'अरुंधति को अवमानना का नोटिस असहिष्णुता'

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वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने जानी मानी लेखिका अरुंधति राय को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ द्वारा भेजे गए अवमानना के नोटिस को 'असहिष्णुता की पराकाष्ठा' बताया है.

अरुंधति राय ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जीएन साईबाबा को ज़मानत ना दिए जाने के बारे में इसी साल मई में एक लेख लिखा था.

लेख में उन्होंने गुजरात दंगों में भूमिका के लिए दोषी पाए गईं पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी समेत कई अलग-अलग मामलों में दी गई ज़मानत की चर्चा भी की थी और आलोचना भी.

इसी लेख के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अरुंधति राय के ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया है और जीएन साईंबाबा की ज़मानत की अपील ख़ारिज कर दी है.

गुरुवार को एक पत्रकार वार्ता में प्रशांत भूषण ने कहा, "ज़मानत सिर्फ़ तीन सूरतों में नहीं दी जाती, उनमें से कोई भी जीएन साईंबाबा पर लागू नहीं होती, फिर वो 90 फ़ीसदी विकलांगता से ग्रस्त हैं, अदालत का फैसला प्रतिशोधी लगता है, और अगर उन्हें ज़मानत ना दिए जाने पर लिखते हुए किसी और अदालती फ़ैसले की आलोचना की जाए तो ये तो हर नागरिक का अधिकार है, इस पर अवमानना का नोटिस भेजना असहिष्णुता की पराकाष्ठा है."

प्रशांत भूषण ने कहा कि किसी व्यक्ति को ज़मानत तभी मना की जाती है जब उसने जघन्य अपराध किया हो, उसके भाग जाने का डर हो या उसके सबूतों से छेड़छाड़ करने की शंका. भूषण के मुताबिक साईंबाबा पर इनमें से कोई भी लागू नहीं होती.

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साईंबाबा पर नक्सलियों के साथ संबंध रखने का आरोप है और वो पिछले करीब छह महीने से अंतरिम ज़मानत पर थे.

व्हीलचेयर के सहारे चलने वाले साईंबाबा को पुलिस ने मई 2014 में गिरफ़्तार किया था. उनकी बिगड़ती सेहत के बारे में एक जनहित याचिका दायर होने के बाद ही उन्हें 30 जून 2015 को ज़मानत दी गई.

दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के शिक्षकों समेत उनके कई शुभचिंतकों ने दिल्ली में प्रेस वार्ता की.

वार्ता में मौजूद साईंबाबा की पत्नी वासंता ने कहा, "गिरफ़्तारी से पहले उनकी दोनों टांगें नहीं चलती थीं, 14 महीने बाद जब वो रिहा हुए उनका बांया हाथ भी चलना बंद हो गया, उनकी किडनी और गॉल ब्लैडर में पत्थर हो गए और उन्हें ऐंजियोग्राफ़ी भी करवानी पड़ी."

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वासंता ने कहा कि वो अब क़ानूनी सलाह लेकर अपने पति की बिगड़ी सेहत की ज़िम्मेदारी तय करने के लिए अदालत में केस करेंगी.

वासंता के मुताबिक साईंबाबा पर लगाए आरोप ग़लत हैं और उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वो आदिवासियों के अधिकारों का समर्थन करते रहे हैं.

उधर कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि नागपुर जेल में जब साईंबाबा रखे गए तो उन्हें उचित डॉक्टरी सेवाएं उप्लब्ध कराई गई थीं, साथ ही अरुंधति रॉय के लेख की कड़े शब्दों में आलोचना की है.

हाई कोर्ट के फैसले के बाद, जीएन साईंबाबा को 25 दिसंबर तक नागपुर जेल में आत्मसमर्पण करने को कहा गया है और अरुंधति राय को 25 जनवरी तक अवमानना के नोटिस का जवाब देने को कहा है.

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