राम मंदिरः 'रस्सी को सांप बनाने की कोशिश'

राम शिलाएं.

अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा एक रस्सी है, जिसे बाहर सांप बनाने की पुरज़ोर कोशिश हो रही है.

यहां विश्व हिंदू परिषद, रामजन्मभूमि न्यास समेत कोई हिंदू संगठन यह कहने को तैयार नहीं कि वह अदालत को धता बताकर मंदिर बनाने जा रहा है.

लेकिन लखनऊ में सुरक्षा के बंदोबस्त किए जा रहे हैं, दिल्ली की संसद में मसला उठ रहा है, चैनलों में बहस हो रही है, चौराहों पर कयास लग रहे हैं कि मंदिर की कवायद से जो धार्मिक ध्रुवीकरण होगा, उससे यूपी के अगले विधानसभा चुनाव में किसे कितना फ़ायदा होगा.

ज़ाहिर है, इस बार हवा में बनाए जा रहे इस राम मंदिर का संबंध अयोध्या और रामजन्मभूमि से नहीं, यूपी के विधानसभा चुनाव से है. जहां बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की करारी हार के बाद सबकी नज़रें लगी हैं.

मोदी यहीं के धार्मिक रंगत वाले दूसरे शहर बनारस से सांसद हैं, जिनके करिश्मे से भाजपा ने बीते लोकसभा चुनाव में सबसे बड़े सूबे में बाक़ी राजनीतिक दलों का सूपड़ा साफ़ कर दिल्ली में सरकार बनाई थी.

थोड़ा सच-थोड़ा झूठ मिलाकर राम मंदिर के गुब्बारे को फुलाने की कोशिश 20 दिसंबर की शाम को यहां रामसेवकपुरम में सात साल बाद भरतपुर (राजस्थान) से अचानक आए एक ट्रक से छह बड़े आकार के पत्थरों के उतारे जाने और एक पुराने पत्थर पर रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की पूजा के बाद शुरू हुई.

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इसे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान और मंदिर बनवाने की हमेशा मांग करने वाले साधु-संतों के बयानों से जोड़कर ऐसा रंग दिया गया, जैसे हिंदूवादी संगठन क़ानून को किनारे ठेलकर मंदिर बनाने जा रहे हैं.

भागवत ने विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक रहे अशोक सिंघल की श्रद्धांजलि सभा में कहा था कि अयोध्या में राममंदिर का बनना ही उन्हें श्रद्धांजलि होगी.

मीडिया में पत्थरों के वज़न, उन्हें लाने वाले ट्रकों की संख्या के कई ब्योरे दिख रहे हैं. कुछ ने बता दिया कि पत्थरों को तराशने के लिए नए कारीगर लगाए गए हैं.

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उन्हें देखने, पूजा करने के लिए श्रद्धालु जुटने लगे हैं. लेकिन अयोध्या की सड़कों पर बुधवार शाम ईद मिलादुन्नबी के जलसों और जुलूसे मोहम्मदी में कलाम पढ़ने वालों की बुलंद आवाज़ों की धूम थी. मुकम्मल शांति थी लेकिन प्रशासन मुस्तैद था.

मणिराम दास छावनी में न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''बैठे-ठाले न जाने क्यों यह हल्ला मचाया जा रहा है. यहां शांति है, शोर बाहर है. हम अदालत का पूरा सम्मान करते हैं. जो आदेश है उसका पालन किया जाएगा. मंदिर निर्माण के मामले में हमें मोदी से नहीं भगवान से आशा है.''

महंत नृत्यगोपाल दास ने जोर देकर कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी को इस घटना से जोड़ना ग़लत और अन्याय है. उन्हें तो पता भी नहीं होगा कि यहां पत्थर आए हैं.''

विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा, ''ये 30 टन वज़न के गुलाबी बालुआ पत्थर हैं, जो राजस्थान के भरतपुर ज़िले के वंशीपहाड़पुर स्थान से लाए गए हैं.''

सात साल बाद इनकी आवक का कारण वह यह बताते हैं कि कोर्ट के आदेश के बाद राजस्थान सरकार ने वहां पत्थर खनन पर रोक लगा दी थी. अब खनन की इजाज़त मिल गई है, सो पत्थर फिर आने लगे हैं.

उन्होंने कहा, हमारी कार्यशाला में पहले आए पत्थरों को तराशने का काम जैसे पिछले 20 साल से अधिक समय से चल रहा था, अब भी चल रहा है.

उधर, राम मंदिर मुक़दमे के प्रमुख पक्षकार अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा के मुताबिक़ अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि न्यास का शिलापूजन वीएचपी की नौटंकी के अलावा कुछ नहीं है.

उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार से मांग की है कि राम मंदिर के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाकर सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर विशेष क़ानून बनाया जाए, ताकि भव्य मंदिर बनाने का रास्ता साफ़ हो.

मुन्ना कुमार के मुताबिक़, ''देशवासियों को अब संघ या भाजपा पर भरोसा नहीं रह गया है. ये दोनों इस मुद्दे को वोट बैंक की राजनीति के लिए इस्तेमाल करते हैं, जिसे देश की जनता समझ गई है.''

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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