'दोषी हो तो फ़ांसी दो, निर्दोष हो तो इंसाफ़ दो'

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जुमे की नमाज़ के बाद दीपासराय की सबसे पुरानी मस्जिद से बाहर निकल रहे मुसलमानों के चेहरों पर चिंता साफ़ झलक रही है.

छोटे-छोटे झुंड में खड़े इन लोगों को ये डर सता रहा है कि आज़मगढ़ की तरह आतंकवाद का बिल्ला अब संभल पर भी चिपक जाएगा.

दीपासराय के दो लोगों को अल क़ायदा से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, यही नहीं, पुलिस का कहना है कि दीपासराय में ही अल क़ायदा के दक्षिण एशिया के प्रमुख मौलाना आसिम उमर उर्फ़ सनाउल हक़ का भी घर है.

ये तीनों घर सौ मीटर के दायरे में हैं. मस्जिद के पास ही मोहम्मद आसिफ़ का घर है जहाँ उनके पिता और भाई मीडिया के लोगों के बीच घिरे हुए हैं.

Image caption इस तस्वीर में आसिफ़ (दाढ़ी में) में अपने भाई सादिक के साथ नज़र आ रहे हैं.

कुछ पलों के बाद वो मुझ से मुख़ातिब होते हुए अपने घर की तरफ इशारा करते हुए बताते हैं कि किन मुश्किलों में उन सब की ज़िंदगी कट रही है.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का दावा है कि दीपासराय के रहने वाले मुहम्मद आसिफ़, भारत में अल-क़ायदा के 'मॉड्यूल' बनाने वालों में से एक हैं. मगर आसिफ़ के पिता अता उर रहमान और भाई सादिक़ को पुलिस के आरोपों को नहीं मानते हैं.

आसिफ़ के पिता कहते हैं कि उनका बेटा पुरानी चीज़ें दिल्ली से ख़रीद कर लाता और उन्हें अपने मोहल्ले में बेचा करता था. उससे पहले वो मुनीम की नौकरी करता था.

वो कहते हैं, "वो दिल्ली गया हुआ था. एक दिन के बाद मोहल्ले के लोगों ने आकर बताया कि टीवी पर बता रहा है कि आसिफ़ अल क़ायदा से जुड़ा है. हमें यक़ीन नहीं हुआ. फिर मेरे छोटे बेटे सादिक़ ने पड़ोस में जाकर टीवी देखा. हम पर बिजली गिर गई. हमारी पूरी नस्ल में किसी पर जुर्म करने का कभी इलज़ाम नहीं लगा."

मगर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के आयुक्त अरविन्द दीप ने बीबीसी को बताया कि आसिफ़ ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने स्वीकार किया है कि वो 'अल-क़ायदा' की भारत की इकाई का 'अमीर' यानी प्रमुख है.

अरविन्द दीप का यह भी कहना था, "आसिफ़ ईरान के रास्ते अफ़ग़ानिस्तान पहुंचा और फिर उत्तरी वज़ीरिस्तान में उसे प्रशिक्षण भी दिया गया. यहीं पर आसिफ़ की मुलाक़ात मौलाना आसिम उमर उर्फ़ सनाउल हक़ से हुई जो दीपासराय में उसका पड़ोसी भी था. चूँकि इस उप-महाद्वीप में सनाउल हक़ अल क़ायदा का प्रमुख बन चुका था इसलिए उसने अपने पडोसी आसिफ़ को भारत का 'अमीर' यानी प्रमुख बना दिया."

मगर आसिफ़ के भाई सादिक़ पुलिस के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहते हैं कि आसिफ़ कभी ईरान नहीं गया.

वे कहते हैं, "हम सब सदमे में हैं. एक सीधे इंसान को जिहादी और मुजाहिदीन बता दिया गया और अल ज़वाहिरी और अल क़ायदा से जोड़ दिया गया. अल्लाह बेहतर जाने उन लोगों कहाँ से ऐसी रिपोर्ट मिली. अगर यह झूठ है तो हम इन्साफ की उम्मीद करेंगे अदालत से. अल्लाह न करे अगर ये सच है तो फिर हम हुकूमत से यह इल्तिज़ा करेंगे कि उन्हें फांसी दे दो."

पास में ही ज़फर मसूद का भी घर है. ज़फर को भी अल क़ायदा के लिए पैसे जुटाने के आरोप में मुरादाबाद से गिरफ्तार किया गया.

वर्ष 2002 में ज़फर जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में पढ़ा करते थे. उस वक़्त जिन छात्रों के साथ वो रहा करते थे उन पर आतंकवादी संगठनों से जुड़े होने के आरोप लगे.

ज़फर का नाम भी पुलिस की एफआईआर में आया मगर अदालत ने उन्हें निर्दोष माना था. लगभग 13 सालों के बाद फिर से उन्हें पुलिस के निशाने पर लाए जाने की वजह से दीपासराय के लोगों में नाराज़गी है.

Image caption संभल में मोहम्मद आसिफ़ का घर.

संभल के दीपासराय में एक के बाद एक गिरफ़्तारी से स्थानीय पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया है. ज़िले के पुलिस अधीक्षक अतुल सक्सेना का कहना है कि पुलिस ने अब उन लोगों की सूची बनानी शुरू कर दी है जो कई वर्षों से लापता हैं. यानी वो लोग जो इलाक़े से गए तो मगर उनका कुछ अता-पता नहीं है.

वो कहते हैं, "हम इस इलाक़े में मौजूद फैक्ट्रियों में काम कर रहे लोगों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं. कई लोग जिन पर हमें संदेह हैं, उनसे हम पूछताछ भी कर रहे हैं."

दीपा सराय के मोहम्मद उस्मान कहते हैं, "1947 में भी यहां का कोई मुसलमान पाकिस्तान नहीं गया. हमारे बुज़ुर्गों ने आज़ादी के लिए अपना ख़ून बहाया. संभल से कभी मुस्लिम लीग को वोट नहीं मिला था. आज हमारी वतनपरस्ती का इम्तेहान है. हम पहले भी पास हुए थे. आज भी पास होंगे."

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