'संसद में घंटा-पौना घंटा बोलें राहुल गांधी'

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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को सलाह दी है कि संसद में भाजपा को जवाब देने के लिए उन्हें ज़्यादा आक्रामक होने की ज़रूरत है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ चव्हाण ने कहा कि राहुल को संसद में ज़्यादा बोलने के अलावा अपनी भावभंगिमा पर भी ध्यान देना चाहिए ताकि जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता बढ़ सके.

हाल में समाप्त हुए संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराया और इस दौरान हंगामे के बीच संसद का कामकाज बाधित हुआ.

सरकार ने विपक्ष और ख़ास कर कांग्रेस पर संसद को न चलने देने का आरोप लगाया.

लेकिन चव्हाण का कहना है, "संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण होता है. ऐसे में राहुलजी को विषयों पर व्यापक बात करनी चाहिए. एक वाक्य बोलने से हमेशा काम नहीं चलता है. उन्हें लगातार 45 मिनट से एक घंटे तक बोलना चाहिए."

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कांग्रेस नेतृत्व के क़रीबी माने जाने वाले चव्हाण ने कहा कि विपक्ष के नेताओं के लिए संसद ही एकमात्र विकल्प है जहां वे मुद्दों को उठा सकते हैं.

उन्होंने कहा, "आप लोगों के लिए कैसे काम करेंगे जब आपके पास सत्ता नहीं है. आप प्रधानमंत्री को कॉल करके नहीं कह सकते है कि कोई फैसला जनहित में नहीं है और इस पर पुनर्विचार कीजिए. ऐसी स्थिति में विपक्ष के नेता के पास अपनी बात रखने के लिए संसद ही एक विकल्प है."

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी को संसद में व्यक्त किए गए विचारों के आधार पर ही जाना जाएगा.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जनसभाओं के लिए अपने भाषण की बारीकी से योजना बनाती हैं क्योंकि वह हिंदी में सहज नहीं हैं लेकिन राहुल इसे हल्के में लेते हैं क्योंकि उन्हें हिंदी में कोई परेशानी नहीं है. कई बार यह उनकी कमज़ोरी बन जाती है जिसे दूर करने की ज़रूरत है.

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चव्हाण ने कहा कि लोग संसद में गंभीर चर्चाओं को देखते हैं और राहुल गांधी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह जनता तक अपनी बात पहुंचा सकें.

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