निर्भया के 'नाबालिग़' अपराधी का क्या होगा?

  • 18 दिसंबर 2015
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Image caption अपराधी अब बालिग हो गया है.

दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले के मुताबिक़ साल 2012 में ज्योति सिंह के सामूहिक बलात्कार और हत्या का नाबालिग़ अपराधी, जो अब वयस्क हो चुका है, को 20 दिसंबर यानि रविवार को रिहा कर दिया जाएगा.

हालांकि ‘जुविनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटेक्शन रूल्स 2007’ के तहत अगर किसी नाबालिग की रिहाई की तारीख़ रविवार को पड़े, तो उसे एक दिन पहले रिहा किया जा सकता है.

नियमों के मुताबिक़ अगर रिहाई के व़क्त अपराधी का परिवार उसे लेने ना आए तो उसे एक सुधार गृह में भेजा जा सकता है.

साथ ही उसे पैसे कमाने के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण देने का फ़ैसला भी किया जा सकता है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘जुविनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटेक्शन रूल्स 2007’ का हवाला देते हुए कहा है कि रिहाई के बाद अपराधी के बारे में एक ‘इंडिविजुअल केयर प्लैन’ यानि समाज में दोबारा शामिल करने की योजना बनाई जाए.

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Image caption नाबालिग अपराधी को जुविनाइल क़ानून के मुताबिक़ सज़ा दिए जाने का काफ़ी विरोध हुआ था.

इस योजना को बनाने की प्रक्रिया अपराधी की सज़ा शुरू होने के एक महीने बाद से ही शुरू की जानी चाहिए. इसके लिए बाल कल्याण अधिकारी, काउंस्लिर और समाज सेवी फैसला करेंगे.

नियमों के मुताबिक़ इस योजना को बनाने में अपराधी की सलाह भी ली जानी चाहिए. योजना रिहाई को दो साल बाद तक की मियाद पर लागू होगी.

योजना के तहत नाबालिग़ की रिहाई से पहले और बाद में उसके सुधार और समाज में शामिल करने के लिए ज़रूरी कदमों पर सहमति बनाई जाएगी.

नियम 55 के तहत बनाई गई एक मैनेजमेंट कमेटी इस योजना की हर चार महीने में समीक्षा करेगी और ये भी तय करेगी कि रिहाई के वक्त अपराधी को सुधार गृह में भेजा जाए या उसके अभिभावकों को सौंपा जाए.

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दिल्ली हाई कोर्ट के सामने सुब्रहमण्यम स्वामी ने याचिका दायर कर मांग की थी कि नाबालिग़ अपराधी को रिहा ना किया जाए.

लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि, “क़ानून में जुवेनाइल अपराधियों के सुधार का प्रावधान है पर अगर अपराधी में कोई सुधार न हो, तो ऐसे में सज़ा बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है.”

हालांकि कोर्ट ने याचिका में उठाए गए इस मुद्दे पर विस्तृत तरीक़े से सुनवाई करने के लिए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और जुनिनाइल जस्टिस बोर्ड से 28 मार्च तक जवाब मांगा है.

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