मई के बाद बस में वाईफ़ाई, जीपीएस, सीसीटीवी

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दिल्ली की सरकारी बसों में मई के बाद वाईफ़ाई, जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी.

दिल्ली परिवहन मंत्री गोपाल राय ने बीबीसी से एक विशेष मुलाक़ात के दौरान यह जानकारी दी.

गोपाल राय के अनुसार इस साल के अंत तक इसमें 2000 अतिरिक्त बसें जोड़ी जाएंगी. और इसके अलावा जल्द ही यात्रियों के लिए कॉमन कार्ड उपलब्ध होगा, जिसे मेट्रो और बसों में इस्तेमाल किया जा सकेगा.

दिल्ली में इस समय 6000 सरकारी बसें हैं.

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गोपाल राय ने कहा, "2016 दिल्ली पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए ऐतिहासिक साल होगा. इस साल मई के बाद दिल्ली वालों को कॉमन मोबिलिटी कार्ड सुविधा उपलब्ध होगी."

उनका बताया कि अब एक ही कार्ड को मेट्रो, क्लस्टर बसों और डीटीसी बसों में इस्तेमाल किया जा सकेगा.

भारत में अब तक यात्रियों को बसों और मेट्रो के लिए अलग-अलग टिकट या कार्ड खरीदने पड़ते हैं. दुनिया के कई बड़े शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए एक ही कार्ड का इस्तेमाल होता है.

गोपाल राय के अनुसार दिल्ली में इस सुविधा को उपलब्ध कराने के लिए मेट्रो के अधिकारियों से बात हो चुकी है.

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दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए बनी ऑड-ईवन योजना के 15 जनवरी को ख़त्म होने के बाद क्या होगा? यह सवाल कई लोगों के ज़हन में है. इस पर मंत्री क्या कहते हैं?

"कई तरह की समस्याएं खड़ी हुई हैं, जिनके समाधान पर विचार जारी है. ऐसा लगता है कि सरकार के पास दीर्घकालिक योजनाएं तो हैं, लेकिन कोई अल्पकालिक योजना नहीं है."

गोपाल राय कहते हैं, "हमें अब तक जो समझ में आया है, वो यह कि लास्ट माइल कनेक्टिविटी बेहतर करनी होगी. बसों की संख्या बढ़ानी होगी. अभी तो अस्थायी बसें लाई गई हैं, लेकिन स्थायी बसों का इंतज़ाम करना पड़ेगा. मेट्रो के फेरे बढ़ाने पड़ेंगे, अधिक डिब्बे जोड़ने पड़ेंगे."

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परिवहन मंत्री ने दिल्ली में 'रिंग रेलवे' को दोबारा ज़िंदा करने की भी बात कही. उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री से भी बात की है.

'रिंग रेलवे' लोकल ट्रेन सिस्टम था, जो मंत्री के मुताबिक़ एक ज़माने में दिल्ली वालों के लिए 'लाइफ़लाइन' हुआ करता था.

इसमें समय लगेगा, लेकिन 15 जनवरी के अगले दिन से वही भीड़-भाड़, वही अराजकता पैदा हुई तो?

गोपाल राय के मुताबिक़ 16 जनवरी से सरकार और दिल्ली वालों के पास दो विकल्प होंगे, पहला क़ानूनी और दूसरा स्वैच्छिक.

उन्होंने क़ानून का रास्ता अपनाने से इनकार कर दिया है. वे यही चाहते हैं कि दिल्ली वाले कार पूल का इस्तेमाल जारी रखें.

"हमें उम्मीद है कि जिस तरह से दिल्ली वालों ने अपनी ज़िम्मेदारी निभाई है और इस अभियान को फॉलो किया है, आगे भी वो इसके बारे में सोचेंगे. क्योंकि ये लड़ाई प्रदूषण-मुक्त दिल्ली की लड़ाई है."

फिलहाल ऑड-ईवन फ़ॉर्मूला से प्रदूषण कम होने पर सवाल उठ रहे हैं.

इस बारे में उनका दावा है कि वाहनों से हवा में फैले ज़हरीले पदार्थ 25 से 30 फ़ीसद कम हुए हैं, जिसे पीएम 2.5 के पैमाने से पर परखा जाता है.

धूल और गर्द से प्रदूषित हवा पीएम 10 पर परखी जाती है, जो कम नहीं हो सकी है.

मंत्री का कहना है कि फिलहाल गाड़ियों से पैदा होने वाले प्रदूषण को कम करने की कोशिश की जा रही है.

धूल और गर्द के स्तर को कम करने के उपायों को अप्रैल से लागू किया जाएगा, जिसमें हरी घास लगाना और वैक्यूम क्लीनर से सड़कें साफ़ करने की योजनाएं शामिल हैं.

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