दलित की हत्या: पुलिस अकाली नेता को पकड़ने में विफल

  • 30 दिसंबर 2015
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बीस दिन पहले पंजाब के अबोहर में एक 24 वर्षीय दलित युवक के हाथ-पांव काटकर हत्या करने के मामले में सत्ताधारी अकाली दल से जुड़े एक नेता को पकड़ने में पुलिस को अब तक कोई सफलता नहीं मिली है.

अब मारे गए युवक के परिवार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराए जाने की मांग की है.

ये घटना 11 दिसंबर को अबोहर के एक फ़ार्म हाउस में हुई थी जिसके मालिक शिवलाल डोडा की पुलिस को तलाश है.

इस मामले में 21 लोगों को गिरफ़्तार किया है. फ़ाज़िल्का ज़िले के एसएसपी इंद्र मोहन सिंह भट्टी कहते हैं, "छापे मारे जा रहे हैं और उन्हें (डोडा को) जल्द ही गिरफ़्तार कर लिया जाएगा." एसएसपी भट्टी कहते हैं, "डोडा के फ़ार्महाउस से हथियार बरामद हुए हैं और उनके वाहनों की अभी जांच होनी बाक़ी है."

डोडा अकाली दल से जुड़े उभरते हुए नेता हैं जो पहले कांग्रेस में भी जुड़े रहे हैं. पुलिस के मुताबिक़ डोडा पर 1980 में कई केस दर्ज हुए थे पर बाद में वह सभी में बरी हो गए थे.

डोडा का शराब का कारोबार है जो दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में फैला हुआ है.

उधर मारे गए दलित युवक भीम टांक पहले डोडा के लिए काम करते थे और उन पर बलात्कार का आरोप था.

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Image caption मुख़्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के सलाहकार चरनजीत बरार ने मृतक के परिवार से मुलाकात की

भीम ने कुछ साल पहले डोडा से अलग होकर अपना व्यवसाय शुरू किया था. भीम के परिवार का आरोप है कि उन पर बलात्कार का मामला डोडा के कहने पर लगाया गया था.

उनके अनुसार भीम ने डोडा के साथ काम करने से मना कर दिया था, इसलिए ऐसा किया गया. इस मामले में शहर की राय बँटी हुई है. कुछ लोग डोडा के समर्थन में हैं तो दूसरे भीम के लिए न्याय मांग रहे हैं.

डोडा के भाई अविनाश अरोड़ा ने बीबीसी को बताया, "मेरा भाई (डोडा) कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ के लिए राजनीतिक ख़तरा बनता जा रहा था."

इस बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल के साथ डोडा की फ़ोटो सार्वजनिक होने के बाद लोगों में सरकार के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा बढ़ा है.

मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के सलाहकार चरनजीत बराड़ ने मृतक के परिवार से मुलाक़ात की थी.

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Image caption पंजाब के मुख़्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल

तब वाल्मिकी समुदाय के एक युवा ने आरोप लगाया था कि डोडा कथित रूप से मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास पर छिपा है.

इस पर बराड़ ने कहा था कि वो सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बादल परिवार के हर ठिकाने की जांच मीडियाकर्मियों के सामने करेंगे.

बादल के सलाहकार बराड़ ने माना कि डोडा ने अकाली पार्टी की मदद की थी, लेकिन साथ ही ज़ोर देकर कहा कि पार्टी का इस हत्या में कोई हाथ नहीं है.

डोडा फ़िलहाल भले ही अकाली दल के साथ माने जा रहे हों लेकिन पिछले 15 साल से वो कांग्रेसी नेता सुनील जाखड़ के लिए प्रचार करते आए हैं.

वहीं कांग्रेस डोडा को अकाली दल से जोड़ने में लगी है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मृतक के परिवार से मुलाक़ात करने गए थे.

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Image caption शिवलाल डोडा के वकील राजिल बिरला ने अग्रिम ज़मानत की याचिका दाखिल की.

इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए भीम की मां कौशल्या देवी ने बीबीसी को बताया, "राज्य पुलिस अभी तक हत्या के पीछे छिपा राज़ उजागर नहीं कर सकी है और न डोडा को गिरफ़्तार कर पाई है क्योंकि वह अमीर आदमी है."

उन्होंने आरोप लगाया, "भीम मुझसे कहता था कि डोडा ने उसे कई बार जान से मारने की धमकी दी थी क्योंकि वो उसके व्यवसाय को छोड़ चुका था."

डोडा के वकील राजिल बिरला इन सभी आरोपों को ग़लत बताते हैं.

बिरला कहते हैं, "मैंने कोर्ट में जो अग्रिम ज़मानत की याचिका दाख़िल की है उसमें मैंने कोर्ट को बताया है कि डोडा घटना के समय फ़ार्महाउस में नहीं थे. न ही उनकी कॉल डीटेल के रिकॉर्ड दिखाते हैं कि वह अपराध की जगह मौजूद थे."

उधर, डोडा की गिरफ़्तारी की मांग को लेकर वाल्मीकि समुदाय में गुस्सा है और सफ़ाई कर्मचारी हड़ताल कर रहे हैं.

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