'जस्टिस लोढ़ा की सिफारिशें स्वाभाविक नहीं'

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जस्टिस लोढ़ा समिति ने अपनी रिपोर्ट में मंत्रियों और सरकारी अफ़सरों को बीसीसीआई से बाहर रखने का सुझाव दिया है और साथ ही साथ क्रिकेट में सट्टेबाज़ी को वैध करने की भी सिफारिश की है.

वरिष्ठ खेल पत्रकार आशीष शुक्ला जस्टिस लोढ़ा समिति की सिफारिशों को अस्वभाविक बताते हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "यह स्वभाविक नहीं लगता. भारत में जितना सट्टा लगाया जाता है उसमें से ज्यादातर काला धन से होता है. अगर इसे क़ानूनन वैध करेंगे तो जाहिर है कि पूरा सेक्शन क़ानूनन होगा."

वो कहते हैं, "किस तरह से पैसे लगाए जाएंगे ये सोचने की बात होगी. जो सारे बुकमेकर है उनकी जगह नहीं रहेगी और उसकी जगह एक क़ानूनी ढांचा सामने आएगा."

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वो आगे कहते हैं कि लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत का जो सट्टा लगाने वाला समुदाय है वो बाहर के बुकमेकर के साथ मिलकर पैसा लगाता है. उनकी स्थिति पर कोई अंतर नहीं आएगा. वो तब भी यही चाहेंगे कि बाहर पैसा लगाएं.

उनके मुताबिक़ इससे जो एक उम्मीद है कि सट्टा से बहुत पैसे का फ़ायदा होगा सरकार को, वो नहीं हो पाएगा.

लोढ़ा समिति की सिफारिश है कि एक राज्य में सिर्फ़ एक ही क्रिकेट संघ हो और सभी को वोट देने का हक़ हो. इसे आशीष सही मानते हैं.

उनका कहना है कि इससे लंबे वक्त से चली आ रही इतिहास की एक लड़ी तो खत्म होगी लेकिन मुझे लगता है यह एक सही कदम है.

लोढ़ा समिति की सिफारिश है कि एक आंतरिक व्यवस्था विकसित की जाए सट्टा पर निगरानी रखने के लिए कि कौन कितना पैसा लगा रहा है. इसे पत्रकार विजय सही मानते हैं लेकिन साथ ही कहते हैं, "इससे सट्टा लगाने वाले लोगों के घरवाले जरूर चिंतित रहेंगे. उन्हें चिंता लगी रहेगी कि कहीं घर का मुखिया सारा पैसा सट्टा में तो नहीं बर्बाद कर रहा है."

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वो ये भी मानते हैं कि, "बाहर से अगर कोई सट्टा खेल रहा है तो ये आंतरिक व्यवस्था की वजह से पता चल जाएगा और उसे इजाज़त नहीं दी जाएगी."

एक राज्य को एक ही वोट का अधिकार हो, समिति की इस सिफ़ारिश पर विजय का मानना है कि महाराष्ट्र जैसे राज्य जहां तीन रणजी टीमें हैं. वहां एक ही वोट का हक़ होगा जो बीसीसीआई तय करेगा. वैसे ही गुजरात की भी तीन टीमें हैं.

लेकिन बिहार में एक भी रणजी टीम नहीं है. उनका कोई वोट नहीं है. अब उनके पास भी वोट का हक़ होगा. यह एक सही सिफारिश है.

वो कहते हैं कि क्रिकेट के नज़रिए से तीन चयनकर्ता और खिलाड़ियों के एसोसिएशन की सिफारिश सराहनीय है. एक पारदर्शिता का माहौल भी बनेगा.

(बीबीसी संवाददाता जुबैर अहमद से खेल पत्रकार विजय और आशीष शुक्ला की बातचीत पर आधारित)

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