सीबीआई छापों के पीछे की बात और राजनीतिक मायने

  • 15 दिसंबर 2015
अरविंद केजरीवाल
Image caption अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई के छापों के बाद पीएम मोदी को कायर और मनोरोगी कहा है.

"राजेंद्र कुमार एक बहाना है. केजरीवाल असल निशाना है."

ये थे शब्द मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जो मंगलवार को दिल्ली सचिवालय के अंदर सीबीआई के छापे पर अपनी प्रतिक्रिया जता रहे थे. उनका दावा था कि सीबीआई ने उनके दफ़्तर पर छापे मारे हैं जबकि सीबीआई का कहना था कि एक वरिष्ठ अधिकारी के दफ़्तर पर छापा मारा गया.

केजरीवाल के अनुसार उनके नज़दीकी सरकारी अधिकारियों पर कार्रवाई करके केंद्रीय सरकार दिल्ली सरकार को कमज़ोर करना चाहती है. उनका ये भी दावा था कि प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी हार आज तक भूल नहीं सके हैं.

तो क्या अरविंद केजरीवाल के दावों में कोई दम है?

सीबीआई का कहना है कि छापे केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ़्तर में मारे गए. तकनीकी रूप से केजरीवाल और सीबीआई दोनों सही हैं. राजेंद्र कुमार और केजरीवाल के कमरे अंदर से एक दूसरे से जुड़े हैं. अगर कुमार के दफ्तर में छापा मारा जाए तो केजरीवाल के कमरे को सील करना पड़ेगा. सीबीआई ने ऐसा ही किया.

सीबीआई के अनुसार राजेंद्र कुमार के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोपों की छानबीन की जा रही है. सीबीआई ने कहा कि ये मामला 2007 से 2014 के बीच का है. दरअसल राजेंद्र कुमार ने 2002 में दिल्ली के स्कूलों में कंप्यूटर लाने की एक योजना बनाई थी जिसे 2007 के बाद लागू किया गया.

आरोप ये है कि उन्होंने ठेके जान-पहचान की एक कंपनी को दिए थे जिसके ख़िलाफ़ 2006 में शिकायत दर्ज की गई थी. लेकिन सीबीआई ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की थी.

इस साल 17 जुलाई को सरकारी अधिकारी आशीष जोशी ने राजेंद्र कुमार के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करायी थी. आशीष जोशी पहले दिल्ली सरकार में थे लेकिन इन दिनों वो केंद्र में सूचना और प्रसारण मंत्रालय में हैं.

जुलाई में उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. सवाल ये पैदा होता है कि अब सीबीआई अचानक से सक्रिय क्यों हो गई?

पिछले हफ़्ते केजरीवाल के एक क़रीबी सरकारी अधिकारी चेतन सांघी के ख़िलाफ़ एंटी करप्शन ब्यूरो ने कार्रवाई शुरू की थी. एंटी करप्शन ब्यूरो केंद्रीय सरकार के अंतर्गत है. सांघी एक ईमानदार अफसर माने जाते हैं. अपने ख़िलाफ़ कार्रवाई को वो अपनी तौहीन समझते हैं. निराश होकर उन्होंने अब 'सिक लीव' ले ली है.

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Image caption केजरीवाल ने कहा सीबीआई वित्त मंत्री अरुण जेटली से जुड़ी जांच की फ़ाइलें खोज रही थी.

सांघी वही अधिकारी हैं जिन्होंने डीडीसीए में भ्रष्टाचार के आरोपों पर हाल ही में एक रिपोर्ट तैयार की थी. अरविंद केजरीवाल के आदेश पर छान बीन के बाद ये रिपोर्ट तैयार की गई थी. केंद्रीय वित्ती मंत्री अरुण जेटली पिछले साल दिसंबर तक सालों से दिल्ली क्रिकेट बोर्ड से जुड़े रहे थे.

बिशन सिंह बेदी, विरेंद्र सहवाग और कीर्ति आज़ाद जैसे पुराने खिलाडियों ने बोर्ड में भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद के ख़िलाफ़ आवाज़ें उठायी थीं लेकिन कुछ हासिल न हुआ था. केजरीवाल ने इन आरोपों की छानबीन का ज़िम्मा सांघी को सौंपा था

पिछले महीने चेतन सांघी के ख़िलाफ़ एंटी करप्शन ब्यूरो ने विवेक गर्ग नाम के एक व्यक्ति की शिकायत पर कार्रवाई शुरू की थी. गर्ग बीजेपी की दिल्ली यूनिट के एक सक्रिय कार्यकर्ता हैं.

इस पृष्ठभूमि में अरविंद केजरीवाल ने अपने दावों को कई बार दुहराया है. मामले की तह तक पहुँचने में समय लगेगा लेकिन इस समय केंद्रीय सरकार की प्राथमिकता संसद में जीएसटी बिल पारित कराना है.

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Image caption डीडीसीए में कथित भ्रष्टाचार का मामला पहले भी उठता रहा है.

केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि विपक्ष संसद को न चलने देने के कई बहाने खोज रही है. उनका इशारा नेशनल हेरल्ड अख़बार वाले मामले में सोनिया गांधी और बेटे राहुल गांधी के ख़िलाफ़ कार्रवाई से संसद के दोनों सदनों में हंगामे की तरफ़ था.

इसके बाद दिल्ली की शकूर बस्ती में अवैध कच्ची बस्ती को हटाने और इस कार्रवाई में एक बच्चे की मौत के आरोपों पर संसद में शोर शराबे की तरफ़ भी उनका इशारा था.

मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव के कार्यालय पर सीबीआई के छापे से संसद में होने वाले हंगामे की तरफ़ भी उनका इशारा था.

जब बीजेपी सरकार जीएसटी बिल पास कराने में इतनी कठिनाइयों का सामना पहले से कर रही है तो एक और विवाद के खड़े होने से सरकार की मुश्किलें बढ़ेंगीं.

ताज़ा विवाद से केंद्र सरकार को कोई लाभ नहीं होगा लेकिन केजरीवाल खुद को "पीड़ित'" की तरह पेश करने में सफल हो सकते हैं.

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