साधना को कभी न भूल पाएंगे: सायरा बानो

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किसी ऐसे शख़्स के बारे में संक्षेप में कहना आसान नहीं है, जिसका ख़ूबसूरत चेहरा, आवाज़ और भाव-भंगिमाएं आपकी यादों में हमेशा रहें.

जब मेरी पहली फ़िल्म ‘जंगली’ ज़बर्दस्त सुर्ख़ियों में थी, उस वक़्त तक साधना स्टार बन चुकी थीं.

वह फ़िल्मालय एक्टिंग स्कूल से थीं और उनके अभिनय को तराशा था एस मुखर्जी साहब ने. मेरी दो शुरुआती फ़िल्मों के डायरेक्टर आरके नैयर के साथ उनकी मंगनी हो चुकी थी.

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हमारे रिश्ते आने वाले वर्षों में फलते-फूलते रहे जबकि हम बांद्रा में रहने के बावजूद मुश्किल से ही मिलते थे.

मगर फ़ोन के ज़रिए और बाद में मोबाइल पर मैसेज के ज़रिए बात करते रहते थे या हमें एक दूसरे की ख़ैरियत का पता हमारे पारिवारिक डॉक्टर श्रीकांत गोखले के ज़रिए मिलता रहता था.

ये डॉक्टर गोखले ही थे जिन्होंने मुझे वह अच्छी ख़बर सुनाई थी कि उनकी सेहत में सुधार हो रहा था और वह उस बीमारी से उबर रही थीं जिससे वो जूझ रही थीं. मैं उनकी दृढ़ता और धैर्य से प्रभावित थी.

मैं चुपके से उनके लिए प्रार्थना करती रहती. एक निजी जीवन पसंद करने वाले व्यक्ति के नाते मैं उनकी इच्छा का सम्मान करती थी और इसीलिए उनके घर जाकर उनकी सेहत के बारे में बार-बार पूछताछ नहीं करती थी. जब हम फ़ोन पर बात करते तो लगता था कि वह स्वस्थ और ख़ुश थीं और इससे मुझे भी ख़ुशी मिलती थी.

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वो वक़्त भी था जब हम उनकी प्रॉपर्टी को लेकर चल रही अदालती लड़ाइयों के बारे में बात करते थे. तब लगता था कि अगर धैर्य न हो तो यह कितना थका देने वाला हो सकता है.

मैंने उन्हें अपनी तरफ़ से हर मुमकिन मदद का भरोसा दिलाया था क्योंकि मैं ख़ुद एक लंबे अदालती मामले में उलझी थी और इसके चलते तक़रीबन क़ानून की एक्सपर्ट बन गई थी.

वह इंडस्ट्री की बेहतरीन अदाकारा थीं और उनके चाहने वाले उनकी अभिनय क्षमता और स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी को हमेशा याद रखेंगे.

खासकर सब कुछ बयान करने वाला उनका चेहरा जिसके माथे पर एक लट गिरी रहती और वह हेयरस्टाइल जो कभी उनके प्रशंसकों के बीच तेज़ी से छा गया था.

उनकी आत्मा को शांति मिले...आमीन

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