'डीडीसीए की स्वतंत्र जांच बेहद ज़रूरी है'

  • 21 दिसंबर 2015
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Image caption आज़ाद ने डीडीसीए के अध्यक्ष रहे जेटली पर कथित भ्रष्ट लोगों को बचाने का आरोप लगाया

पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद कीर्ति आज़ाद ने दो अहम आरोप लगाए गए हैं जिनकी स्वतंत्र न्यायिक जांच की ज़रूरत है.

कीर्ति आज़ाद ने डीडीसीए से पैसे लेने वाली चौदह कंपनियों के पते फ़र्ज़ी होने का आरोप लगाया गया है. ऐसे आरोप पहले भी लगे हैं.

दूसरा आरोप है कि क्या जेटली डीडीसीए के रोज़मर्रा के कामकाज से संबंधित थे और क्या उन्होंने कथित भ्रष्टाचार करने वालों को बचाया?

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कीर्ति आज़ाद ने प्रेस कांफ्रेंस में डीडीसीए की सालाना बैठक का एक वीडियो दिखाया जिसमें कीर्ति आज़ाद और कुछ लोगों ने जेटली पर कथित भ्रष्टाचार कर रहे लोगों को बचाने पर सवाल उठाए हैं.

Image caption केजरीवाल का आरोप है कि सीबीआई उनके दफ़्तर में जेटली से जुड़ी फ़ाइलें खोज रही थी

वीडियो में जेटली ग़ुस्से से बोलते दिखते हैं कि 'डीडीसीए का अध्यक्ष होने के नाते ये मेरा दायित्व है कि जिन लोगों पर आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं मैं उनका बचाव करूं.'

हालाँकि जेटली ये भी कहते रहे हैं कि वो डीडीसीए के रोज़मर्रा के कामकाज में दखल नहीं देते थे. लेकिन वीडियो के मुताबिक डीडीसीए की गतिविधियों में अरुण जेटली का दख़ल था.

साथ ही कीर्ति आज़ाद और अन्य लोग उन्हें डीडीसीए में हो रही गड़बड़ियों के बारे में जानकारी दे रहे थे, पर वो इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे थे.

Image caption सांसद कीर्ति आज़ाद पहले भी डीडीसीए में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते रहे हैं

कीर्ति आज़ाद की प्रेस वार्ता के बाद डीडीसीए ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है.

इसलिए डीडीसीए से इस कथित भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ क़दम उठाने या इसकी जांच कराने की उम्मीद नहीं की जा सकती है.

इस मामले में स्वतंत्र जांच की ज़रूरत है. एक न्यायिक जांच हो जो सभी आरोपों की पड़ताल करे.

इसमें एक मामला ये भी है कि केंद्र सरकार की एसएफ़ओ यानी स्पेशल फ्रॉड आर्गेनाइजेशन ने भी इस मामले की जांच की है.

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Image caption फ़िरोज शाह कोटला मैदान के निर्माण में बड़े भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं

एसएफ़ओ ने अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है. अन्य लोगों ने भी इस मुद्दे को उठाया है और कुछ सबूत पेश किए गए हैं.

एक ऐसा आयोग गठित हो जिस पर सभी की सहमति हो. दिल्ली सरकार आयोग गठित करने की बात कर रही है वो सही रास्ता है.

(आदेश कुमार गुप्त के साथ बातचीत पर आधारित)

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