क्रिकेटर अभय कुमार. पाठक ने उनसे पूछा कि वह मोदी से क्यों मिलना चाहते हैं?

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कुमार बुदबुदाते हुए कहते हैं, ''क्रिकेट, मैं क्रिकेट खेलता हूँ.''

''ठीक है, लेकिन आप मोदी से क्यों मिलना चाहते हैं?''

''क्रिकेट के लिए.''

''क्रिकेट के बारे में क्या?''

''क्रिकेट के सामान के लिए.''

पाठक उन्हें बताते हैं कि कोई भी सामान पा सकता है, आप इसके लिए प्रधानमंत्री से क्यों मिलना चाहते हैं?

कुमार बस इतना कह पाते हैं, ''मैं उनसे मिलना चाहता हूँ.''

अपने से भी मज़बूत दावेदारों को देख झेंपे हुए कुमार आख़िर वहां से रुख़सत हो जाते हैं.

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