फिर गुजरात भाजपा में जाएंगे संजय जोशी?

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अहमदाबाद में कुछ दिन पहले विश्व हिंदू परिषद नेता प्रवीण तोगड़िया के बेटे आकाश की शादी में मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के साथ आए एक ख़ास मेहमान को देखकर लोग हैरान रह गए.

आनंदी बेन पटेल के साथ थे भाजपा के पूर्व महासचिव संजय जोशी जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोधी समझा जाता है. जोशी के पिछले दिनों अहमदाबाद आने से गुजरात में मोदी के खेमे के नेताओं के कान खड़े हो गए हैं.

जोशी न सिर्फ़ इस विवाह समारोह में शामिल हुए बल्कि वह एक ही दिन में दो बार अहमदाबाद में संघ के मुख्यालय भी गए और संघ के वरिष्ठ नेताओं से बात की.

संजय जोशी गुजरात में अपनी वापसी के सवाल पर ज़्यादा कुछ नहीं कहते लेकिन गुजरात में उनकी लगातार मौजूदगी और मोदी के क़रीबी समझे जाने वाले राज्यपाल ओपी कोहली से मुलाक़ात की रोशनी में कई नए समीकरणों का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं लगता.

संजय जोशी बीते 10 साल में मुश्किल से 4-5 बार गुजरात आए होंगे. वह इन 10 साल में जब भी गुजरात आए, उन्होंने ख़ुद को राजनीति से दूर रखा.

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उनसे भाजपा के जो कार्यकर्ता मिलते भी थे, वो अक्सर गुपचुप मिलते थे. उन्हें मालूम था कि जोशी से मिलने को मोदी और अमित शाह से बग़ावत की तरह देखा जाएगा.

असल में 2005 तक भाजपा के संगठन महासचिव रहे संजय जोशी को एक सीडी के सामने आने के बाद पद छोड़ना पड़ा था.

जोशी तब पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के क़रीबी माने जाते थे और उनकी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह राज्यमंत्री अमित शाह से बनती नहीं थी.

बाद में सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले की जांच कर रही सीबीआई के सामने गुजरात एटीएस के अफ़सरों ने लिखित में बयान दिया कि भाजपा के मुंबई अधिवेशन में सीडी उन्होंने बांटी थी.

इस घटना को 10 साल हो चुके हैं और मध्य प्रदेश फ़ॉरेंसिक लैब से क्लीन चिट भी मिल चुकी है. लेकिन 2012 में उत्तर प्रदेश चुनाव के प्रभारी बनने के अलावा वो राजनीति से दूर ही रहे हैं.

हालांकि तब भी मोदी की ज़िद की वजह से भाजपा नेतृत्व को उन्हें हटाना पड़ा था.

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मोदी 2014 में लोकसभा चुनाव जीतकर दिल्ली जा चुके हैं तो गुजरात में भी हालात भाजपा के मनमाफ़िक नहीं रहे.

हार्दिक पटेल के आरक्षण आंदोलन के बाद पटेलों का एक बड़ा तबक़ा भाजपा से छिटका तो भाजपा का नगरीय निकाय चुनाव में प्रदर्शन भी ठीक नहीं रहा.

लेकिन एक बात अब भी बदली नहीं. आज भी जोशी के संबंध मोदी और शाह के साथ पहले जैसे ही हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं आया.

भाजपा के गुजरात अध्यक्ष आरसी फल्दू से संजय जोशी के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि जोशी के बारे में अगर कोई फ़ैसला होगा तो वो राष्ट्रीय स्तर पर ही होगा.

वहीं भाजपा के एक वरिष्ठ नेता नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर कहते हैं कि नरेंद्र मोदी की गैर-हाज़िरी में गुजरात में भाजपा का स्तर तेज़ी से गिर रहा है. गुजरात भाजपा के पास ऐसा नेता नहीं है जो सबको मान्य हो.

कुछ समय को छोड़ दिया जाए तो भाजपा लगातार 20 साल से राज्य में सत्ता में है. ऐसे में कार्यकर्ता और नेताओं के बीच दूरी दिखती है.

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उनका कहना है कि इस हालत में गुजरात में भाजपा को बचाने का काम अमित शाह या संजय जोशी ही बखूबी कर सकते हैं.

अमित शाह के पास राष्ट्रीय अध्यक्ष पद है, इसके अलावा अगर आनंदी बेन को शाह और जोशी में से किसी को पसंद करना हो तो शायद वो जोशी को करें क्योंकि शाह महत्त्वाकांक्षी हैं और उनकी नज़र भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है. जबकि जोशी सत्ता से दूर ही रहे हैं.

गुजरात में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक नेता ने बीबीसी से कहा कि मोदी और शाह दोनों ही जोशी की वापसी से खुश नहीं होंगे, लेकिन पार्टी को जोशी की ज़रूरत है और इस वजह से उनकी वापसी का निर्णय हो सकता है.

वो कहते हैं कि अगर गुजरात भाजपा के कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए आनंदीबेन पटेल जोशी को वापस लाना चाहती हैं तो शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मसले से ख़ुद को दूर रखना पसंद करें.

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