जुवेनाइल की रिहाई पर हाईकोर्ट का रोक से इंकार

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दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्भया मामले में नाबालिग़ अपराधी की रिहाई पर रोक लगाने से मना कर दिया है.

अदालत ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि नाबालिग़ अपराधी को पहले से तय समय के मुताबिक़ ही 20 दिसंबर को रिहा किया जाएगा और उसे सज़ा की मियाद से ज़्यादा समय तक सुधार गृह में नहीं रखा जा सकता है.

कोर्ट का कहना था कि मौजूदा क़ानून में इसी तरह का प्रावधान मौजूद है.

निर्भया की मां आशा सिंह ने कहा कि उन्हें इंसाफ़ नहीं मिला है.

आशा सिंह ने कहा कि उन्हें जो आश्वासन मिला था वो पूरा नहीं हुआ. इतना क्राइम करने वाले मुजरिम को आख़िरकार कोर्ट और सरकार ने छोड़ दिया.

अदालत ने साथ ही यह भी कहा कि एक मैनेजमेंट कमेटी बनाई जाएगी जो तय करेगी कि उन्हें कहां और कैसे रखना चाहिए.

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कमेटी इसे तय करने के लिए दो साल तक का समय ले सकती है कि जुवेनाइल की मानसिक स्थिति ठीक है या नहीं.

इस दौरान वह घर नहीं जाएगा और कहीं आने-जाने के लिए उनके साथ एक व्यक्ति होगा.

अपराधी पर कितनी रोक-टोक होगी, इसकी विस्तृत जानकारी यह कमेटी देगी.

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क़ानून में जुवेनाइल अपराधियों के सुधार का प्रावधान है पर अगर अपराधी में कोई सुधार न हो, तो ऐसे में कोई प्रावधान नहीं है.

सुब्रहमण्यम स्वामी की याचिका में उठाए गए इस मुद्दे पर विस्तृत तरीक़े से सुनवाई मार्च में होगी.

इस बारे में याचिकाकर्ता सुब्रहमण्यम स्वामी ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा, ''जब तक जुवेनाइल की मानसिक स्थिति और उसके समाज में रहने लायक होने की जांच न हो, उसे रिहा नहीं किया जाना चाहिए. जो कमेटी दो साल के लिए बनाई गई है वह इसकी जांच करेगी और तब तक हम क़ानून बना लेंगे.''

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा है, ''निर्भया के अपराधी की 20 दिसंबर को रिहाई बेहद दुखद है. यह देश के इतिहास का काला दिन होगा. हम इस बारे में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों से हस्तक्षेप के लिए अपील करेंगे. निर्भया के बलात्कारी रिहा नहीं किए जाने चाहिए.''

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