अंधविश्वास के ख़िलाफ़ डीएम की अनोखी पहल

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Image caption गोपालगंज के डीएम गांव के लोगों से बात करते हुए

बिहार में गोपालगंज के ज़िलाधिकारी राहुल कुमार ने शुक्रवार को एक स्कूल में बच्चों के साथ मिड डे मील (एमडीएम) के तहत दिया जाने वाला खाना खाया.

एक विधवा रसोइए से जुड़े ग्रामीणों के अंधविश्वास को दूर करने के लिए उन्होंने ऐसा किया. विधवा सुनीता देवी गोपालगंज ज़िले के कल्याणपुर गांव के एक सरकारी मिडिल स्कूल में रसोइया हैं.

जानकारी के मुताबिक, बीते साल फरवरी में कुछ आरोपों के आधार पर सुनीता को हटा दिया गया और उन्हें अपनी सफाई पेश करने का मौका भी नहीं दिया गया.

करीब दो साल के संघर्ष के बाद सुनीता इस सोमवार को अपनी नौकरी वापस हासिल कर पाईं.

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Image caption स्कूल की विधवा रसोइया सुनीता

स्थानीय पत्रकार अभय राजन के मुताबिक, वापस काम शुरू करने के तीसरे ही दिन गांव वालों ने उनके चरित्र पर सवाल उठाते हुए और उन्हें अशुभ मानते हुए सुनीता को खाना बनाने से रोका और स्कूल में तालाबंदी कर दी.’

ऐसे में सुनीता ने गुरुवार को एक बार फिर जिलाधिकारी राहुल कुमार से मदद मांगी. इस बार उन्होंने वरीय अधिकारियों की मौजूदगी में सुनीता की काम पर वापसी सुनिश्चित कराई.

राहुल बताते हैं, ‘‘मुझे लगा कि पूरे मामले में कई पहलू हैं. ऐसे में लोगों को जाकर समझाने की ज़रूरत है. मैंने तय किया कि स्कूल में ख़ुद सुनीता के हाथों का खाना खाकर लोगों के अंधविश्वास पर चोट की जाए.’’

ज़िलाधिकारी के इस अनूठे हस्तक्षेप के बाद शनिवार को सुनीता ने बाक़ी रसोइयों के साथ मिलकर क़रीब सात सौ बच्चों के लिए खिचड़ी और चोखा बनाया.

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Image caption डीएम स्कूली बच्चों के साथ मिड डे मील खाते हुए

सुनीता ने बीबीसी को बताया, ‘‘आज सभी शिक्षक और बच्चों ने मेरे हाथ का बना खाना खाया. गांव वालों ने किसी तरह का विरोध नहीं किया.’’

सुनीता बताती हैं कि डीएम साहब के खाना खाने के बाद उनका हौसला बढ़ा है.

कल्याणपुर पंचायत के मुखिया रामदेव पासवान ने बीबीसी को बताया, ‘‘डीएम साहब की बातों का अच्छा असर पड़ा है. लोगों ने उनकी बातों को समझा है. उनकी सोच बदली है, विवेक जागा है.’’

हालांकि उनका ये भी मानना है कि कुछ लोग प्रशासन की कार्रवाई के डर से भी अब विरोध नहीं कर रहे हैं.

सुनीता के दो बच्चे भी उसी स्कूल में पढ़ते हैं जहां वह काम करती हैं.

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