अब सांसदों का खाना भी हुआ 'महंगा'

  • 1 जनवरी 2016
संसद की कैंटीन इमेज कॉपीरइट Other

भारत के संसद की कैंटीन शायद अब तक दुनिया की सब से सस्ती कैंटीन रही होगी जहाँ एक प्याली चाय केवल 2 रूपये में मिलती थी.

लेकिन पहली जनवरी से कैंटीन में उपलब्ध खाने और पीने के सभी आइटम की कीमतें बढ़ा दी गयी है

लेकिन बाज़ार की तुलना में ये कैंटीन अब भी काफी सस्ती हैं. आप किसी रेस्टोरेंट में शाकाहारी थाली खाते हैं तो जेब से कितने पैसे जाते हैं?

कम से कम 60 रुपये? सांसदों को अब तक एक शाकाहारी थाली केवल 18 रुपये में मिला करती थी. आज से ये थाली 30 रुपये में मिलेगी.

इसी तरह 33 रूपये में मिलने वाली मांसाहारी थाली अब 60 रूपये में मिलेगी.

संसद भवन परिसर में खाद्य प्रबंधन संबंधी समिति के अध्यक्ष और तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) सांसद जीतेन्द्र रेड्डी ने बीबीसी को बताया, "संसद की कैंटीन में उपलब्ध सभी 120 आइटम की कीमतें बढ़ा दी गई हैं."

उनका कहना था कि कैंटीन को घाटा हो रहा था और समिति का फैसला इसे 'नो प्रॉफ़िट, नो लॉस' पर चलाने का है.

एक अंदाज़े के मुताबिक़ कैंटीन को हुए घाटे की पूर्ति के लिए हर साल 16 करोड़ रूपये की सब्सिडी दी जा रही थी. संसद में कैंटीन रेलवे द्वारा चलाई जाती है.

संसद की कैंटीन में प्रधानमंत्री, सांसदों और स्टाफ़ के अलावा मेहमानों और पत्रकारों को भी सस्ते दाम पर खान-पान मिलता है. उदाहरण के तौर पर चाय केवल 2 रूपये में मिलती है. रेड्डी कहते हैं अब ये 10 रूपये में मिलेगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एलपीजी गैस जैसी वस्तुओं पर सरकारी सब्सिडी को ख़त्म करने की अपील करते आए हैं. कैंटीन में उपलब्ध खानों के कई आइटम में सब्सिडी 60 से 80 प्रतिशत दी जाती रही है.

सांसदों को दी जाने वाली सब्सिडी पर कई बार विवाद खड़ा हुआ है और लोगों ने सवाल उठाये हैं कि सांसदों को सब्सिडी क्यों देनी चाहिए?

जब ये सवाल जीतेन्द्र रेड्डी से किया गया तो उन्होंने बीबीसी कहा, "सब्सिडी तो सांसदों का 'प्रिविलेज'' (विशेषाधिकार) है. दूसरे देशों के सांसदों को तो खाना मुफ़्त मिलता है."

रेड्डी ने कहा कि सांसदों के पास समय का अभाव होता है. उन्हें कई बिल पर चर्चा करनी होती है उनके लिए ये "वर्किंग लंच है" जो कई देशों में मुफ़्त उपलब्ध कराया जाता है.

सांसदों की आमदनी और वेतन बहुत मुनासिब है उन्हें ये 'प्रिविलेज"देने की क्या ज़रुरत? इस पर वो लोग सवाल उठा सकते हैं जिनसे प्रधानमंत्री सरकारी सब्सिडी ख़ुद छोड़ने की अपील कर रहे हैं.

इस पर तेलंगाना के सांसद कहते हैं, "मैं इस वक़्त आमदनी के मुद्दे में नहीं पड़ना चाहता. मैं खाद्य प्रबंधन संबंधी समिति के अध्यक्ष की हैसियत से ये महसूस करता हूँ कि ये सब्सिडी एक वर्किंग लंच की तरह है और सांसदों को ये विशेषाधिकार मिलना चाहिए"

उन्होंने कहा कि कैंटीन में उपलब्ध खाने के दाम बढ़ाने का मुख्य कारण बढ़ती कीमतें है जिसके कारण कैंटीन को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ रहा था. आखिरी बार 2010 में कीमतें बढ़ाई गयी थीं.

रेड्डी ने कहा कि समिति समय-समय पर बैठक करती है जिसमें कैंटीन की सुविधाओं में सुधार, कीमतों को बढ़ाने के मुद्दे और नए आइटम मुहैया कराने जैसे सवालों पर गौर किया जाता है.

संसद की खाद्य प्रबंधन संबंधी समिति में 15 सांसद होते हैं जो 10 लोकसभा और 5 राज्यसभा से चुने जाते हैं.

ये समिति एक साल की अवधि के लिए गठित की जाती है लेकिन इसे एक्सटेंशन मिलती रहती है.

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