मोबाइल बैंकिंग के नाम हो सकता है साल 2016

  • 2 जनवरी 2016
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पिछले दो साल में बैंकिंग क्षेत्र में कुछ ज़बरदस्त बदलाव आए हैं. मोबाइल वॉलट तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है और हाल यह है कि पिछली बार बैंक कब गए, आपको शायद याद भी नहीं होगा.

एंड्राइड, एपल, विंडोज़ और बाज़ार में क़दम रखने की तैयारी में लगे दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टम मोबाइल पेमेंट का जादू अपने पिटारे में रखने का दावा कर रहे हैं.

मोबाइल पेमेंट के लिए टेक्नोलॉजी भी तैयार है. साल 2015 में रिज़र्व बैंक से लाइसेंस पाने वाले पेमेंट बैंक अब लोगों तक अपनी सेवा और तेज़ी से पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं.

मोबिक्विक, पेटीएम, ऑक्सीजन, एमरुपी, साइट्रस और फ़्रीचर्ज जैसी कंपनियां अब आपके लिए दस हज़ार रुपए तक के भुगतान में मदद करती है. ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने में इनका बड़ा योगदान रहा है. आप इनका इस्तेमाल कर कुछ भी ख़रीद सकते हैं.

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मोबाइल पेमेंट सात तरीके से आपकी ज़िन्दगी में ज़बरदस्त बदलाव ला सकता है.

1. देश भर में सरकारी बैंकों की क़रीब 85 हज़ार शाखाएं और डेढ़ लाख से ज़्यादा पोस्ट ऑफिस काम करते हैं. पर बैंक की शाखाओं और पोस्ट ऑफिस के ज़रिए 50 फ़ीसदी से कम लोगों तक ही बैंकिंग सेवाएं पहुंच सकी हैं. रिज़र्व बैंक अब इस स्थिति को बदलना चाहता है.

बहुत ही कम समय में मोबाइल वॉलेट बाजार में फैल गया है. इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी पेेटीएम का दावा है कि अगले साल उसके मोबाइल वॉलट इस्तेमाल करने वालों की संख्या 10 करोड़ से ज़्यादा हो जाएगी.

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2. मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल बिजली और टेलीफोन बिल चुकाने, रिचार्ज और टिकट बुकिंग वगैरह के लिए किया जाता है. लोग अपने बैंक से पैसे को मोबाइल वॉलेट में ऑनलाइन ट्रांसफर कर सकते हैं.

3. मोबाइल के ज़रिए पेमेंट करने पर बैंकिंग सेवा देश के बाकी 50 फ़ीसदी लोगों तक भी बहुत कम खर्च में पहुंचाई जा सकती है. सरकारी और निजी बैंकों के लिए यह बढ़ते धंधे का सबूत है. बैंक अपने नए प्रोडक्ट आसानी से लॉन्च कर सकेंगे क्योंकि यह सस्ता भी है.

4. मोबाइल वॉलट लागू होने पर टैक्स चोरी रोकना आसाना हो जाएगा. इसके ज़रिए छोटी मोटी खरीदारी पर भी नज़र रखी जा सकेगी. मोबाइल फ़ोन से होने वाले पेमेंट बैंक के ज़रिए ही होेंगे, लिहाजा, टैक्स अधिकारी ई-कॉमर्स पर पर अपनी नज़र आसानी से लख सकेंगे.

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5. जयपुर, नागपुर, रायपुर, इंदौर और पटना जैसे शहर अब ई-कॉमर्स के ज़रिए देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन रहे हैं. सभी शहर एक वित्तीय ढाँचे से जुड़ रहे हैं और उससे सभी का व्यापार भी बढ़ रहा है, इसलिए इसके और रफ़्तार पकड़ने की संभावना है.

कई देशों ने मोबाइल को बैंक अकाउंट से जोड़ना ज़रूरी कर दिया है. सरकारों ने बैकों से होेने वाले लेनदेन को पारदर्शी बनाने के लिए खाता धारकों की पहचान के नियम कड़े कर दिए हैं.

भारत समेत कई देश, बैंकिंग ट्रांजैक्शन के लिए, अब मोबाइल फ़ोन को सिक्योरिटी के लिहाज़ से अहम मानते हैं. इसीलिए सभी बैंकों के पास आपके मोबाइल फ़ोन नंबर हैं. मोबाइल के ज़रिए लोगों तक पंहुचना आसान है और सस्ता भी. इसीलिए अब सभी बैंक खाताधारकों से मोबाइल ऐप या वॉलेट डाउनलोड करने को कह रहे हैं.

6. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में मोबाइल वॉलट को लेकर काफ़ी गहमा गहमी है. गूगल, एपल, सैमसंग जैसी कंपनियां इस बाजार पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की होड़ में हैं.

साल 2015 में एपल पे क़रीब 15 लाख जगहों पर इस्तेमाल किया जा सकता था. गूगल ने तक़रीबन एक हज़ार वेबसाइट को इसके लिए राज़ी कर लिया है कि वे एंड्राइड पे से भुगतान स्वीकार करें.

फ़ेसबुक ने मैसेंजर के साथ पेमेंट फ़ीचर शुरू कर दिया है और माइक्रोसॉफ्ट इस बाज़ार में कूदने को तैयार है.

7. जब लोग मोबाइल बैंकिंग पर रोज़ाना कुछ न कुछ खरीदने की सोचेंगे तो भला चोर उचक्के दूर कैसे रह सकते हैं?

चूंकि चोरों की नज़र आपके स्मार्टफोन पर रहेगी, इसलिए आप अपने स्मार्टफोन को पहले से भी ज़्यादा संभाल कर रखें. उस पर पासवर्ड लगा कर रखना ज़रूरी है, ताकि अगर वह खो जाए तो आपके बारे में जानकारी लीक न हो.

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