सोनिया का आत्मविश्वास वापस आ रहा है?

मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी इमेज कॉपीरइट AFP GETTY

नेशनल हेराल्ड 'घोटाले' के शुरू में ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी को एक ज़बरदस्त झटका लगा है.

सोनिया गांधी के बयानों से उनकी घबराहट का एहसास होता था. उन्होंने पटियाला हाउस अदालत के समन को खारिज करने की हाई कोर्ट में भरपूर कोशिश की लेकिन ये साफ़ हो गया कि अदालत में हाज़िरी को टाला नहीं जा सकता.

धीरे-धीरे उनकी घबराहट ख़त्म होती दिखाई दी और आत्मविश्वास वापस आता नज़र आया. माँ-बेटे की जोड़ी ने शनिवार को अदालत में अपनी पेशी से सियासी मुनाफ़ा कमाने की पूरी कोशिश की.

इमेज कॉपीरइट Reuters

ज़मानत मिलने के कुछ ही समय बाद सोनिया और राहुल ने मोदी सरकार पर भारी प्रहार किया. सोनिया गांधी ने कहा, "केंद्र सरकार अपने विपक्ष को निशाना बना रही है, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं". उन्होंने ये भी इल्ज़ाम लगाया कि विपक्ष के खिलाफ सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है."

वहीं राहुल गांधी ने कहा, ''मोदी जी झूठे इल्ज़ाम लगवाते हैं और सोचते हैं कि विपक्ष झुक जाएगा. मैं और कांग्रेस पार्टी नहीं झुकेंगे. हम एक इंच पीछे नहीं जाएंगे.'''

ये मोदी सरकार के खिलाफ उसी तरह का इल्ज़ाम था जैसा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कुछ दिन पहले लगाया था.

इमेज कॉपीरइट AFP

ज़ाहिर तौर पर अपने एक चहेते सरकारी अफसर के खिलाफ सीबीसाई के छापों के बाद केजरीवाल ने बीजेपी सरकार को एक ज़ोरदार झटका दिया. उन्होंने न केवल ये दावा किया कि सीबीआई के छापे उनके दफ्तर पर किए गए थे बल्कि ये भी ज़ोर-ज़ोर से कहा कि सीबीआई वो फाइलें लेने आई थी जिनका सीधा संबंध वित्त मंत्री अरुण जेटली की नाक के नीचे हुई गड़बड़ी से है.

दिल्ली क्रिकेट एसोशिएशन में भ्रष्टाचार के खिलाफ कई सालों से खुद बीजेपी के सांसद कीर्ति आज़ाद आवाज़ उठा रहे थे. पार्टी के अंदर कुछ चश्मदीदों का कहना है कि केजरीवाल के इस हमले से अरुण जेटली हिल गए. इस पूरे मामले में आम आदमी पार्टी का रुख आक्रामक था जिसके बाद बीजेपी और उसकी सरकार बैकफुट पर चली गई.

इमेज कॉपीरइट Reuters

केजरीवाल अपने दफ्तर में कथित छापे को पूरे विपक्ष के खिलाफ केंद्र का हमला क़रार देने में कामयाब दिखाई दिए. ममता बनर्जी से लेकर कई विपक्षीय नेताओं ने उनका समर्थन किया. लेकिन क्या सोनिया गांधी और राहुल गांधी अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के व्यक्तिगत इल्ज़ाम को न केवल कांग्रेस पार्टी पर बल्कि पूरे विपक्ष पर हमला क़रार देने में कामयाब होंगे?

राहुल गांधी इस मामले के सामने आने के पहले दिन से ही कह रहे हैं कि ये मोदी सरकार की राजनीतिक बदले की कार्रवाई है. मोदी सरकार ने इसका खंडन करते हुए कहा कि ये मामला अदालत का है, सरकार का इससे लेनादेना नहीं है.

इमेज कॉपीरइट PIB

शनिवार को सोनिया और राहुल के बयानों के बाद बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नक़वी ने पलटकर उनके खिलाफ हमला किया. उन्होंने कहा, ''कोर्ट की लड़ाई कोर्ट में लड़िए. पूरा देश आपके परिवार की विरासत और उसकी सियासत को जानता है.''

ज़ाहिर तौर पर नक़वी की बात में दम है लेकिन उनकी बातों पर विपक्ष को कितना यक़ीन होगा? सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले को अदालत तक ले जाने वाले थे बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी.

इमेज कॉपीरइट PTI

लेकिन जब 2012 में वो अदालत गए थे, उस समय वो बीजेपी में नहीं थे. मगर कांग्रेस के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद का कहना है कि मोदी सरकार अब उन्हें कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है जिसका सबूत स्वामी को सरकारी घर और जेड श्रेणी की सुरक्षा है जो उन्हें दो दिन पहले ही दिए गए हैं और जो कांग्रेस के अनुसार सरकार की तरफ से स्वामी को एक इनाम है.

अगर सोनिया, सोनिया नहीं होतीं और राहुल, राहुल नहीं होते तो उनपर लगे भ्रष्टाचार के इल्ज़ाम की गूँज अदालत से बाहर नहीं जाती. लेकिन इल्ज़ाम के दायरे में घिरा परिवार कांग्रेस के लंबे इतिहास से आरंभ से जुड़ा है, इसलिए सियासत को इस अदालती मामले से अलग करना कठिन होगा.

पार्टी के अंदर लोगों का कहना है कि माँ और बेटा अब जेल जाने से नहीं घबरा रहे हैं. उन्हें लगता है कि इससे गांधी परिवार को सहानुभूति मिलेगी. शायद मोदी सरकार भी सोनिया और राहुल को जेल भेजकर उन्हें हीरो नहीं बनाना चाहती. इंदिरा गांधी की जेल यात्रा से उनकी सियासी वापसी का इतिहास देश के राजनेता अब भी नहीं भूले हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार