क्या फ़ाइलों में जेटली पर आरोप हैं?

  • 16 दिसंबर 2015
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मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बुधवार को उपमुख्यमंत्री मनीष ससोदिया ने दावा किया कि सीबीआई ने मुख्यमंत्री के दफ़्तर में कुछ ख़ास फाइलें हासिल करने के लिए छापे मारे थे.

इनका मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजिन्दर कुमार से कोई संबंध नहीं था. सीबीआई के अनुसार छापे कुमार के दफ़्तर में मारे गए थे, मुख्यमंत्री के नहीं.

आम आदमी पार्टी के दोनों नेताओं के अनुसार दरअसल सीबीआई वो फाइलें हासिल करने आई थी, जिनमें दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन यानी डीडीसीए में भ्रष्टाचार से जुड़ी एक हालिया रिपोर्ट की कॉपी रखी थी.

वित्तमंत्री ने मंगलवार को संसद में कहा था कि सीबीआई ने मुख्यमंत्री के दफ़्तर में छापे नहीं मारे थे. केजरीवाल और सिसोदिया ने वित्तमंत्री पर संसद को गुमराह करने का इल्ज़ाम लगाया.

यह कहना मुश्किल है कि केजरीवाल और सिसोदिया के दावे किस हद तक सच पर आधारित हैं. लेकिन आइए उस रिपोर्ट पर निगाह डालें, जिसे कथित तौर पर सीबीआई टीम छापे के दौरान देखने आई थी.

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दिल्ली सरकार ने डीडीसीए में धांधली और भ्रष्टाचार के इल्ज़ाम की जांच के लिए एक तीन संसदीय समिति का गठन किया, जिसका नेतृत्व दिल्ली सरकार के विजीलेंस विभाग के चेतन सांघी ने किया था. सांघी ने हाल में अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसके एक हिस्से में उन्होंने डीडीसीए में घोटालों का खुलासा किया है और दूसरे में दिल्ली सरकार को सुझाव दिए.

रिपोर्ट की प्रमुख बातों पर एक नज़र:

1. अरुण जेटली दिल्ली क्रिकेट बोर्ड से सालों तक जुड़े रहने के बाद 2013 में इससे अलग हो गए. उनके तैनात किए कई अधिकारी अब भी वहां हैं. जांच रिपोर्ट में अरुण जेटली का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया है, पर रिपोर्ट में 2002 से अब तक हुई सभी संदिग्ध गतिविधियों की जांच की गई है

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2. डीडीसीए ने फ़िरोज़शाह कोटला के फिर निर्माण का फैसला लिया था, जो 2002 से 2007 तक चला. इसमें 24 करोड़ रुपए ख़र्च होने थे पर ख़र्च 114 करोड़ रुपए हुए. रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टेडियम के अधिकतर कामों के लिए टेंडर निकाले जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं है. इसके इलावा डीडीसीए ने अवैध रूप से स्टेडियम में 12 कॉर्पोरेट बॉक्स बनाए, जो उचित प्रक्रिया के बिना कंपनियों को लीज़ कर दिए गए

3. रिपोर्ट के अनुसार स्टेडियम के नवनिर्माण में शामिल अधिकतर कंपनियां डीडीसीए के अधिकारियों की 'फ्रंट' कंपनियां हैं, इसीलिए बजट जानबूझकर कई गुना बढ़ाया गया

4. डीडीसीए फ़िरोज़शाह स्टेडियम को शहरी विकास मंत्रालय से लीज़ पर लेकर चलाता है. इसके बदले डीडीसीए मंत्रालय को हर साल लगभग 25 लाख रुपए देता है. मगर मंत्रालय को आज की दर के मुताबिक़ 16 करोड़ रुपए सालाना मिलने चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार विवाद के कारण डीडीसीए के पास स्टेडियम चलाने के लिए कोई लीज़ फिलहाल नहीं है

चेतन सांघी समिति ने डीडीसीए में सुधार के कई सुझाव दिए:

1. डीडीसीए को निलंबित करना

2. डीडीसीए को पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ियों की समिति चलाए

3. यह रिपोर्ट जस्टिस लोढ़ा समिति के हवाले की जाए. सुप्रीम कोर्ट के कहने पर गठित जस्टिस लोढ़ा समिति ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड में सुधार के कई सुझाव दिए हैं.

4. दिल्ली सरकार को कमीशन ऑफ़ इन्क्वायरी बैठाने का सुझाव

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