इस साल खेलों में भारत की नाकामियां

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2015 का साल भारतीय खेल जगत के लिए उपलब्धियों के साथ साथ कई नाकामियां भी लेकर आया.

नए साल में कई भारतीय खिलाड़ियों के सामने ज़ोरदार वापसी की चुनौती होगी.

एक नज़र डाल लेते हैं भारतीय खेल जगत में बीते साल की नाकामियों पर:

एथलेटिक्स: बीजिंग विश्व प्रतियोगिता में भारतीय एथलीटों का प्रदर्शन बेहद ख़राब रहा. इस अहम प्रतियोगिता में 800 मीटर की दौड़ में टिंटू लूका फ़ाइनल राउंड में भी नहीं पहुंच पाईं. 2011 में छह महिला एथलीटों के डोप टेस्ट में फ़ेल होने पर बर्ख़ास्त किए गए तत्कालीन विदेशी कोच यूरी ओगरोडोनिक (यूक्रेन) को फिर से रियो ओलंपिक के लिए मुख्य कोच के तौर पर बुलाया गया.

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बैडमिंटन: पीवी सिंधू बहुत कम समय में ही साइना नेहवाल को चुनौती देती दिखीं. लेकिन पांव की चोट की वजह से साल में अधिकांश समय वे बैडमिंटन कोर्ट से बाहर रहीं.

बॉक्सिंग: भारतीय मुक्केबाज़ी संघ में पदाधिकारी स्तर के चुनावों में हुए विवाद के बाद अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग संघ ने भारतीय संघ को निलंबित कर दिया. इस विवाद के दौरान राज्य की ईकाइयों ने भारतीय संघ के अध्यक्ष और सचिव को पद से हटा दिया था. निर्धारित समय तक मुक्केबाज़ी संघ अपने पदाधिकारियों का चुनाव नहीं करा पाया.

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फ़ुटबॉल: वर्ल्ड कप क्वॉलिफायर्स में भारतीय टीम का प्रदर्शन कमज़ोर रहा. अपने से कहीं कमतर रैंकिंग वाली टीम गुआम से भी भारत हार गया. पांच मुक़ाबला गंवाने के चलते फ़ीफ़ा रैंकिंग में भारत फिसलकर 166वें पायदान पर आ गया.

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क्रिकेट: फ़िक्सिंग विवाद पर सु्प्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद एन श्रीनिवासन बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से हटाए गए. भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में सीरीज़ हार गई. पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आज़ाद ने दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन में आर्थिक गड़बड़ियों का आरोप लगाया.

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टेनिस: भारत के नामी खिलाड़ी सोमदेव बर्मन का प्रदर्शन पूरे साल औसत से कमतर रहा. वर्ल्ड रैंकिंग में वे अब 178 वें पायदान पर पहुंच गए हैं.

तीरंदाज़ी: विश्व यूनिवर्सिटी गेम्ज़ में कांस्य पदक के मुक़ाबले में हिस्सा ना लेने के कारण तीन जूनियर तीरंदाज़ों और एक कोच पर तीन साल का प्रतिबंध लगा. गुरविंदर सिंह, कंवलप्रीत सिंह और अमन अपने कोच जीवन जोत सिंह के साथ यूनिवर्सिटी के किसी मुक़ाबले में तीन साल तक हिस्सा नहीं ले सकेंगे.

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गोल्फ़: जाने-माने गोल्फर जीव मिल्खा सिंह और अर्जुन अटवाल पूरे साल किसी भी पीजीए गोल्फ़ चैंपियनशिप में उल्लेखनीय प्रदर्शन नहीं कर पाए.

शूटिंग: ओलंपिक और बाक़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय निशानेबाज़ों के अच्छे प्रदर्शन के बावजूद भी दिल्ली की करनी सिंह रेंज की हालत खस्ता है.

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शतरंज: बिलबाओ मास्टर्स में हॉलैंड के अनिश गिरि के हाथों भारतीय ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद हार गए.

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हॉकी: हॉलैंड के कोच पॉल वेन अस को हॉकी इंडिया ने निलंबित कर दिया. वहीं भारतीय मिडफ़ील्डर गुरबाज सिंह को टीम के खिलाड़ियों के साथ बेहतर व्यवहार नहीं रखने के आरोप में नौ महीने के लिए निलंबित किया गया.

वेटलिफ्टिंग: 26 खिलाड़ियों का नशीली दवाओं के सेवन के कारण निलंबन. प्रमिला क्रिसानी और मिनाती सेठी पर कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में डोपिंग के कारण प्रतिबंध लगा.

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जिमनास्टिक्स: ग्लासगो वर्ल्ड चैम्पियनशिप में दीपा कर्माकर वॉल्टिंग इवेंट में पदक हासिल करने में नाकाम रहीं.

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कुश्ती: लॉस वेगास में आयोजित वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में महिला पहलवानों से भारत को निराशा हुई. वहीं सुशील कुमार के प्रो रेसलिंग लीग में हिस्सा ना लेने पर विवाद भी हुआ. उन्होंने हिस्सा नहीं लेने की वजह तो नहीं बताई है लेकिन माना जा रहा है कि सुशील कुमार आयोजकों और टीम प्रमोटरों के रवैए से ख़ुश नहीं थे.

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